
वैश्विक कूटनीति और मिडिल ईस्ट (Middle East) के सबसे बड़े राजनीतिक मंच पर इस समय एक अजीबोगरीब ड्रामा देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति ओवल ऑफिस में बैठकर यह एलान कर रहे हैं कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध खत्म हो चुका है, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने उनके इस दावे को महज एक 'अटकल' और 'अफवाह' बताकर खारिज कर दिया है।
ईरान का साफ कहना है कि अमेरिका के साथ किसी भी समझौते को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ईरान के इस कड़े रुख के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार और वैश्विक सुरक्षा एजेंसियां एक बार फिर असमंजस की स्थिति में आ गई हैं।
ओवल ऑफिस से डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा एलान
इस पूरे विवाद की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान से हुई जो उन्होंने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस से जारी किया था। ट्रंप ने बेहद आत्मविश्वास के साथ दावा किया था कि दोनों देशों के बीच एक 'शानदार समझौता' (Wonderful Deal) हो चुका है और अब केवल कागजी कार्रवाई को अंतिम रूप देना बाकी है।
ट्रंप की ओर से कही गई मुख्य बातें निम्नलिखित थीं:
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वीकेंड पर हस्ताक्षर: ट्रंप के मुताबिक यह ऐतिहासिक समझौता इसी वीकेंड यूरोप में साइन होने जा रहा है, जिसमें उनकी तरफ से अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) शामिल होंगे।
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परमाणु हथियार पर पूर्ण पाबंदी: ट्रंप ने दावा किया कि इस समझौते के तहत ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं खरीदेगा और न ही उनका निर्माण करेगा।
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होर्मुज स्ट्रेट का खुलना: डील साइन होते ही दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को आधिकारिक रूप से पूरी तरह खोल दिया जाएगा।
जब ट्रंप से पूछा गया कि उन्हें इस डील के होने का इतना भरोसा क्यों है, तो उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि ईरान को हाल ही में ऐसी मार (जोरदार झटका) पड़ी है जो बहुत कम लोग झेल पाते हैं। वे खुद इस समय अमेरिका से ज्यादा इस समझौते को पूरा करना चाहते हैं।
ईरान का पलटवार: 'अपनी रेड लाइन्स पर समझौता नहीं करेंगे'
ट्रंप के इस बयान के चंद घंटों के भीतर ही ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई (Esmaeil Baghaei) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अमेरिका के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। बघाई ने स्पष्ट किया कि तेहरान अभी किसी भी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंचा है।
ईरान ने कूटनीतिक बातचीत की जमीनी हकीकत को इस तरह सामने रखा है:
ईरानी प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि अतीत गवाह है कि ईरान अपनी 'रेड लाइन्स' (अहम शर्तों) पर कभी कोई समझौता नहीं करता है। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि कतर और पाकिस्तान इस बातचीत में मध्यस्थ (Mediators) के तौर पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
3 भारतीय नाविकों की मौत पर ईरान ने भारत के प्रति जताई संवेदना
ईरान के विदेश मंत्रालय ने बातचीत के बीच अमेरिकी नौसेना की हरकतों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अमेरिकी नौसैनिक हमलों की कड़ी निंदा की।
अमेरिकी हमले में भारतीय नागरिकों की मौत: सरकारी समुद्री डकैती
"भारतीय कमर्शियल जहाजों पर अमेरिका के क्रूर और अवैध हमलों में कम से कम तीन भारतीय नागरिकों (नाविकों) की मौत हुई है। ये हमले अमेरिका की हथियारबंद लूट और सरकारी समुद्री डकैती (State Piracy) की जारी नीति का जीता-जागता सबूत हैं। हम मारे गए बेकसूर भारतीय नाविकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और भारत सरकार व वहां के लोगों के साथ खड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस गैर-कानूनी व्यवहार के लिए अमेरिका को जवाबदेह ठहराना होगा।"
क्या है ट्रंप की 'न्यू लीडरशिप' थ्योरी?
ईरान के भीतर हाल ही में हुए सत्ता और सैन्य नेतृत्व के बदलावों पर भी ट्रंप ने अपनी राय रखी। ट्रंप का मानना है कि ईरान का जो नया ग्रुप या लीडरशिप टीम सामने आई है, वह पुरानी टीम की तुलना में कहीं ज्यादा समझदार और तर्क के आधार पर काम करने वाली है। ट्रंप ने कहा, "हमने ईरान की पहली और दूसरी टीम को हटा दिया है। यह एक अलग स्तर का ग्रुप है, जो ज्यादा समझदारी दिखाता है।"
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