News India Live, Digital Desk: बिहार के नालंदा जिले में गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 की सुबह खुशियों का माहौल मातम में बदल गया। जिले के रहुई प्रखंड अंतर्गत पैठना गांव में आयोजित एक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान अचानक मची भगदड़ ने कई हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया। इस भयावह हादसे में 8 महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हैं। लेकिन इस त्रासदी का सबसे मार्मिक पहलू यह है कि इन 8 माताओं की असमय मृत्यु के कारण कुल 34 बच्चे अनाथ हो गए हैं, जिनके सिर से मां का आंचल हमेशा के लिए छिन गया है।गुड़िया ने सुनाई मौत के तांडव की आंखों देखी कहानी हादसे की चश्मदीद गुड़िया कुमारी ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि कैसे पल भर में सब कुछ खत्म हो गया। गुड़िया ने सिसकते हुए कहा, “हम सब पूजा के लिए कतार में खड़े थे, तभी पीछे से अचानक धक्का-मुक्की शुरू हुई। लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे। मेरी आंखों के सामने ही आठ महिलाएं जमीन पर गिर गईं और भीड़ उन्हें कुचलती हुई आगे निकल गई। वे तड़प रही थीं, सांस लेने के लिए छटपटा रही थीं, लेकिन बचाने वाला कोई नहीं था।” गुड़िया के अनुसार, भीड़ इतनी ज्यादा थी कि वहां तैनात सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी साबित हुए।34 मासूमों के सामने अब अंधेरा भविष्य इस हादसे ने जिन 8 महिलाओं की जान ली, उनके पीछे रोते-बिलखते 34 बच्चे छूट गए हैं। इनमें से कई बच्चे तो इतने छोटे हैं कि उन्हें अभी ‘मौत’ शब्द का मतलब भी नहीं पता। मृतका शांति देवी के चार छोटे बच्चे अपनी मां के पार्थिव शरीर से लिपटकर रो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की घोर लापरवाही ने इन मासूमों का भविष्य अंधकार में डाल दिया है। गांव के हर घर में चूल्हा नहीं जला है और चारों ओर सिर्फ चीख-पुकार सुनाई दे रही है।प्रशासनिक अमले में हड़कंप, मुख्यमंत्री ने जताया शोक भगदड़ की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस बल मौके पर पहुंचे और घायलों को इलाज के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल और पावापुरी मेडिकल कॉलेज भेजा गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए 4-4 लाख रुपये मुआवजे का एलान किया है। साथ ही, उन्होंने डीएम और एसपी को घटना की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यक्रम में उम्मीद से कहीं ज्यादा भीड़ जुटी थी, लेकिन पुलिस की तैनाती बेहद कम थी। निकासी द्वार छोटा होने के कारण दबाव बढ़ा और यह बड़ा हादसा हो गया। अब सवाल यह उठता है कि क्या मुआवजे की राशि उन 34 बच्चों को उनकी मां की कमी पूरी कर पाएगी? फिलहाल पूरे जिले में शोक की लहर है और लोग इस काली सुबह को कभी नहीं भूल पाएंगे।
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