ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नागकेसर का संबंध सीधे तौर पर ‘शिव’ और ‘लक्ष्मी’ दोनों से है। इसकी सुगंध और औषधीय गुण जहां सेहत सुधारते हैं, वहीं इसके तांत्रिक उपाय राहु और शनि जैसे क्रूर ग्रहों को शांत करने की क्षमता रखते हैं। आइए जानते हैं ग्रहों के दोष दूर करने के लिए नागकेसर का उपयोग कैसे करें:1. राहु-केतु के अशुभ प्रभाव से मुक्तियदि आपकी कुंडली में राहु या केतु भारी है और अचानक बाधाएं आ रही हैं, तो यह उपाय करें:उपाय: एक चांदी की छोटी डिब्बी में नागकेसर और शहद भरकर अपने घर के मंदिर या तिजोरी में रखें।लाभ: मान्यता है कि इससे राहु की नकारात्मक ऊर्जा शांत होती है और घर में अचानक आने वाली विपत्तियां टल जाती हैं।2. शनि दोष और साढ़ेसाती के लिएशनि देव को अनुशासित ग्रह माना जाता है, जो कर्मों के अनुसार दंड देते हैं। शनि के कष्टों को कम करने के लिए नागकेसर बहुत प्रभावी है:उपाय: शनिवार के दिन एक काले कपड़े में नागकेसर, थोड़े काले तिल और एक लोहे का कील बांधकर किसी बहते जल में प्रवाहित कर दें।लाभ: इससे शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती के दौरान मिलने वाली मानसिक और शारीरिक पीड़ा में राहत मिलती है।3. धन वृद्धि और दरिद्रता निवारणनागकेसर का उपयोग महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए भी किया जाता है:उपाय: किसी भी शुभ मुहूर्त (जैसे शुक्रवार या पूर्णिमा) पर नागकेसर के फूलों को लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखें।लाभ: इससे अनावश्यक खर्चे रुकते हैं और आय के नए स्रोत बनते हैं।4. कार्यस्थल पर सफलता के लिएयदि व्यापार में घाटा हो रहा है या नौकरी में प्रमोशन रुका हुआ है:उपाय: नागकेसर के चूर्ण को चंदन में मिलाकर नियमित रूप से माथे पर तिलक लगाएं।लाभ: इससे आपका आकर्षण बढ़ता है और कार्यक्षेत्र में अधिकारियों के साथ आपके संबंध बेहतर होते हैं।
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