
हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है। इस पूरे महीने में भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग जैसी विविध सामग्रियां अर्पित करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब महादेव ने संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए विष का पान किया था, तब उनके शरीर में उत्पन्न हुई तीव्र जलन को शांत करने के लिए देवों ने उन पर शीतल जल और दूध से अभिषेक किया था। तभी से शिवलिंग पर दूध और जल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। हालांकि, सनातन शास्त्र यह स्पष्ट निर्देश देते हैं कि ईश्वर की पूजा-अर्चना में उपयोग की जाने वाली प्रत्येक सामग्री का पूर्णतः शुद्ध, प्राकृतिक और सात्विक होना अनिवार्य है। यदि पूजा सामग्री में पवित्रता का अभाव होता है, तो पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता।
क्या शिवलिंग पर पैकेट वाला दूध चढ़ाना सही है? जानिए शास्त्रों का दृष्टिकोण
आज के आधुनिक दौर में शहरी क्षेत्रों में गाय का ताजा और कच्चा दूध आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता, जिसके कारण अधिकांश श्रद्धालु बाजार में मिलने वाले पैकेट वाले दूध का उपयोग शिव पूजा के लिए करने लगे हैं। परंतु, धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो पैकेट बंद दूध को शिवलिंग पर अर्पित करना पूरी तरह से सही नहीं माना गया है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि पैकेट में आने वाला दूध कई तरह की मशीनी प्रक्रियाओं, पाश्चुरीकरण (Pasteurization), केमिकल्स और प्रिजर्वेटिव्स से होकर गुजरता है। इस लंबी प्रक्रिया के कारण दूध के प्राकृतिक गुण और उसकी सात्विकता काफी हद तक समाप्त हो जाती है। शास्त्रों में ईश्वर को सदैव प्राकृतिक, ताजा और अछूता (जो बासी न हो) द्रव्य ही अर्पित करने का विधान है। इसलिए सावन हो या कोई अन्य अवसर, शिवलिंग पर देसी गाय का शुद्ध, ताजा और कच्चा दूध चढ़ाना ही सर्वश्रेष्ठ और अति उत्तम माना गया है।
यदि गाय का शुद्ध दूध उपलब्ध न हो तो क्या करें? अपनाएं यह आसान तरीका
यदि आप ऐसे स्थान पर रहते हैं जहां देसी गाय का ताजा कच्चा दूध मिलना पूरी तरह से असंभव है, तो ऐसी स्थिति में श्रद्धालुओं को निराश होने की आवश्यकता नहीं है। भगवान शिव अत्यंत दयालु और आशुतोष (शीघ्र प्रसन्न होने वाले) हैं, वे भक्त के भाव और नीयत को प्राथमिकता देते हैं। अगर आपको मजबूरी में पैकेट वाले दूध का इस्तेमाल करना ही पड़ रहा है, तो शास्त्रों के अनुसार कुछ विशेष सावधानियां बरतकर आप इस दूध का उपयोग कर सकते हैं। पैकेट वाले दूध को सीधे थैली से निकालकर शिवलिंग पर चढ़ाने की गलती कभी न करें। इसके स्थान पर सबसे पहले उस दूध को किसी स्वच्छ बर्तन में निकालकर अच्छी तरह उबाल लें। जब दूध पूरी तरह उबल जाए, तो उसे सामान्य तापमान पर ठंडा होने दें। दूध के पूरी तरह शीतल हो जाने के बाद ही उसे शिवलिंग पर अर्पित करें। याद रखें कि कभी भी गर्म दूध शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाता है। इसके अतिरिक्त, यह भी सुनिश्चित कर लें कि दूध बासी, खट्टा, फटा हुआ या मिलावटी न हो।
शिवलिंग पर दूध अर्पित करते समय न करें ये बड़ी गलतियां: जानें बर्तन और दिशा का नियम
शिवलिंग पर दूध या जल अर्पित करते समय केवल सामग्री की शुद्धता ही नहीं, बल्कि पूजा की विधि और दिशा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी होता है। अक्सर भक्त जाने-अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे पूजा का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता:
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तांबे के बर्तन का प्रयोग न करें: जब भी शिवलिंग पर दूध अर्पित करें, तो कभी भी तांबे (Copper) के लोटे या बर्तन का उपयोग न करें। तांबे के बर्तन में दूध डालने से वह रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण मदिरा के समान अशुद्ध माना जाता है। दूध चढ़ाने के लिए हमेशा पीतल, चांदी या कांस्य के बर्तन का ही उपयोग करना चाहिए। तांबे के पात्र का प्रयोग केवल जल चढ़ाने के लिए उत्तम होता है।
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बैठने और खड़े होने की दिशा: शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करते समय हमेशा उत्तर दिशा (North Direction) की ओर मुंह करके खड़े हों या बैठें। उत्तर दिशा को भगवान शिव और माता पार्वती का निवास स्थान माना जाता है। पूर्व दिशा की ओर मुंह करके जल चढ़ाने से बचा जाता है और दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके पूजा करना वर्जित माना गया है।
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धारा की गति: शिवलिंग पर दूध या जल चढ़ाते समय पात्र को बहुत ऊपर से न गिराएं और न ही बहुत तेजी से उंडेलें। दूध की एक पतली और धीमी धारा बनाकर ही अभिषेक करें।
बेलपत्र, धतूरा और जल अर्पित करने के जरूरी नियम
दूध के अलावा सावन के महीने में शिवलिंग पर अन्य सामग्रियां भी चढ़ाई जाती हैं। इन्हें अर्पित करते समय भी कुछ खास नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
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बेलपत्र चढ़ाने का सही तरीका: बेलपत्र हमेशा तीन पत्तियों वाला और बिना कटा-फटा होना चाहिए। बेलपत्र चढ़ाते समय उसका चिकना भाग शिवलिंग से स्पर्श करना चाहिए।
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अक्षत और धतूरा: पूजा में इस्तेमाल किए जाने वाले चावल (अक्षत) पूरी तरह से साबुत होने चाहिए, टूटे हुए चावल शिवलिंग पर नहीं चढ़ाए जाते। धतूरा और भांग को भी स्वच्छ जल से धोकर ही अर्पित करना चाहिए।
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एक लोटा जल का महत्व: यदि आपके पास दूध या अन्य कोई विशेष सामग्री उपलब्ध नहीं है, तो भी तनिक भी चिंता न करें। शास्त्रों में कहा गया है कि निष्कपट भाव और श्रद्धा से चढ़ाया गया केवल 'एक लोटा शुद्ध जल' भी महादेव को प्रसन्न करने के लिए पर्याप्त है।
भक्ति में भावना और सात्विकता ही है सर्वोपरि
भगवान शिव को भोलेनाथ इसीलिए कहा जाता है क्योंकि वे आडंबर और दिखावे से दूर सहज भक्ति से प्रसन्न होते हैं। शिवलिंग पर कोई भी सामग्री अर्पित करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपका मन शुद्ध हो और सामग्री सात्विक हो। थोड़े से नियमों और सावधानियों का पालन करके आप सावन के पवित्र महीने में महादेव की असीम कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन से सभी दुखों एवं कष्टों का निवारण कर सकते हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषी नियमों और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। किसी भी नियम या उपाय को अपनाने से पूर्व स्थानीय पंडित, ज्योतिषाचार्य या धर्मशास्त्र के जानकार से परामर्श अवश्य लें।
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