
पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जब सऊदी अरब ने पवित्र शहर मक्का के दक्षिण में एक हथियारबंद ड्रोन को मार गिराने का आधिकारिक दावा किया। इस गंभीर घटनाक्रम के सामने आते ही पाकिस्तान ने सऊदी अरब और तुर्की के साथ हाल ही में संपन्न हुए त्रिपक्षीय मक्का रक्षा समझौते के प्रति अपनी पूर्ण सैन्य और कूटनीतिक प्रतिबद्धता दोहराई है। पाकिस्तान सरकार और सैन्य नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि इस्लामी दुनिया के सबसे मुकद्दस स्थलों की सुरक्षा के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कड़े शब्दों में कहा कि पवित्र हरमैन शरीफैन की हिफाजत करना किसी लिखित समझौते का मोहताज नहीं है, बल्कि यह इस्लामाबाद का बुनियादी ईमान और कर्तव्य है, जिसे किसी भी कीमत पर पूरा किया जाएगा।
मक्का सुरक्षा के लिए किसी औपचारिक समझौते की जरूरत नहीं: रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का दो टूक बयान
सऊदी अरब के मक्का प्रांत के निकट हूती ड्रोन घुसपैठ की घटना के बाद पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जियो न्यूज से बात करते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दो टूक शब्दों में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि मक्का और मदीना जैसे पवित्र इस्लामी स्थलों की रक्षा करना पाकिस्तान के लिए किसी तकनीकी या कागजी समझौते से कहीं ऊपर है। आसिफ ने रेखांकित किया कि यदि मक्का मुकर्रमा पर कोई सीधा खतरा आता है, तो उसकी हिफाजत में पाकिस्तान बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी पूरी ताकत झोंक देगा। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल ही में सऊदी अरब और तुर्की के साथ हस्ताक्षरित त्रिपक्षीय समझौता पूरी तरह से सक्रिय है और इसके तहत जो भी सैन्य या रणनीतिक जिम्मेदारियां पाकिस्तान पर आती हैं, देश उन्हें पूरी निष्ठा और तत्परता के साथ धरातल पर उतारेगा।
क्या है सऊदी-तुर्की-पाकिस्तान त्रिपक्षीय मक्का रक्षा समझौता और इसका सामूहिक सुरक्षा ढांचा
पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच 7 अगस्त को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के मध्य एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय रक्षा समझौता हुआ था। इस समझौते की मुख्य धुरी सामूहिक सुरक्षा का मजबूत ढांचा है, जिसके तहत नाटो के आर्टिकल 5 की तर्ज पर यह प्रावधान किया गया है कि यदि तीनों हस्ताक्षरकर्ता देशों में से किसी एक पर भी कोई सशस्त्र या बाह्य सैन्य हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर संयुक्त हमला माना जाएगा। इस समझौते का प्रमुख उद्देश्य खाड़ी और मध्य पूर्व में साझा प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण करना और क्षेत्रीय संप्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखना है। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने पहले ही साफ कर दिया था कि यह समझौता पूरी तरह रक्षात्मक है और इसका मकसद आक्रामकता फैलाना नहीं, बल्कि मित्र देशों की रक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाना है।
सऊदी एयर डिफेंस का मक्का के पास एक्शन: हूती ड्रोन को मार गिराने का दावा और हूतियों का इनकार
सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उनके उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम ने मक्का के दक्षिणी इलाके में एक ड्रोन को तब ट्रैक किया जब वह प्रतिबंधित और संवेदनशील हवाई क्षेत्र में दाखिल होने का प्रयास कर रहा था। सऊदी सेना ने त्वरित मिसाइल इंटरसेप्शन के जरिए ड्रोन को हवा में ही मार गिराया और उसे मक्का के हवाई क्षेत्र को पार करने से रोक दिया। इस घटना के बाद रियाद ने हूती विद्रोहियों पर पवित्र धार्मिक स्थलों को असुरक्षित करने का गंभीर आरोप लगाया। दूसरी ओर, यमन के हूती विद्रोही संगठन ने तुरंत आधिकारिक बयान जारी कर सऊदी अरब के इन दावों का खंडन किया है। हूतियों का कहना है कि उन्होंने मक्का या किसी भी अन्य इस्लामी पवित्र स्थल को कभी निशाना नहीं बनाया और न ही भविष्य में ऐसा करने का उनका कोई इरादा है।
विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक ब्रीफिंग: ऑपरेशनल गोपनीयता और सैन्य रणनीति का खुलासा न करने की नीति
इस्लामाबाद में आयोजित साप्ताहिक विदेश मंत्रालय ब्रीफिंग के दौरान प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के सामने पाकिस्तान की रणनीतिक स्थिति स्पष्ट की। जब उनसे पूछा गया कि क्या सऊदी अरब में लगातार हो रहे हवाई और ड्रोन हमलों को निष्प्रभावी करने के लिए पाकिस्तान अपनी सेना या वायु रक्षा प्रणालियों की तैनाती कर रहा है, तो उन्होंने कहा कि पाकिस्तान समझौते की शर्तों को लागू करने के लिए कृतसंकल्प है। हालांकि, उन्होंने बल देकर कहा कि सैन्य अभियानों की सफलता उनकी गोपनीयता पर निर्भर करती है, इसलिए कब, कहां, किस परिस्थिति में और किस स्तर के बल का प्रयोग किया जाएगा, इसे सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया जा सकता। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी इस रुख का समर्थन करते हुए कहा कि यदि सदस्य राष्ट्रों की भौगोलिक अखंडता या अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का उल्लंघन होता है, तो त्वरित जवाबी कार्रवाई होगी, किंतु सैन्य योजनाओं पर खुली चर्चा नहीं की जाएगी।
रेड सी, बाब अल-मंदेब और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव: वैश्विक व्यापार और पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था पर असर
खाड़ी संकट का प्रभाव केवल जमीनी सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि लाल सागर के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों पर भी इसका विनाशकारी प्रभाव पड़ रहा है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बाब अल-मंदेब और होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक गलियारों में लगातार बढ़ रहे हमलों और जहाजों की आवाजाही में आ रही रुकावटों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने क्षेत्र में सक्रिय सभी गैर-सरकारी तत्वों और हूती विद्रोहियों से अपनी उकसावे वाली गतिविधियों को तत्काल बंद करने की अपील की। रक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बाब अल-मंदेब और होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का अधिकांश तेल और वाणिज्यिक कार्गो गुजरता है। यदि इन संकीर्ण समुद्री मार्गों में तनाव बढ़ता है, तो माल ढुलाई और समुद्री बीमा की लागत कई गुना बढ़ जाएगी। पाकिस्तान जैसी पहले से संघर्षरत अर्थव्यवस्था के लिए यह रुकावट दोहरी मार साबित हो सकती है, जिससे ऊर्जा संकट और मुद्रास्फीति में भारी इजाफा हो सकता है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की तीखी निंदा: रियाद के साथ अटूट एकजुटता और संयम की अपील
सऊदी अरब में सुरक्षा स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कड़ा आधिकारिक बयान जारी किया। प्रधानमंत्री शरीफ ने सऊदी अरब की सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति पाकिस्तान के अटूट समर्थन को दोहराते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में इस्लामाबाद अपने सऊदी भाइयों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। उन्होंने मक्का जैसे पवित्र स्थल के पास ड्रोन भेजने की कथित कोशिश को कायरतापूर्ण और निंदनीय कृत्य करार दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पवित्र स्थलों पर मंडराने वाले किसी भी खतरे को पूरी मुस्लिम उम्माह के खिलाफ साजिश माना जाएगा। इसके साथ ही, व्यापक क्षेत्रीय युद्ध के खतरे को टालने के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खाड़ी के सभी पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने, सैन्य टकराव से पीछे हटने और बातचीत के जरिए शांति स्थापित करने का पुरजोर आह्वान किया।
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