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News India Live, Digital Desk: भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन अपने ‘यूट्यूब चैनल’ और हालिया इंटरव्यू में अक्सर कड़वे सच बोलने के लिए जाने जाते हैं। इस बार उन्होंने उस व्यवस्था पर चोट की है जो टीम वर्क के बजाय व्यक्तिगत प्रशंसा (Individual Worship) को बढ़ावा देती है। अश्विन का मानना है कि यह कल्चर भारतीय क्रिकेट की जड़ों को खोखला कर रहा है।1. सुपरस्टार कल्चर बनाम टीम गेमअश्विन ने कहा कि क्रिकेट एक टीम गेम है, लेकिन भारत में इसे ‘सुपरस्टार्स’ की लड़ाई बना दिया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि जब हम किसी एक या दो खिलाड़ियों को भगवान का दर्जा दे देते हैं, तो बाकी 9 खिलाड़ियों के योगदान को नजरअंदाज कर दिया जाता है। यह ‘हीरो वर्शिप’ ड्रेसिंग रूम के संतुलन को भी बिगाड़ती है।2. सोशल मीडिया और ‘पेड नैरेटिव’ का खेलअश्विन ने सीधा आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चीज सच नहीं होती। उन्होंने दावा किया:नैरेटिव बिल्डिंग: कुछ खिलाड़ियों की पीआर (PR) टीमें और क्रिकेट जगत के अंदरूनी लोग सोशल मीडिया पर एक खास नैरेटिव तैयार करते हैं।टार्गेटिंग: अगर कोई खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है लेकिन वह ‘सुपरस्टार’ नहीं है, तो उसे सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग के जरिए नीचे गिराने की कोशिश की जाती है।फैन वॉर्स: अश्विन के अनुसार, इन नैरेटिव्स के कारण ही फैंस के बीच आपसी दुश्मनी (Fan Wars) बढ़ती है, जो भारतीय क्रिकेट के लिए अच्छा नहीं है।3. चयन और पक्षपात पर उठाए सवालअश्विन ने इशारा किया कि सोशल मीडिया के दबाव के कारण कभी-कभी चयनकर्ता (Selectors) भी प्रभावित हो जाते हैं। जब किसी खिलाड़ी का ‘हाइप’ बहुत ज्यादा होता है, तो उसे खराब फॉर्म के बावजूद टीम में जगह मिलती रहती है, जबकि घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी अनदेखे रह जाते हैं।4. ‘बाकी देशों से लें सीख’अश्विन ने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां खिलाड़ी आते-जाते रहते हैं, लेकिन सिस्टम मजबूत रहता है। वहां कोई भी खिलाड़ी खेल से बड़ा नहीं माना जाता। भारत में जब तक हम ‘नाम’ के बजाय ‘काम’ को प्राथमिकता नहीं देंगे, तब तक बड़े टूर्नामेंट्स के नॉकआउट मैचों में दबाव झेलना मुश्किल होगा।अश्विन के बयान के मुख्य बिंदु (Key Highlights)पीआर मशीनरी: खिलाड़ियों की ब्रांडिंग के लिए चलने वाली पीआर एजेंसियां खेल की गरिमा को नुकसान पहुंचा रही हैं।अंधभक्ति: फैंस को खिलाड़ियों के बजाय ‘भारतीय टीम’ का समर्थन करना चाहिए।सोशल मीडिया का सच: ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम पर बनने वाले माहौल से टीम का चयन प्रभावित नहीं होना चाहिए।
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