News India Live, Digital Desk: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों उम्मीदवारों के लिए संसद से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक सांसद, जो खुद पूर्व IPS अधिकारी और उत्तर प्रदेश के DGP रह चुके हैं, ने संसद में UPSC की प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) के मौजूदा स्वरूप को बदलने की जोरदार मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से ‘CSAT’ (Civil Services Aptitude Test) को पूरी तरह समाप्त करने की वकालत की है, जिसे लेकर लंबे समय से छात्र सड़कों पर प्रदर्शन करते रहे हैं।”CSAT ने ग्रामीण और हिंदी माध्यम के छात्रों का छीना हक”संसद में अपनी बात रखते हुए पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा कि CSAT का वर्तमान पैटर्न गणित और अंग्रेजी की पृष्ठभूमि वाले छात्रों, विशेषकर इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को अनुचित लाभ पहुंचा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि ग्रामीण परिवेश और हिंदी या अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र केवल इस एक पेपर की वजह से मुख्य परीक्षा की दौड़ से बाहर हो जाते हैं। सांसद के अनुसार, सिविल सेवा परीक्षा का ढांचा ऐसा होना चाहिए जो भाषाई और क्षेत्रीय भेदभाव से परे हो और सभी को समान अवसर प्रदान करे।प्रीलिम्स पैटर्न में बड़े बदलाव का खाकापूर्व DGP ने न केवल आलोचना की, बल्कि सुधार के लिए सुझाव भी पेश किए। उन्होंने मांग की कि प्रीलिम्स परीक्षा के पैटर्न को ‘रिवैम्प’ (पुनर्गठित) किया जाना चाहिए ताकि इसमें प्रशासनिक अभिरुचि, नैतिकता और सामान्य ज्ञान पर अधिक जोर दिया जा सके, न कि केवल गणितीय गणनाओं पर। उनकी मांग है कि CSAT को हटाकर कोई ऐसा वैकल्पिक तरीका अपनाया जाए जिससे वास्तविक योग्यता का आकलन हो सके। इस मांग को सदन में मौजूद कई अन्य सदस्यों का भी समर्थन मिलता दिखा, जिससे सरकार पर परीक्षा सुधारों को लेकर दबाव बढ़ सकता है।क्या अब बदलेगा UPSC का सिलेबस?यह पहली बार नहीं है जब CSAT विवादों के घेरे में आया है। 2011 में लागू होने के बाद से ही इसे लेकर विरोध होता रहा है, जिसके बाद इसे केवल क्वालिफाइंग (33% अंक अनिवार्य) कर दिया गया था। हालांकि, अभ्यर्थियों का तर्क है कि हाल के वर्षों में CSAT का स्तर IIT-JEE जैसा हो गया है, जिससे मानविकी (Humanities) के छात्रों के लिए इसे पास करना भी मुश्किल हो गया है। अब जब सत्ता पक्ष के ही एक वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी ने यह मुद्दा उठाया है, तो कयास लगाए जा रहे हैं कि केंद्र सरकार और UPSC इस पर जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।
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