
News India Live, Digital Desk: वैश्विक सैन्य खर्च के मामले में भारत ने एक बार फिर दुनिया के दिग्गज देशों के बीच अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) द्वारा 27 अप्रैल 2026 को जारी ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बन गया है। साल 2025 में भारत का सैन्य खर्च 8.9 प्रतिशत बढ़कर 92.1 अरब डॉलर (लगभग ₹7.68 लाख करोड़) पर पहुंच गया है।वैश्विक सैन्य खर्च में रिकॉर्ड उछाल: $2.89 ट्रिलियन के पारSIPRI की रिपोर्ट बताती है कि 2025 में दुनिया भर का कुल सैन्य खर्च 2,887 अरब डॉलर (2.89 ट्रिलियन डॉलर) रहा, जो अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। यह लगातार 11वां साल है जब वैश्विक रक्षा बजट में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के कुल सैन्य खर्च का 58 प्रतिशत हिस्सा अकेले टॉप-5 देशों (USA, चीन, रूस, जर्मनी और भारत) का है।टॉप-5 सैन्य खर्च वाले देश (2025):रैंकदेशसैन्य खर्च (बिलियन डॉलर में)GDP का हिस्सा (%)1अमेरिका (USA)$954.03.1%2चीन (China)$336.01.7%3रूस (Russia)$190.07.5%4जर्मनी (Germany)$114.02.3%5भारत (India)$92.12.3%भारत की प्राथमिकता: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और आधुनिक हथियारभारत के रक्षा बजट में हुई इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण पड़ोसी देशों (चीन और पाकिस्तान) के साथ जारी तनाव और सैन्य आधुनिकीकरण है।ड्रोन और एयर डिफेंस: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और 2025 में हुए सुरक्षा घटनाक्रमों के बाद भारत ने ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और एडवांस एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म्स की खरीद पर जोर दिया है।बजट 2026-27: भारत सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए रक्षा बजट को बढ़ाकर ₹7.85 लाख करोड़ कर दिया है, जिसमें आधुनिक हथियारों की खरीद के लिए ₹2.19 लाख करोड़ का पूंजीगत परिव्यय शामिल है।पड़ोसी देशों का हाल: चीन और पाकिस्तान की बढ़ती महत्वाकांक्षाचीन: दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बना हुआ है। चीन ने अपना खर्च 7.4% बढ़ाकर 336 अरब डॉलर कर दिया है। यह चीन के सैन्य खर्च में लगातार 31वें साल हुई बढ़ोतरी है।पाकिस्तान: पाकिस्तान का सैन्य खर्च भी 11% बढ़कर 11.9 अरब डॉलर हो गया है, जिससे वह वैश्विक सूची में 31वें स्थान पर है। हालांकि, भारत का रक्षा बजट पाकिस्तान के मुकाबले 7 गुना से भी अधिक है।यूरोप और अमेरिका का बदलता समीकरणरिपोर्ट में एक चौंकाने वाला तथ्य यह है कि अमेरिका का सैन्य खर्च 2025 में 7.5% घटा है, क्योंकि इस दौरान यूक्रेन को दी जाने वाली नई सैन्य सहायता में कमी आई थी। हालांकि, 2026 में ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण इसमें फिर से बड़े उछाल की उम्मीद है। वहीं, रूस-यूक्रेन युद्ध और नाटो के विस्तार के कारण यूरोप में शीत युद्ध के बाद सबसे तेज़ सैन्य खर्च (14% वृद्धि) देखा गया है। जर्मनी पहली बार 2% GDP खर्च के लक्ष्य को पार कर चौथे स्थान पर पहुंच गया है।
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