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News India Live, Digital Desk: हम सब दिवाली मनाते हैं, दीये जलाते हैं, मिठाइयां खाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि बड़ी दिवाली के ठीक 15 दिन बाद एक और दिवाली मनाई जाती है, जिसे ‘नाग दिवाली’ कहते हैं? यह एक बहुत ही अनोखा और ख़ास त्योहार है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।तो चलिए आज जानते हैं कि यह नाग दिवाली आखिर होती क्या है, इसे क्यों मनाते हैं और इसका हमारी ज़िंदगी पर क्या असर पड़ता है।कब मनाई जाएगी नाग दिवाली 2025?हिन्दू पंचांग के अनुसार, यह त्योहार हर साल मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। साल 2025 में, यह ख़ास दिन 10 नवंबर, सोमवार को पड़ेगा।क्यों मनाते हैं यह त्योहार?यह त्योहार साँपों, यानी नागों को समर्पित है। हिन्दू धर्म में साँपों को सिर्फ़ एक जीव नहीं, बल्कि देवता का दर्जा दिया गया है। उन्हें पाताल लोक का रक्षक माना जाता है। इस दिन मुख्य रूप से अष्टनागों, यानी आठ महाशक्तिशाली नागों की पूजा की जाती है, ताकि साल भर सर्प दंश (सांप के काटने) का भय न रहे और जीवन में सुख-शांति बनी रहे।इस दिन की एक और ख़ास बात है। यह भगवान शिव और विष्णु, दोनों से जुड़ा है। चूँकि नाग भगवान शिव के गले का हार हैं और भगवान विष्णु की शैय्या, इसलिए इस दिन इनकी पूजा करने से शिव और विष्णु दोनों का आशीर्वाद मिलता है।इस दिन क्या ख़ास करें?नागों की पूजा: इस दिन घर के मुख्य द्वार पर रंगोली से नागों की आकृति बनाई जाती है। फिर हल्दी, चावल, फूल और दूध चढ़ाकर उनकी पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इससे घर में बुरी शक्तियों का प्रवेश नहीं होता।कालसर्प दोष से मुक्ति: जिन लोगों की कुंडली में ‘कालसर्प दोष’ या ‘राहु-केतु’ से जुड़ी कोई परेशानी होती है, उनके लिए यह दिन किसी वरदान से कम नहीं है। इस दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से इन दोषों का प्रभाव काफ़ी कम हो जाता है और जीवन में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।संक्षेप में, नाग दिवाली प्रकृति के प्रति सम्मान और जीवन में चल रही उन अदृश्य बाधाओं को दूर करने का दिन है, जिन्हें हम अक्सर समझ नहीं पाते। यह हमें सिखाता है कि डरने की नहीं, बल्कि हर जीव का सम्मान करने की ज़रूरत है।
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