News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों के हित में एक बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए अनिवार्य की गई ‘फार्मर रजिस्ट्री’ (Farmer Registry) की शर्त को फिलहाल खत्म करने के निर्देश दिए हैं। अब किसान पुरानी और सरल व्यवस्था के अनुसार ही अपनी फसल सरकारी केंद्रों पर बेच सकेंगे।क्यों लिया गया यह फैसला?गेहूं खरीद के इस सीजन में सरकार ने पारदर्शिता लाने के लिए ‘फार्मर रजिस्ट्री’ अनिवार्य की थी। हालांकि, जमीनी स्तर पर इसकी प्रक्रिया काफी जटिल साबित हो रही थी:तकनीकी दिक्कतें: कई किसानों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और डेटा मिलान में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।केंद्रों पर कतारें: रजिस्ट्री न होने के कारण कई किसानों को क्रय केंद्रों से बैरंग लौटना पड़ रहा था या घंटों इंतजार करना पड़ रहा था।भीषण गर्मी: प्रदेश में बढ़ते तापमान और लू (Heatwave) को देखते हुए मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि किसान को अपनी फसल बेचने के लिए अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े।क्या होगी अब नई व्यवस्था?ताजा निर्देशों (20 अप्रैल 2026) के बाद अब गेहूं खरीद की प्रक्रिया को आसान बना दिया गया है:पुरानी व्यवस्था बहाल: अब किसान पिछले वर्षों की तरह ही बिना किसी नई आईडी के सीधे क्रय केंद्रों पर पहुँचकर अपना गेहूं बेच सकेंगे।डीएम को निर्देश: मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (DMs) को सख्त निर्देश दिए हैं कि क्रय केंद्रों पर किसानों के लिए पीने के पानी, बैठने के लिए छाया और अन्य मूलभूत सुविधाओं का पुख्ता इंतजाम रहे।48 घंटे में भुगतान: फसल खरीद के 48 घंटों के भीतर भुगतान की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में (DBT के जरिए) भेजने की व्यवस्था को और सख्त किया गया है।किसान संगठनों ने जताया आभारसरकार के इस फैसले का किसान संगठनों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि कटाई और मड़ाई के व्यस्त सीजन में इस फैसले से छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जो तकनीक के अभाव में रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे थे।इस सीजन के मुख्य आंकड़ेलक्ष्य: इस साल सरकार ने 50 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है।क्रय केंद्र: पूरे प्रदेश में लगभग 6,500 सरकारी क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं।समय: ये केंद्र सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक कार्यरत हैं।
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