
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के जोनल कार्यालय से जुड़ा एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। प्राप्त विवरण के अनुसार, जोनल कार्यालय में कार्यरत राजेश चौधरी पर अपने पद और प्रशासनिक रसूख का खुला दुरुपयोग करते हुए एक मीडिया कर्मी (पत्रकार) के साथ अशोभनीय व्यवहार, अभद्र भाषा का प्रयोग और सीधे तौर पर जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगे हैं। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ से जुड़े एक पत्रकार को दिनदहाड़े और सार्वजनिक उपक्रम के कार्यालय स्तर पर इस प्रकार की धमकियां मिलना राजधानी के मीडिया और प्रशासनिक गलियारों में तीव्र चर्चा का विषय बन गया है। आरोप है कि जब संबंधित पत्रकार ने इस पूरे घटनाक्रम और दुर्व्यवहार की लिखित व मौखिक शिकायत बैंक के उसी परिसर और सक्षम प्रशासनिक तंत्र में दर्ज कराने का प्रयास किया, तो स्थिति सुधरने के बजाय और अधिक भयावह हो गई। शिकायत के बाद से पत्रकार को लगातार अज्ञात व ज्ञात माध्यमों से गंभीर परिणाम भुगतने और ठिकाने लगाने की खुली धमकियां दी जा रही हैं, जिससे पीड़ित और उसके परिवार की सुरक्षा पर गहरा संकट मंडराने लगा है।
वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण का आरोप: आंतरिक तंत्र पर क्यों उठ रहे सवाल?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चिंताजनक पहलू यह उभरकर सामने आया है कि बैंक परिसर में न्याय की गुहार लगाने के बावजूद आरोपी के खिलाफ कोई आंतरिक अनुशासनात्मक या प्रशासनिक जांच शुरू करने के बजाय मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जा रहा है। पीड़ित पक्ष का सीधा आरोप है कि जोनल स्तर पर उच्च पदों पर आसीन वरिष्ठ अधिकारी न केवल इस पूरे प्रकरण से भली-भांति अवगत हैं, बल्कि वे आरोपी राजेश चौधरी को खुला संरक्षण प्रदान कर रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के किसी भी अग्रणी राष्ट्रीयकृत बैंक में इस प्रकार की कार्यप्रणाली बेहद दुर्लभ और आपत्तिजनक मानी जाती है, जहां कर्तव्यनिष्ठा, पारदर्शिता और सार्वजनिक संवाद के कड़े मानक स्थापित किए गए हैं। ऐसे में यदि बैंक के वरिष्ठ अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारी के आपराधिक आचरण और दुर्व्यवहार पर आंखें मूंद लेते हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक सांठगांठ और संस्थागत भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। स्थानीय स्तर पर शिकायत की अनदेखी किए जाने से आरोपी के हौसले और अधिक बुलंद हो गए हैं, जिसके चलते बैंक परिसर के भीतर व बाहर भय का माहौल निर्मित करने की कोशिश की जा रही है।
सार्वजनिक उपक्रमों में आचरण संहिता का उल्लंघन: क्या कहते हैं बैंकिंग नियम?
पंजाब नेशनल बैंक समेत देश के सभी राष्ट्रीयकृत वित्तीय संस्थानों में सेवारत कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए 'अधिकारी कर्मचारी (आचरण) नियमावली' (Officer Employees' Conduct Regulations) स्पष्ट और बाध्यकारी रूप से लागू होती है। इन विनियामक नियमों के तहत बैंक का कोई भी कर्मी अपने आधिकारिक पद की आड़ में किसी नागरिक, ग्राहक या पत्रकार के साथ अनुचित दबाव, अवांछित आचरण, धमकी अथवा आपराधिक दुराचार नहीं कर सकता। किसी भी व्यक्ति को गाली-गलौज देना या जानलेवा धमकी देना न केवल सेवा शर्तों का घोर उल्लंघन (Gross Misconduct) है, बल्कि यह सीधे तौर पर भारतीय आपराधिक कानूनों के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। जब कोई अधिकारी अपने दफ्तर और प्रभाव का उपयोग किसी स्वतंत्र जांच या समाचार संकलन को दबाने के लिए करता है, तो यह आचरण नियमावली की उस मूल भावना को तार-तार कर देता है जो बैंक की साख को बनाए रखने के लिए अनिवार्य की गई है। नियमों के अनुसार, ऐसे गंभीर आरोपों की सूचना मिलते ही संबंधित सक्षम प्राधिकारी का यह विधिक दायित्व बनता है कि वह आरोपी को तत्काल प्रभाव से संवेदनशील जिम्मेदारियों से अलग करे और निष्पक्ष प्राथमिक जांच बिठाए।
कानूनी और पुलिसिया कार्रवाई की तैयारी: BNS और सतर्कता तंत्र का रुख
चूंकि बैंक के जोनल स्तर पर मामले को दबाए जाने की प्रबल आशंका जताई जा रही है, इसलिए इस प्रकरण को अब केवल विभागीय शिकायत तक सीमित रखने के बजाय वृहद कानूनी रूप दिया जा रहा है। विधिक विशेषज्ञों के अनुसार, किसी व्यक्ति को जान से मारने की धमकी देना भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351 (आपराधिक धमकी) और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने व गाली-गलौज करने पर धारा 352 के तहत सीधे तौर पर गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध के दायरे में आता है। पीड़ित पक्ष द्वारा इस पूरे घटनाक्रम, धमकी के डिजिटल साक्ष्यों, ऑडियो रिकॉर्डिंग्स और घटना के समय मौजूद गवाहों के बयानों को संकलित करते हुए लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट के समक्ष औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इसके साथ ही, स्थानीय मिलीभगत को निष्प्रभावी करने के उद्देश्य से पूरे मामले की विस्तृत आख्या पंजाब नेशनल बैंक के नई दिल्ली स्थित प्रधान कार्यालय के मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO), केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS), वित्त मंत्रालय को भी प्रेषित की जा रही है, ताकि जोनल स्तर पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी उच्चस्तरीय जांच सुनिश्चित हो सके।
राजधानी के मीडिया जगत में आक्रोश: निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग तेज
राजभवन, मुख्यमंत्री कार्यालय और राज्य के शीर्ष प्रशासनिक तंत्र के केंद्र लखनऊ में एक सरकारी बैंक परिसर से पत्रकार को खुलेआम धमकाए जाने की खबर सामने आते ही स्थानीय पत्रकार संगठनों, नागरिक समाज और प्रेस क्लब से जुड़े प्रतिनिधियों में रोष व्याप्त हो गया है। विभिन्न मीडिया प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि एक राष्ट्रीयकृत बैंक का अधिकारी राजधानी के भीतर ही पत्रकारों के साथ ऐसा गैर-जिम्मेदाराना और हिंसक रुख अख्तियार कर सकता है, तो यह लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए अत्यंत खतरनाक संकेत है। मीडिया संगठनों ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन, पुलिस कमिश्नर लखनऊ और पंजाब नेशनल बैंक का केंद्रीय प्रबंधन इस प्रकरण में तुरंत स्वतः संज्ञान ले। निष्पक्ष जांच के लिए यह अनिवार्य माना जा रहा है कि जोनल ऑफिस में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को तत्काल प्रभाव से संरक्षित किया जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। इसके साथ ही पीड़ित पत्रकार और उसके परिजनों को तत्काल कानूनी सुरक्षा मुहैया कराई जाए और आरोपी अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाकर सार्वजनिक संस्थानों में कानून का राज स्थापित किया जाए।
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