
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा धांधली को लेकर छात्रों और युवाओं का प्रदर्शन अब बड़े राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है। कांग्रेस के मार्च के बाद, तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में खुलकर अपनी बात रखी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर साझा की गई एक विस्तृत पोस्ट में ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की मंशा और पुलिस कार्रवाई पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगाने वाले मामले में शिक्षा मंत्री का बचाव करने के लिए इतनी उतावली क्यों दिख रही है।
"छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस की कार्रवाई बर्बर"
ममता बनर्जी ने दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई की सख्त निंदा की। उन्होंने लिखा:
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अस्वीकार्य कार्रवाई: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस का बल प्रयोग, लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़ना और पैलेट गन का इस्तेमाल बेहद परेशान करने वाला और पूरी तरह से अमानवीय है।
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भविष्य की लड़ाई: यह लड़ाई केवल एक परीक्षा घोटाला (NEET Scam) में न्याय पाने की नहीं है, बल्कि देश के हर युवा के भविष्य को सुरक्षित करने का आंदोलन है।
"लोकतांत्रिक आंदोलन से क्यों डरी हुई है सरकार?"
केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित करना तथा प्रदर्शनकारी छात्रों पर कड़े कानून लगाना यह दर्शाता है कि सरकार इस लोकतांत्रिक आंदोलन से घबराई हुई है।
उन्होंने पूछा कि अगर लाखों अभ्यर्थियों का जीवन और करियर प्रभावित करने वाले आरोपी खुले घूम रहे हैं और जवाबदेही से बच रहे हैं, तो सरकार आखिर किस-किस को बचाने का प्रयास कर रही है।
"छात्रों के साथ खड़ा है पूरा विपक्ष"
पूर्व सीएम ने देश के युवाओं के जज्बे की सराहना करते हुए कहा कि पूरा विपक्ष इस कठिन परिस्थिति में छात्रों और अभ्यर्थियों के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने लाठियों, पुलिस कार्रवाई और सरकारी दबाव के आगे न झुकने के लिए युवाओं के अटूट साहस को सलाम किया।
आपको बता दें कि इससे पहले एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी छात्रों की मांगों के समर्थन में अनशन पर थे, जिन्होंने हाल ही में सरकार से मिले आश्वासन के बाद अपनी 26 दिन पुरानी भूख हड़ताल खत्म की है। हालांकि, जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और शिक्षा सुधारों को लेकर विभिन्न संगठनों का विरोध-प्रदर्शन लगातार जारी है।
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