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Nitish Kumar Cabinet : 26 मंत्री और महिला शक्ति के हिस्से सिर्फ 3 क्या यह है आधी आबादी का असली हक?

News India Live, Digital Desk : हाल ही में जबनीतीश कुमार की नई कैबिनेट का गठन हुआ, तो सबके मन में एक ही सवाल था – क्या इस बारबिहार सरकार में महिलाओं को सही जगह मिलेगी? खास तौर पर तब, जब यह सब जानते हैं किबिहार विधानसभा चुनाव में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर वोट डाला और NDA की जीत में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। लेकिन, जो तस्वीर सामने आई, वह थोड़ी निराशाजनक है। [A relevant SEO keyword like ‘नीतीश कुमार नई कैबिनेट मंत्री सूची 2025’ could be inserted naturally here if the context fits.]कुल 26 मंत्रियों वाली कैबिनेट में हमें सिर्फ तीन महिला मंत्री देखने को मिली हैं। जी हाँ, आपने बिल्कुल सही सुना – 26 में से बस 3! अगर आप गणित लगाएंगे, तो पाएंगे किनीतीश मंत्रिमंडल में महिला मंत्रियों का प्रतिनिधित्व मात्र 11% के आसपास बैठता है। सोचने वाली बात है, जिस आधी आबादी पर सरकारें बड़ी-बड़ी बातें करती हैं, उनका कैबिनेट में इतना कम हिस्सा होना कैसा लगता है? [A relevant long-tail SEO keyword like ‘बिहार में महिला विधायकों का राजनीतिक भविष्य’ can be inserted organically here.]चलिए, इस हिस्सेदारी को थोड़ी देर के लिए किनारे रखते हैं और उन तीन महिला चेहरों की बात करते हैं जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिली है।कौन हैं वो तीन महिला मंत्री?इस नई टीम मेंलेसी सिंह, रमा निषाद और श्रेयसी सिंह को मंत्री बनाया गया है। लेसी सिंह JDU से हैं और एक पुराना व भरोसेमंद नाम हैं। वहीं, रमा निषाद और श्रेयसी सिंह BJP के कोटे से मंत्री बनी हैं। श्रेयसी सिंह तो पहली बार विधायक बनने के बाद ही मंत्री पद तक पहुँच गई हैं। आपको याद होगा, वो जानी-मानी अंतरराष्ट्रीय शूटर भी रही हैं। इन तीनों को जिम्मेदारी दी गई है।हाई वोटर टर्नआउट, लो रिप्रेजेंटेशनचुनावों के दौरान आंकड़े बताते हैं किबिहार की महिला मतदाताओं ने पुरुषों से भी ज्यादा उत्साह से वोट किया। उन्होंने सरकार चुनने में अपनी ताकत दिखाई, पर क्या सरकार में उन्हें उनका वाजिब हक मिला?आम तौर पर, एक बड़ा सवाल यही उठता है कि इतनी शानदार राजनीतिक सक्रियता (Political Participation) के बावजूदसरकार की कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी इतनी कम क्यों है? हमें मानना पड़ेगा कि सिर्फ कुछ ‘चेहरे’ शामिल कर लेने सेमहिला सशक्तिकरण का लक्ष्य पूरा नहीं होता। हमें ऐसी सरकारों की जरूरत है जो सिर्फ भाषणों में नहीं, बल्कि फैसलों और प्रतिनिधित्व में भी महिलाओं को बराबर की जगह दे। उम्मीद करते हैं कि भविष्य मेंबिहार की राजनीति इस समीकरण को बेहतर ढंग से समझेगी।