
News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) के एक छात्र ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो सिस्टम की बड़ी से बड़ी दीवार को भी झुकाया जा सकता है। अपनी 10वीं की परीक्षा की उत्तर पुस्तिका (Answer Sheet) हासिल करने के लिए एक छात्र को 9 महीने तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी, जिसके बाद अब उसकी मेहनत रंग लाई है।क्या था पूरा विवाद?यह मामला यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा से जुड़ा है। छात्र को परीक्षा के बाद उम्मीद से बेहद कम अंक मिले थे। जब छात्र ने अपनी कॉपियों की पुनर्मूल्यांकन (Scrutiny) और छायाप्रति (Photocopy) के लिए बोर्ड से संपर्क किया, तो बोर्ड ने तकनीकी और नियमों का हवाला देकर उसकी मांग को खारिज कर दिया।हाईकोर्ट का दखल और छात्र का संघर्षनिराश होने के बजाय छात्र ने कानूनी रास्ता अपनाया और मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुँचा। छात्र के संघर्ष के मुख्य पड़ाव:9 महीने का इंतजार: छात्र ने हार नहीं मानी और हर तारीख पर अपनी दलील पेश की।आरटीआई और कानूनी अधिकार: छात्र ने सूचना के अधिकार (RTI) और छात्र के मौलिक अधिकारों के तहत अपनी कॉपी देखने की मांग की थी।बोर्ड की खिंचाई: कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बोर्ड की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की और छात्र को उसकी उत्तर पुस्तिका दिखाने का आदेश जारी किया।छात्रों के लिए क्यों जरूरी है यह फैसला?अक्सर छात्र रिजल्ट में गड़बड़ी होने पर चुप बैठ जाते हैं, लेकिन यह फैसला एक ‘नजीर’ (Precedent) बनेगा:पारदर्शिता की जीत: अब बोर्ड अपनी गलतियों को छिपाने के लिए कॉपियों को दबा नहीं पाएगा।आत्मविश्वास: यह मामला सिखाता है कि छात्रों को अपने अंकों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।सिस्टम में सुधार: कोर्ट के सख्त रुख के बाद उम्मीद है कि यूपी बोर्ड अपनी स्क्रूटनी प्रक्रिया को अधिक सुलभ और छात्र-हितैषी बनाएगा।
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