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PMO New Address : 125 साल बाद बदला PM का पता अब सेवा तीर्थ से चलेगी सरकार, जानें नए ऑफिस की 5 बड़ी खूबियां

आज 13 फरवरी का दिन भारत के लिए ऐतिहासिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रायसीना हिल्स स्थित ब्रिटिश काल के ‘साउथ ब्लॉक’ को छोड़कर अपने नए और अत्याधुनिक कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में प्रवेश किया है। यह बदलाव करीब सवा सौ साल बाद हो रहा है, क्योंकि पंडित नेहरू से लेकर अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों का दफ्तर साउथ ब्लॉक में ही रहा है।1. ‘सत्ता’ नहीं, अब ‘सेवा’ का केंद्रसरकार ने इस बदलाव के साथ ही एक वैचारिक संदेश भी दिया है। पीएम मोदी ने पीएमओ का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ किया है, जो ‘सत्ता से सेवा’ के संकल्प को दर्शाता है।एकीकृत सचिवालय: ‘सेवा तीर्थ’ में अब PMO, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) एक ही छत के नीचे होंगे, जो पहले अलग-अलग जगहों पर थे।कर्तव्य भवन: प्रधानमंत्री ने इसके साथ ही कर्तव्य भवन-1 और 2 का भी उद्घाटन किया है, जहाँ रक्षा, वित्त और स्वास्थ्य जैसे कई महत्वपूर्ण मंत्रालय शिफ्ट होंगे।2. क्यों चुनी गई 13 फरवरी की तारीख?आज की तारीख का चुनाव बहुत सोच-समझकर किया गया है। 13 फरवरी 1931 को ही अंग्रेजों ने आधिकारिक रूप से नई दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित किया था। ठीक 95 साल बाद, पीएम मोदी ने उसी तारीख को ब्रिटिश काल की इमारतों से मोह भंग कर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के नए केंद्र का उद्घाटन किया है।3. ‘सेवा तीर्थ’ की 5 हाई-टेक विशेषताएंयह नया परिसर केवल एक ऑफिस नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया ‘स्मार्ट कैंपस’ है:4-स्टार GRIHA रेटिंग: यह पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल (Eco-friendly) है, जिसमें सौर ऊर्जा और जल संरक्षण की विशेष व्यवस्था है।डिजिटल इंटीग्रेशन: दफ्तर पूरी तरह पेपरलेस कार्यप्रणाली (e-Office) पर आधारित है।सुरक्षा चक्र: इसमें ‘स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल’ और आधुनिक सुरक्षा फ्रेमवर्क लगाए गए हैं।पब्लिक इंटरफेस: आम नागरिकों के लिए सुगम और व्यवस्थित ‘रिसेप्शन एरिया’ बनाया गया है।100 रुपये का सिक्का: इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए पीएम ने 100 रुपये का एक स्मारक सिक्का (Commemorative Coin) भी जारी किया है।4. पुराने ‘साउथ ब्लॉक’ का क्या होगा?साउथ और नॉर्थ ब्लॉक, जो दशकों तक भारतीय सत्ता के केंद्र रहे हैं, उन्हें अब खाली कर ‘युगे युगीन भारत’ (Yuge Yugeen Bharat) राष्ट्रीय संग्रहालय में तब्दील कर दिया जाएगा। यह दुनिया का सबसे बड़ा संग्रहालय होगा, जो भारत के 5000 साल के इतिहास को दर्शाएगा।