
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक महत्वपूर्ण वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद उपजे भारी राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद के बीच मेटा (Meta) के शीर्ष वैश्विक अधिकारियों ने बुधवार को दिल्ली पहुंचकर सरकारी प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन के साथ हुई इस उच्च स्तरीय और लगभग 45 मिनट तक चली लंबी बैठक में मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोल काप्लान ने शिरकत की। इस दौरान कंपनी के अधिकारियों ने सरकार के सामने यह स्पष्ट करने का प्रयास किया कि आखिर किस तकनीकी या एल्गोरिदम की वजह से प्रधानमंत्री का वह वीडियो प्लेटफॉर्म से डिलीट हुआ था, जिसमें उन्होंने परीक्षा से जुड़े विवादों और प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश दिया था।
संसदीय समिति का कड़ा रुख, मार्क जुकरबर्ग को तीन दिन में बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश
इस पूरे प्रकरण को बेहद गंभीरता से लेते हुए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग को तीन दिन के भीतर बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने का कड़ा निर्देश दिया है। लोकसभा सचिवालय की तरफ से जारी पत्र में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समयावधि के भीतर माफी नहीं मांगी जाती है, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3) के तहत मेटा को मिलने वाली 'सेफ हार्बर' यानी कानूनी सुरक्षा और छूट वापस ले ली जाएगी और कंपनी के खिलाफ एक पब्लिशर के रूप में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। समिति ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति जताई कि फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे मंचों पर प्रधानमंत्री के वीडियो को 5 से 6 घंटे तक गायब रखा गया, जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है।
बाल यौन शोषण सामग्री और मंचों की जवाबदेही पर सरकार की दो-टूक नाराजगी
संसदीय समिति की इस महत्वपूर्ण बैठक में केवल प्रधानमंत्री का वीडियो हटाने का मुद्दा ही नहीं छाया रहा, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित हो रही बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) और महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट्स पर भी गंभीर चिंता जताई गई। समिति ने दो-टूक शब्दों में कहा कि यदि मध्यवर्ती मंच अपने पोर्टलों से ऐसी आपत्तिजनक और गैरकानूनी सामग्री को तुरंत नहीं हटाते हैं, तो आईटी कानून के प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे। समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि मेटा के अधिकारी लगातार देश के गृह मंत्रालय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयों के दिशा-निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे देश की व्यवस्था और सुरक्षा प्रभावित होती है।
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