
देश में महंगाई की मार आम आदमी से लेकर थोक बाजार तक लगातार भारी पड़ती जा रही है. खुदरा महंगाई (Retail Inflation) के मोर्चे पर लगे झटके के ठीक एक दिन बाद अब थोक महंगाई ने भी सरकार और आम जनता की चिंताएं बढ़ा दी हैं.
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से 14 जुलाई 2026, मंगलवार को जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर जून 2026 में बढ़कर 9.87% के बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है. इससे पिछले महीने यानी मई में यह दर 9.68% दर्ज की गई थी. सरकार के अनुसार, इस बढ़ोतरी की सबसे मुख्य वजह खाद्य वस्तुओं (Food Items), मिनरल ऑयल, बेसिक मेटल्स और केमिकल उत्पादों की कीमतों में आया तगड़ा उछाल है.
WPI इंडेक्स बढ़कर 110.2 पर पहुंचा; रिटेल में भी हाहाकार
थोक बाजार में सभी कमोडिटी का मुख्य सूचकांक (WPI Index) मई के 109.9 से बढ़कर जून में 110.2 के स्तर पर आ गया है.
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खुदरा महंगाई (CPI) का झटका: थोक महंगाई के इन आंकड़ों से ठीक एक दिन पहले जारी खुदरा महंगाई भी मई के 3.93% से बढ़कर जून में 4.38% पर पहुंच चुकी है.
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खाद्य खुदरा महंगाई (CFPI): उपभोक्ताओं के स्तर पर खाद्य महंगाई दर भी जून में तेजी से छलांग लगाकर 5.32% पर आ गई है, जो मई में 4.78% थी. यानी बाजार के दोनों ही मोर्चों पर कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं.
थाली हुई महंगी: खाने-पीने की चीजों में भारी उछाल
थोक सूचकांक के भीतर सबसे ज्यादा दबाव प्राइमरी आर्टिकल्स और खाद्य पदार्थों में देखा जा रहा है:
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प्राइमरी आर्टिकल्स: प्राइमरी आर्टिकल्स की थोक महंगाई दर मई के 4.99% से सीधे बढ़कर जून में 7% पर पहुंच गई.
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खाद्य वस्तुएं (Food Index): थोक बाजार में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर 3.6% से बढ़कर 5.49% हो गई है. वहीं गैर-खाद्य वस्तुओं (Non-Food Articles) की महंगाई भी 9.49% से उछलकर 11.07% पर आ गई है.
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WPI फूड इंडेक्स: प्राथमिक और मैन्युफैक्चरिंग दोनों खाद्य उत्पादों को मिलाकर बनने वाला WPI फूड इंडेक्स मई के 114.0 से बढ़कर जून में 115.8 हो गया है, जिसके चलते सालाना खाद्य थोक महंगाई दर 6.14% दर्ज की गई.
ईंधन, बिजली और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का हाल
जैसे शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में अलग-अलग सेक्टर्स का प्रदर्शन बदलता रहता है, वैसे ही थोक महंगाई के बास्केट में भी विभिन्न समूहों में मिलाजुला रुख देखने को मिला है:
| प्रमुख समूह (WPI Categories) | मई 2026 में दर | जून 2026 में दर | बाजार की स्थिति |
| ईंधन और बिजली (Fuel & Power) | 30.33% | 27.41% | आंशिक नरमी दर्ज |
| मिनरल ऑयल (Mineral Oils) | 49.82% | 46.48% | मामूली सुधार |
| कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस | 61.51% | 34.75% | वैश्विक कीमतों के कारण बड़ी गिरावट |
| मैन्युफैक्चरिंग उत्पाद (Manufacturing) | 7.48% | 7.48% | पूरी तरह से स्थिर (इंडेक्स 107.8) |
| बेसिक मेटल्स (Basic Metals) | — | 12.31% | औद्योगिक मांग से मजबूती |
| केमिकल और केमिकल प्रोडक्ट्स | — | 12.78% | आंशिक कमी के बाद भी ऊंचे स्तर पर |
मैन्युफैक्चरिंग फूड में भी दिखी तेजी
भले ही कुल मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की महंगाई 7.48% पर स्थिर रही हो, लेकिन फैक्ट्रियों में बनने वाले खाद्य उत्पादों (Manufacturing Food Products) की महंगाई दर बढ़कर 7.2% हो गई है. इसका साफ मतलब है कि आने वाले दिनों में पैक्ड फूड और रोजाना इस्तेमाल होने वाली एफएमसीजी (FMCG) वस्तुओं की कीमतों में भी खुदरा स्तर पर बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब का बजट और बिगड़ने के आसार हैं.
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