
News India Live, Digital Desk : हम सभी अपने घर के मंदिर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए देवी-देवताओं की मूर्तियाँ रखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के अनुसार, हर मूर्ति का घर में होना शुभ नहीं होता? गलत तरीके से रखी गई या गलत मुद्रा वाली मूर्तियाँ घर की शांति भंग कर सकती हैं और आर्थिक तंगी का कारण बन सकती हैं।अगर आप नया घर बना रहे हैं या मंदिर का नवीनीकरण कर रहे हैं, तो मूर्तियों के चयन से जुड़ी ये बातें आपके बहुत काम आएंगी।1. कौन सी मूर्तियाँ घर में रखना है बेहद शुभ?गणेश जी की बैठी हुई प्रतिमा: घर के लिए हमेशा भगवान गणेश की बैठी हुई मुद्रा वाली मूर्ति चुनें, जिसकी सूंड बाईं ओर मुड़ी हो। इसे ‘वाममुखी’ गणेश कहते हैं, जो गृहस्थ जीवन के लिए मंगलकारी होते हैं।लक्ष्मी जी के साथ नारायण: घर में देवी लक्ष्मी की अकेली मूर्ति रखने के बजाय भगवान विष्णु के साथ (लक्ष्मी-नारायण) की तस्वीर या मूर्ति रखना अधिक फलदायी होता है।हंसते हुए हनुमान जी: हनुमान जी की रौद्र रूप वाली तस्वीर के बजाय आशीर्वाद देते हुए या राम भक्ति में लीन मुस्कुराती हुई तस्वीर लगाएं।2. भूलकर भी न रखें ऐसी मूर्तियाँ (Vastu Don’ts)वास्तु के नियमों के अनुसार, कुछ विशेष प्रकार की मूर्तियों को घर में रखने की मनाही है:खड़ी मुद्रा में लक्ष्मी जी: माना जाता है कि खड़ी लक्ष्मी चंचल होती हैं और घर में धन संचय नहीं होने देतीं।युद्ध या विनाशकारी मुद्रा: भगवान शिव के तांडव की तस्वीर, कालिया दमन करते कृष्ण या देवी काली का रौद्र रूप घर में नहीं रखना चाहिए। इससे घर के सदस्यों में क्रोध और विवाद बढ़ता है।खंडित मूर्तियाँ: किसी भी देवता की मूर्ति अगर जरा सी भी टूट जाए (खंडित हो जाए), तो उसे तुरंत हटा देना चाहिए। खंडित मूर्ति नकारात्मक ऊर्जा का स्रोत बनती है।3. मंदिर की सही दिशा और ऊंचाईवास्तु के अनुसार, घर का मंदिर हमेशा ईशान कोण (North-East) में होना चाहिए। मूर्तियाँ कभी भी सीधे जमीन पर न रखें, उन्हें हमेशा एक चौकी या ऊंचे स्थान पर रखें ताकि पूजा करते समय भगवान के चरण आपके हृदय के स्तर पर हों।4. पीठ की ओर न रखें चेहराएक ही दीवार पर दो देवताओं की मूर्तियाँ इस तरह न रखें कि उनका चेहरा एक-दूसरे की ओर हो। साथ ही, कभी भी एक देवता की दो से ज्यादा मूर्तियाँ एक ही मंदिर में नहीं रखनी चाहिए।5. पूर्वजों की तस्वीर और मंदिरअक्सर लोग मंदिर में ही अपने दिवंगत पूर्वजों की तस्वीरें रख देते हैं, जो वास्तु के अनुसार गलत है। पूर्वजों की तस्वीरें दक्षिण दिशा की दीवार पर लगानी चाहिए, मंदिर के अंदर नहीं।
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