
नई दिल्ली/लखनऊ। क्रिकेट जगत से एक बेहद दुखद और स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई है। खेल इतिहास के सबसे महान ऑलराउंडर और वेस्टइंडीज के पूर्व दिग्गज कप्तान सर गारफील्ड सोबर्स (Sir Garfield Sobers) का 89 वर्ष की आयु में बारबाडोस में उनके गृह आवास पर निधन हो गया है। सर गारफील्ड सोबर्स, जिन्हें उनके चाहने वाले प्यार से 'गैरी सोबर्स' भी कहते थे, क्रिकेट इतिहास की उन चुनिंदा हस्तियों में शामिल थे जिन्होंने इस खेल को एक नई परिभाषा दी। उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने की है, जिसके बाद से पूरी दुनिया के क्रिकेटर्स और खेल प्रेमी इस महान खिलाड़ी को श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
क्रिकेट के इतिहास में 'किंग क्रिकेट' का सफर
28 जुलाई 1936 को बारबाडोस में जन्मे सर गारफील्ड सोबर्स ने साल 1954 से 1974 के बीच दो दशकों तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर राज किया। उन्होंने वेस्टइंडीज के लिए 93 टेस्ट मैच खेले, जिसमें 57.78 की बेमिसाल औसत से 8,032 रन बनाए, जिसमें 26 शतक और 30 अर्धशतक शामिल थे। वह केवल एक महान बल्लेबाज नहीं थे, बल्कि अपनी जादुई बाएं हाथ की गेंदबाजी से उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 235 विकेट भी चटकाए। सोबर्स की खासियत यह थी कि वे तेज गति (Medium Fast) से लेकर ऑर्थोडॉक्स स्पिन और रिस्ट स्पिन तीनों तरह की गेंदबाजी करने में माहिर थे।
एक ओवर में 6 छक्के जड़ने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज
क्रिकेट की किताबों में सर गारफील्ड सोबर्स का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज है, क्योंकि वे प्रथम श्रेणी क्रिकेट (First-Class Cricket) में एक ओवर की सभी 6 गेंदों पर 6 छक्के लगाने वाले दुनिया के सबसे पहले बल्लेबाज बने थे। उन्होंने यह ऐतिहासिक कारनामा 31 अगस्त 1968 को नॉटिंघमशायर की तरफ से खेलते हुए ग्लैमॉर्गन के स्पिनर मैल्कम नैश के खिलाफ किया था। उनके इस रिकॉर्ड ने क्रिकेट की दुनिया में आक्रामक बल्लेबाजी के एक नए युग की शुरुआत की थी।
पाकिस्तान के खिलाफ बनाया था 365 रनों का रिकॉर्ड*
सर गैरी सोबर्स ने साल 1958 में पाकिस्तान के खिलाफ खेलते हुए नाबाद 365 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली थी। यह उस समय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का किसी भी बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर था। सोबर्स का यह जादुई रिकॉर्ड 36 सालों तक अटूट रहा, जिसे बाद में साल 1994 में उन्हीं के हमवतन और वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा (375 रन) ने तोड़ा था।
विजडन ने चुना था 'क्रिकेटर ऑफ द सेंचुरी', मिला था नाइटहुड
उनकी इसी महानता और खेल के प्रति अद्भुत योगदान को देखते हुए साल 1975 में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने उन्हें 'नाइटहुड' (सर की उपाधि) से सम्मानित किया था। इसके बाद साल 2000 में विजडन ने उन्हें 20वीं सदी के 5 सबसे महान क्रिकेटरों की सूची में शामिल किया था। आधुनिक युग में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) साल के सर्वश्रेष्ठ पुरुष क्रिकेटर को सम्मानित करने के लिए जो सबसे बड़ा पुरस्कार देती है, उसका नाम भी इन्हीं के सम्मान में 'सर गारफील्ड सोबर्स ट्रॉफी' रखा गया है। उनके निधन से क्रिकेट के एक गौरवशाली युग का अंत हो गया है, लेकिन उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।
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