
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और विंध्य क्षेत्र के विकास को नई रफ्तार देने के लिए योगी सरकार की एक और महत्वाकांक्षी योजना विंध्य एक्सप्रेसवे (Vindhya Expressway) पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रयागराज से भदोही और मिर्जापुर होते हुए सोनभद्र तक बनने वाले 333 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के लिए सर्वे, मैपिंग और अलाइनमेंट की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। इस परियोजना के पूरा होने से जहां यात्रा का समय काफी घट जाएगा, वहीं पूरे क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
प्रयागराज की 3 तहसीलों के 84 गांवों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे प्रयागराज जिले की तीन मुख्य तहसीलों के कुल 84 गांवों से होकर गुजरेगा:
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सोरांव तहसील: 29 गांव
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फूलपुर तहसील: 24 गांव
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हंडिया तहसील: 31 गांव
45 गांवों का अलाइनमेंट हुआ फाइनल
यूपीडा (UPEIDA) द्वारा गठित कंसल्टेंट एजेंसी लगातार जमीनी मैपिंग और सर्वे का काम पूरा कर रही है। एजेंसी ने पहले चरण में 45 गांवों का प्रस्ताव जिला प्रशासन को सौंपा था।
प्रशासनिक जांच के दौरान सोरांव (14 गांव), फूलपुर (16 गांव) और हंडिया (11 गांव) यानी कुल 31 गांवों में जमीन के गाटा संख्या, रकबे और भूस्वामियों के नाम में जो मामूली त्रुटियां मिली थीं, उन्हें दुरुस्त कर लिया गया है। संशोधनों के बाद प्रशासन ने इन 45 गांवों की फाइनल रिपोर्ट यूपीडा को भेज दी है।
33 गांवों में सर्वे जारी, 1 महीने में पूरा होगा काम
वर्तमान में द्वितीय चरण के तहत सोरांव के 6, फूलपुर के 12 और हंडिया के 12 गांवों समेत कुल 33 गांवों में सत्यापन और सर्वे का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है।
इन 33 गांवों की रिपोर्ट तैयार होते ही कुल 78 गांवों की प्रक्रिया संपन्न हो जाएगी। इसके बाद महज 6 ग्राम पंचायतें शेष बचेंगी, जिनके लिए यूपीडा से नया प्रस्ताव आते ही काम पूरा कर लिया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, सर्वे और सत्यापन की इस प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग एक से डेढ़ महीने का समय और लगेगा।
जल्द शुरू होगी जमीन क्रय और बैनामे की प्रक्रिया
अलाइनमेंट और गाटा सत्यापन का कार्य शत-प्रतिशत पूरा होते ही यूपीडा द्वारा प्रभावित किसानों व भूस्वामियों से जमीन खरीदने और बैनामा कराने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए सोरांव, फूलपुर और हंडिया तहसील के उपजिलाधिकारियों (SDM) और राजस्व अधिकारियों को पहले ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं।
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