
नई दिल्ली: कैश का जमाना अब लगभग खत्म होने की कगार पर है। भारत में पैसे के लेन-देन का तरीका इतनी तेजी से बदला है कि यकीन करना मुश्किल है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)के ताजा आंकड़ों ने इस पर मुहर लगा दी है।2025के पहले छह महीनों के आंकड़ों के मुताबिक,देश में हुए कुल पेमेंट में से99.8%डिजिटल तरीकों से हुए हैं!इसका मतलब है कि अब100में से लगभग100लोग कैश की जगह फोन या कार्ड से पेमेंट कर रहे हैं। अगर कुल रकम की बात करें,तो इस दौरान देश में1572लाख करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ,जिसमें से1536लाख करोड़ रुपये डिजिटल तरीकों से चुकाए गए। ये आंकड़े चीख-चीख कर कह रहे हैं कि डिजिटल पेमेंट अब कोई विकल्प नहीं,बल्कि हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है।UPIऔरRTGSकी जंग: संख्या में कौन,कीमत में कौन आगे?जब हम डिजिटल पेमेंट की बात करते हैं,तो दो नाम सबसे पहले आते हैं -UPIऔरRTGS। एक तरफUPIहै,जिससे हम चाय-सब्जी वाले को भी आसानी से पेमेंट कर देते हैं। दूसरी तरफRTGSहै,जिससे बड़े-बड़े बिजनेस ट्रांजैक्शन होते हैं। आंकड़ों की यह जंग बेहद दिलचस्प है।UPI:गिनती का बादशाह,कीमत में फिसड्डीजितने भी डिजिटल पेमेंट हुए,उनमें से85%अकेलेUPIसे हुए। यानी हर 100डिजिटल पेमेंट में से85 UPIवाले थे।लेकिन जब कुल रकम की बात आई,तोUPIकी हिस्सेदारी सिर्फ9%रही।RTGS:गिनती में कम,कीमत में है दमकुल डिजिटल पेमेंट की संख्या मेंRTGSकी हिस्सेदारी सिर्फ0.1%थी।लेकिन इसने कुल रकम के मामले में बाजी मार ली और69%हिस्से पर कब्जा किया।ऐसा क्यों है?कहानी बहुत सिंपल हैयह अंतर समझना बहुत आसान है।UPIको हम और आप जैसे आम लोग रोजमर्रा के छोटे-छोटे खर्चों के लिए इस्तेमाल करते हैं -10रुपये की चाय से लेकर500रुपये की सब्जी तक। इसीलिएUPIसे होने वाले पेमेंट की संख्या (Volume)तो बहुत ज्यादा होती है,लेकिन उनकी कुल कीमत (Value)कम होती है।वहीं, RTGSको बड़े बिजनेस और कंपनियां इस्तेमाल करती हैं। इसमें कम से कम2लाख रुपये भेजने की सीमा है। इसलिए,यहां एक-एक ट्रांजैक्शन लाखों-करोड़ों का होता है,जिससे कम संख्या में भी कुल कीमत आसमान छू जाती है।इस डिजिटल क्रांति ने न सिर्फ हमारी जिंदगी को आसान बनाया है,बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी पारदर्शिता लाई है। यह दिखाता है कि भारत अब वाकई एक डिजिटल इकोनॉमी बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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