
उत्तर प्रदेश में सिर्फ रफ्तार भरी सड़कें ही नहीं बन रहीं,बल्कि इन सड़कों के किनारे तरक्की और रोजगार की एक नई दुनिया भी बसाई जा रही है। प्रदेश के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्टगंगा एक्सप्रेसवेके किनारे अब एक नयाऔद्योगिक गलियारा (Industrial Corridor)बसाने का काम तेज हो गया है।इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन खरीदने का काम अपने आखिरी चरण में है,और जल्द ही यहां फैक्ट्रियों और कंपनियों के आने का रास्ता साफ हो जाएगा।कहां बन रहा है यह इंडस्ट्रियल कॉरिडोर?यह नया औद्योगिक शहरगंगा एक्सप्रेसवेके किनारे संभल जिले की तहसील में बसाया जा रहा है। इसके लिएयूपीडा (UPEIDA)ने चार गांवों में लगभग240हेक्टेयर जमीनचिह्नित की है।खुशी की बात यह है कि जमीन खरीदने का95%काम पूरा हो चुका हैऔर ज़्यादातर किसानों ने विकास के इस काम के लिए खुशी-खुशी अपनी जमीन दी है।किसानों को मिला सही दामकिसानों के साथ समझौते के बाद अब तक95%जमीन खरीदी जा चुकी है।सरकार ने1000से ज़्यादा किसानों को उनकी जमीन के बदलेलगभग340करोड़ रुपयेका भुगतान भी कर दिया है।जो5%जमीन बची है,उसे भी अब अधिग्रहण की सरकारी प्रक्रिया के जरिए जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।सिर्फ जमीननहीं,यह है तरक्की का नक्शायह सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा नहीं है,बल्कि यह पूर्वांचल की तरक्की का नया नक्शा है। इस गलियारे के बनने का सीधा मतलब है कि:यहां बड़ी-बड़ी कंपनियां आएंगी और अपनी यूनिट्स लगाएंगी।नई-नई फैक्ट्रियां लगेंगी।सबसे बड़ी बात,स्थानीय युवाओं के लिएहजारों की संख्या में रोजगारके नए मौके पैदा होंगे।इलाके का पूरा सामाजिक और आर्थिक ढांचा बदल जाएगा।एक्सप्रेसवे से मिलेगी उद्योगों को रफ्तारगंगा एक्सप्रेसवे के किनारे होने की वजह से यहां बनने वाली फैक्ट्रियों को अपने माल को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने में बहुत आसानी होगी। इससे लॉजिस्टिक्स काখরচ কম হবে এবং ব্যবসা দ্রুত বাড়বে।यह प्रोजेक्ट सिर्फ संभल या आसपास के जिलों के लिए नहीं,बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश की औद्योगिक तरक्की में एक नया मील का पत्थर साबित होगा,जो लाखों लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाएगा।
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