
News India Live, Digital Desk: नेपाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। भ्रष्टाचार विरोधी छवि और ‘जेन-जी’ (Gen Z) विरोध प्रदर्शनों के नायक बनकर उभरे सूदन गुरुंग (Sudan Gurung) ने बुधवार (22 अप्रैल 2026) को नेपाल के गृहमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपनी नियुक्ति के एक महीने के भीतर ही यह फैसला लिया है, जिससे प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (Balen Shah) के नेतृत्व वाली सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।नैतिकता का हवाला देकर छोड़ा पदसूदन गुरुंग ने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए इस्तीफे की घोषणा करते हुए लिखा कि वे अपने ऊपर लग रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “मेरे लिए पद से ज्यादा नैतिकता महत्वपूर्ण है और सार्वजनिक विश्वास से बढ़कर कोई शक्ति नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे नहीं चाहते कि उनके पद पर रहते हुए जांच प्रक्रिया में ‘हितों का टकराव’ (Conflict of Interest) हो।क्या हैं गंभीर आरोप?गृहमंत्री गुरुंग की मुश्किलें तब शुरू हुईं जब उनकी संपत्ति के खुलासे और कुछ संदिग्ध निवेशों पर सवाल उठाए गए।दीपक भट्ट से कनेक्शन: मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी व्यवसायी दीपक भट्ट के साथ उनके व्यापारिक संबंधों की खबरें मीडिया में प्रमुखता से आईं।शेयर बाजार में निवेश: स्टार माइक्रो इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में उनकी हिस्सेदारी को लेकर विवाद खड़ा हुआ। आरोप है कि इस कंपनी में निवेश के स्रोत पारदर्शी नहीं थे।एनजीओ ‘हामी नेपाल’: उनके स्वयंसेवी संगठन को मिलने वाले फंड के स्रोतों को लेकर भी जांच की मांग उठ रही थी।भ्रष्टाचार विरोधी मंच से मिली थी पहचान38 वर्षीय सूदन गुरुंग पिछले साल सितंबर में हुए भ्रष्टाचार विरोधी युवाओं के प्रदर्शनों का एक प्रमुख चेहरा थे। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) में शामिल होने के बाद उन्होंने चुनाव जीता और 27 मार्च 2026 को गृहमंत्री का पद संभाला था। पद संभालते ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखत की गिरफ्तारी जैसी साहसिक कार्रवाइयां की थीं, जिसकी काफी चर्चा हुई थी।बालेंद्र शाह सरकार के लिए बड़ी चुनौतीनेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने सूदन गुरुंग का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। फिलहाल गृह मंत्रालय का प्रभार खुद प्रधानमंत्री ही संभालेंगे। विपक्षी दलों नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल (CPN-UML) ने इस इस्तीफे को सरकार की नैतिक हार बताया है। जानकारों का मानना है कि यह इस्तीफा नई सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही के वादों के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होगा।
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