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Vat Savitri Vrat 2026 : वट सावित्री व्रत में क्यों की जाती है बरगद के पेड़ की पूजा? जानें धार्मिक महत्व और पीछे की पौराणिक कथा

News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है, जिसे सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखती हैं। साल 2026 में यह व्रत 15 मई (शुक्रवार) को मनाया जाएगा। इस दिन बरगद के पेड़ (वट वृक्ष) की पूजा का विधान है। शास्त्रों में वट वृक्ष को केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि देवताओं का साक्षात् निवास स्थान माना गया है। आइए जानते हैं कि आखिर इस व्रत में बरगद के पेड़ की ही पूजा क्यों की जाती है।वट वृक्ष की पूजा के पीछे के 3 मुख्य कारण1. त्रिदेवों का वास (The Abode of Trinity): पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वट वृक्ष की जड़ में भगवान ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास होता है। इसलिए इस पेड़ की पूजा करने से एक साथ तीनों देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जब सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लेने के लिए यमराज के पीछे गई थीं, तब इसी वृक्ष के नीचे उन्होंने तपस्या और विश्राम किया था।2. अक्षय अमरत्व का प्रतीक (Symbol of Immortality): बरगद के पेड़ को ‘अक्षय’ माना जाता है क्योंकि यह सदियों तक जीवित रहता है और कभी पूरी तरह नष्ट नहीं होता। जिस तरह वट वृक्ष अपनी शाखाओं और लताओं से खुद का विस्तार करता रहता है, उसी तरह सुहागिन महिलाएं कामना करती हैं कि उनका सौभाग्य और वंश भी हमेशा बना रहे। इसीलिए इसे ‘अक्षय वट’ भी कहा जाता है।3. सावित्री और सत्यवान की कथा: पौराणिक कथा के अनुसार, जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे, तब सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही अपने पति के मृत शरीर को रखा था। अपनी बुद्धिमत्ता और पतिव्रता धर्म के बल पर सावित्री ने यमराज से सत्यवान के प्राण वापस मांग लिए थे। तब से ही वट वृक्ष को साक्षी मानकर यह व्रत रखने की परंपरा शुरू हुई।कैसे करें वट वृक्ष की पूजा? (Rituals and Traditions)कच्चा सूत लपेटना: पूजा के दौरान महिलाएं बरगद के पेड़ की परिक्रमा करते हुए उसके तने पर कच्चा सूत या कलावा लपेटती हैं। यह धागा पति-पत्नी के अटूट बंधन का प्रतीक माना जाता है।अर्घ्य और भोग: पेड़ की जड़ में जल अर्पित किया जाता है और भीगे हुए चने, फल व मिठाई का भोग लगाया जाता है।श्रृंगार का महत्व: सुहागिन महिलाएं इस दिन सोलह श्रृंगार करती हैं और बरगद की एक कोपल (नया पत्ता) को अपने बालों में लगाती हैं, जो सौभाग्य का प्रतीक है।वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Perspective)धार्मिक महत्व के साथ-साथ वट वृक्ष का वैज्ञानिक महत्व भी है। यह पेड़ सबसे अधिक ऑक्सीजन छोड़ता है और इसकी छाया काफी ठंडी होती है। ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में इस पेड़ के नीचे बैठकर पूजा करने से मानसिक शांति और शुद्ध वायु प्राप्त होती है, जो स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।