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Meenakshi Devi Secret : कौन हैं देवी मीनाक्षी? जन्म के समय क्यों था उनका तीसरा स्तन और कैसे गायब हुआ यह रहस्यमयी अंग?

News India Live, Digital Desk : दक्षिण भारत के सबसे भव्य मंदिरों में से एक मदुरै का मीनाक्षी अम्मन मंदिर देवी मीनाक्षी को समर्पित है। देवी मीनाक्षी को केवल एक आराध्य ही नहीं, बल्कि एक महान योद्धा और शासक के रूप में भी पूजा जाता है। लेकिन उनके जन्म की कहानी बहुत अनोखी है।यज्ञ की अग्नि से हुआ जन्मपौराणिक कथाओं के अनुसार, मदुरै के राजा मलयध्वज पांड्य और रानी कांचनमाला की कोई संतान नहीं थी। उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए ‘पुत्रकामेष्टि यज्ञ’ किया। यज्ञ की अग्नि से एक दिव्य बालिका प्रकट हुई, लेकिन उस बालिका को देखकर राजा-रानी अचंभित रह गए क्योंकि उस बच्ची के तीन स्तन (Three Breasts) थे।क्या था तीसरे अंग का रहस्य? (The Secret of Third Organ)जब राजा इस असामान्य शारीरिक रचना से चिंतित हुए, तो एक आकाशवाणी हुई। दिव्य वाणी ने कहा:”राजन्, चिंता न करें। इस बालिका का पालन-पोषण एक राजकुमार की तरह करें। जब यह कन्या अपने होने वाले पति से मिलेगी, तो इसका तीसरा अंग अपने आप अदृश्य हो जाएगा।”योद्धा मीनाक्षी और महादेव से मिलनराजा ने अपनी पुत्री का नाम तडाटकाई (मीनाक्षी) रखा और उन्हें युद्ध कला, राजनीति और शस्त्र विद्या में निपुण बनाया। मीनाक्षी ने दिग्विजिय अभियान शुरू किया और दुनिया के सभी राजाओं को हराते हुए वे कैलाश पर्वत तक पहुँच गईं।वहाँ जब उनका सामना भगवान शिव (सुंदरेश्वर) से हुआ, तो उन्हें देखते ही मीनाक्षी के भीतर प्रेम और लज्जा का भाव जागृत हो गया। उसी क्षण आकाशवाणी के अनुसार उनका तीसरा स्तन गायब हो गया। मीनाक्षी समझ गईं कि महादेव ही उनके स्वामी हैं। बाद में मदुरै में भगवान शिव और देवी मीनाक्षी का भव्य विवाह संपन्न हुआ।नाम का अर्थ: मीनाक्षी’मीनाक्षी’ शब्द दो शब्दों से बना है ‘मीन’ (मछली) और ‘अक्षि’ (आँख)। जिस प्रकार मछली अपनी आँखों की पलकें नहीं झपकाती और अपने अंडों की रक्षा केवल दृष्टि से करती है, उसी प्रकार देवी मीनाक्षी भी अपनी जागृत दृष्टि से हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।