
News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया के अशांत आसमान से अब धीरे-धीरे संकट के बादल छंटने लगे हैं। ईरान द्वारा सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को व्यापारिक जहाजों के लिए खोलने के ऐलान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान एक ऐतिहासिक शांति समझौते के ‘बेहद करीब’ पहुँच चुके हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के इस सकारात्मक रुख ने दुनिया भर के बाजारों और कूटनीतिक हलकों में शांति की नई उम्मीद जगा दी है।’ईरान एक स्मार्ट देश, अब अड़चनें खत्म’ – ट्रंपशुक्रवार देर शाम मीडिया से फोन पर बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को एक ‘स्मार्ट देश’ बताया। ट्रंप ने कहा, “हम एक समझौते के बहुत करीब हैं और मुझे लगता है कि यह हर किसी के लिए बहुत अच्छा होने वाला है। अब हमारे बीच कोई बड़ी अड़चन नहीं बची है।” ट्रंप का यह बयान लेबनान में सीजफायर के ऐलान और तेहरान द्वारा होर्मुज को फिर से खोलने के ठीक बाद आया है। राष्ट्रपति ने संकेत दिए हैं कि वे इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए खुद पाकिस्तान (इस्लामाबाद) की यात्रा भी कर सकते हैं।क्या ईरान ने मान ली हैं सारी शर्तें?ट्रंप ने सोशल मीडिया पर किए अपने दावों में कहा है कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडार को अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार हो गया है। ट्रंप ने इसे ‘परमाणु धूल’ (Nuclear Dust) करार देते हुए कहा कि अमेरिका इसे वापस लेकर रहेगा। हालांकि, तेहरान ने आधिकारिक तौर पर यूरेनियम सौंपने की बात से इनकार किया है, लेकिन वे शांति समझौते के लिए मेज पर आने को तैयार दिख रहे हैं। ट्रंप का दावा है कि ईरान ने लगभग सभी मुख्य बिंदुओं पर अपनी सहमति दे दी है।होर्मुज तो खुला, लेकिन ‘नाकेबंदी’ अभी भी जारीहोर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने का वैश्विक क्रूड ऑयल बाजार ने जोरदार स्वागत किया है, लेकिन ट्रंप ने एक सख्त चेतावनी भी जारी की है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि जब तक शांति समझौते पर 100% मुहर नहीं लग जाती, तब तक ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी (Blockade) जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि होर्मुज पूरी दुनिया के लिए खुला है, लेकिन ईरान के लिए नियम तब तक सख्त रहेंगे जब तक ‘लेन-देन’ पूरा नहीं हो जाता।पाकिस्तान बना ‘शांति दूत’, दुनिया की नजरें टिकींइस पूरे विवाद को सुलझाने में पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। ट्रंप ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि मध्यस्थता के प्रयास सही दिशा में जा रहे हैं। यदि आने वाले 48 घंटों में दोनों देश किसी ठोस नतीजे पर पहुँचते हैं, तो यह डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जाएगी। फिलहाल, पूरी दुनिया इस बात का इंतजार कर रही है कि क्या ‘शांति का यह युद्धविराम’ एक स्थायी समझौते में बदल पाएगा।
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