Monday , September 28 2026

UPSC प्रीलिम्स में 27 सवालों पर बढ़ा विवाद, CAT ने मांगा जवाब

देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा (UPSC Civil Services Examination) एक बार फिर बड़े कानूनी विवादों के घेरे में आ गई है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की इस साल की प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में पूछे गए सवालों की शुद्धता को लेकर मामला सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल यानी कैट (CAT) तक पहुंच गया है। शुरुआती दौर में जहां कुछेक सवालों पर आपत्ति जताई गई थी, वहीं अब यह दायरा बढ़कर सीधे तौर पर 27 सवालों तक पहुंच चुका है। उम्मीदवारों का आरोप है कि आयोग की प्रोविजनल आंसर-की (Answer Key) में कई उत्तर या तो तथ्यात्मक रूप से गलत हैं या उनमें भारी अस्पष्टता है। इस कानूनी खींचतान और ट्रिब्यूनल द्वारा जवाब तलब किए जाने के बाद से देश भर के उन सैकड़ों युवाओं में एक नई उम्मीद जाग गई है जो बेहद कम अंकों के अंतर से मुख्य परीक्षा (Mains) की रेस से बाहर हो गए थे।

क्या है पूरा मामला और क्यों गरमाया है यूपीएससी प्रीलिम्स का विवाद

संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के सामान्य अध्ययन (GS Paper-1) और सीसैट के पेपर संपन्न होने के बाद जब आयोग ने अपनी आधिकारिक प्रोविजनल आंसर-की जारी की, तभी से विवादों की शुरुआत हो गई थी। परीक्षा में शामिल होने वाले मेधावी छात्रों और विभिन्न उम्मीदवारों के समूहों ने जब आधिकारिक उत्तर कुंजी का मिलान मानक सरकारी पुस्तकों, प्राथमिक स्रोतों और सांविधिक प्रावधानों से किया, तो उन्हें कई बड़े अंतर नजर आए। छात्रों का आरोप है कि आयोग द्वारा तय किए गए कई उत्तर या तो प्रचलित और प्रामाणिक पाठ्यपुस्तकों के विपरीत हैं या फिर कुछ प्रश्नों के विकल्पों में कोई भी सही उत्तर मौजूद ही नहीं है। इसी को लेकर अभ्यर्थियों ने पहले आयोग के पोर्टल पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन जब वहां से संतोषजनक परिणाम नहीं मिला और परीक्षा परिणाम घोषित हो गया, तो मामला न्याय के लिए कैट (CAT) की शरण में चला गया।

27 सवालों की लंबी फेहरिस्त: ग्रैंड स्लैम से लेकर ऋग्वैदिक काल तक के प्रश्न कटघरे में

इस कानूनी याचिका के तहत जिन 27 सवालों पर मुख्य रूप से सवाल उठाए गए हैं, उनमें इतिहास, राजव्यवस्था, खेल और करेंट अफेयर्स से जुड़े बेहद पेचीदा विषय शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर, टेनिस के ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट्स के नियमों से जुड़ा एक प्रश्न, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत 'जीरो एफआईआर' (Zero FIR) की प्रक्रिया से जुड़ा सवाल, और प्राचीन इतिहास यानी ऋग्वैदिक काल के दौरान कृषि एवं सिंचाई के साधनों (जैसे 'अश्म चक्र' और 'आहव') से संबंधित प्रश्नों पर भारी तकनीकी और भाषाई अस्पष्टता का दावा किया गया है। उम्मीदवारों का यह भी कहना है कि अंग्रेजी और हिंदी माध्यम के प्रश्न पत्रों में शब्दों के चयन में अंतर होने के कारण भी सही उत्तर चुनने में भ्रम की स्थिति पैदा हुई, जिससे उनके बहुमूल्य अंक कट गए।

सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) का दखल और यूपीएससी को नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल की प्रिंसिपल बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को आधिकारिक रूप से नोटिस जारी कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उम्मीदवारों द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर आयोग की विशेषज्ञ समितियों ने क्या विचार किया और यदि आपत्तियों को खारिज किया गया, तो उसके पीछे के क्या ठोस आधार थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों का तर्क है कि देश की सबसे बड़ी परीक्षा में इस तरह की बार-बार सामने आने वाली तथ्यात्मक त्रुटियां और अस्पष्टताएं सीधे तौर पर उम्मीदवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। कैट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख तय करते हुए आयोग से विस्तृत जवाब मांगा है, जिस पर पूरे देश के प्रशासनिक सेवा के उम्मीदवारों की निगाहें टिकी हुई हैं।

सैकड़ों युवाओं के करियर और कटऑफ पर क्या पड़ेगा इसका असर

सिविल सेवा परीक्षा के पैटर्न को समझने वाले अच्छी तरह जानते हैं कि प्रीलिम्स चरण में महज एक या दो नंबर का अंतर भी चयन और छंटनी के बीच की दीवार बन जाता है। याचिकाकर्ताओं का अनुमान है कि इन 27 विवादित प्रश्नों और उनके साथ जुड़ी नेगेटिव मार्किंग के प्रभाव के कारण कुल अंकों में 16 से ज्यादा नंबरों का फेरबदल हो सकता है। कई होनहार छात्र जो कटऑफ से केवल कुछ ही दशमलव या अंकों से चूके हैं, वे इस कानूनी लड़ाई के जरिए न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। यदि ट्रिब्यूनल के निर्देश पर आयोग इन विवादित प्रश्नों की दोबारा समीक्षा करता है, या तो इन्हें मूल्यांकन से बाहर करता है (डिलिट करता है) अथवा सही उत्तरों के आधार पर संशोधित परिणाम जारी करता है, तो इससे परीक्षा के फाइनल स्कोरकार्ड और क्वालिफाइड उम्मीदवारों की सूची में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।