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क्या जिंदा हैं ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कर दिया दुनिया को हिलाने वाला दावा

अमेरिका और ईरान के बीच जारी भयंकर सैन्य और रणनीतिक टकराव के बीच मध्य पूर्व की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। लंबे समय से दुनिया भर की मीडिया में यह कयास लगाए जा रहे थे कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई जीवित हैं या नहीं, जिस पर अब खुद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बेहद सनसनीखेज दावा करके अंतरराष्ट्रीय मंच पर हलचल मचा दी है। अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के सामने गवाही देते हुए मार्को रुबियो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई न सिर्फ जीवित हैं, बल्कि सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह गायब रहने के बावजूद वे देश के तमाम अहम और कूटनीतिक मामलों में लगातार बेहद सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। खुफिया ठिकाने से चल रही है सरकार, पर्दे के पीछे से बढ़े मुज्तबा के तेवर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा साझा किए गए इनपुट्स के अनुसार, वाशिंगटन को ऐसे पुख्ता संकेत मिल रहे हैं कि मुज्तबा खामेनेई अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आक्रामक और सक्रिय रूप से ईरान की सत्ता का संचालन कर रहे हैं। रुबियो ने सीनेट को बताया कि हालांकि मुज्तबा आम जनता या मीडिया के सामने बिल्कुल भी दिखाई नहीं दे रहे हैं, लेकिन ईरान के अंदरूनी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सभी महत्वपूर्ण निर्णयों में उनकी मुख्य भूमिका बनी हुई है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने यह भी संकेत दिया है कि इस वर्ष की शुरुआत में हुए अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों में गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी मुज्तबा खामेनेई ने देश के सैन्य और प्रशासनिक संचालन से खुद को पूरी तरह अलग नहीं किया है। पिता अली खामेनेई की हत्या के बाद मिली थी कमान, खाड़ी क्षेत्र में छिड़ चुका है महायुद्ध आपको बता दें कि इस बेहद संवेदनशील मामले की पृष्ठभूमि काफी हिंसक रही है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, मुज्तबा खामेनेई को उनके पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या के ठीक बाद ईरान का नया सर्वोच्च नेता घोषित किया गया था। अली खामेनेई की मौत बीती 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के भीतर किए गए शुरुआती भीषण हमलों के दौरान हुई बताई जा रही है। पिता की मौत के बाद मुज्तबा के नेतृत्व में ईरान ने भयानक जवाबी कार्रवाई करते हुए फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद कई अमेरिकी मिलिट्री बेसों को मिसाइलों से निशाना बनाया था, जिसके बाद यह पूरा टकराव धीरे-धीरे एक विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध में बदल गया। हालांकि, इस समय हालात किसी तरह एक अस्थायी और बेहद नाजुक युद्धविराम (Ceasefire) के तहत थमे हुए हैं। स्ट्रेट ऑफ हार्मुज की नाकेबंदी ने पूरी दुनिया में पैदा किया भयंकर ऊर्जा संकट इस महा-संग्राम के बीच ईरान द्वारा उठाए गए एक कदम ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। मुज्तबा खामेनेई के इशारे पर ईरानी सेना द्वारा रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ हार्मुज' (Strait of Hormuz) को बंद किए जाने से वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, मुज्तबा खामेनेई इस समय किसी अज्ञात और बेहद गुप्त भूमिगत ठिकाने में विश्व स्तरीय कड़ी सुरक्षा के बीच रह रहे हैं। वे वहीं से अत्याधुनिक एनक्रिप्टेड संचार प्रणालियों (Encrypted Communication) और सैटेलाइट माध्यमों के जरिए अपनी सेना और सरकार के शीर्ष अधिकारियों को सीधे जंग और कूटनीति से जुड़े बड़े फैसले डिक्टेट कर रहे हैं। अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में पूरी तरह गतिरोध, डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदों को झटका अमेरिकी विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के प्रयासों पर बात करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर अभी भी सैद्धांतिक रूप से संभावनाएं बची हुई हैं, लेकिन व्यावहारिक धरातल पर यह बातचीत इस वक्त पूरी तरह से ठप और रुकी हुई है। उन्होंने कहा कि बाइडेन-ट्रंप प्रशासन किसी भी नए समझौते की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं कर रहा है, लेकिन वर्तमान जमीनी हालात बेहद अस्थिर और अप्रत्याशित हैं। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी यह उम्मीद जताई थी कि जल्द ही दोनों देशों के बीच किसी नए परमाणु समझौते पर सहमति बन सकती है, लेकिन मौजूदा कड़े रुख को देखते हुए यह राह बेहद मुश्किल नजर आ रही है। प्रतिबंध हटाने के लिए अमेरिका ने रखीं बेहद सख्त शर्तें, यूरेनियम संवर्धन रोकने की चेतावनी मार्को रुबियो ने सीनेट के सामने वाशिंगटन की भावी नीति को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए कहा कि ईरान पर लगे तमाम आर्थिक और कड़े व्यापारिक प्रतिबंध तब तक किसी भी कीमत पर नहीं हटाए जाएंगे, जब तक कि वह अपनी खतरनाक परमाणु गतिविधियों और उच्च स्तरीय यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) को लेकर दुनिया के सामने कोई ठोस और पारदर्शी कदम नहीं उठाता। अमेरिका ने प्रतिबंधों में ढील देने के लिए ईरान के सामने तीन बेहद कड़ी और स्पष्ट शर्तें रखी हैं। पहली शर्त यह है कि ईरान को आधिकारिक रूप से यह एलान करना होगा कि वह अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही के लिए स्ट्रेट ऑफ हार्मुज को पूरी तरह से खोल रहा है। दूसरी शर्त के अनुसार, वह किसी भी देश के व्यापारिक या सैन्य जहाजों पर दोबारा हमला नहीं करेगा और तीसरी शर्त यह है कि खाड़ी के समुद्री मार्गों में ईरान द्वारा बिछाई गई सभी बारूदी समुद्री सुरंगों (Sea Mines) को हटाने में वह अमेरिकी नौसेना का पूरा सहयोग करेगा। इजराइल-लेबनान जंग के चलते बातचीत बंद, मध्य पूर्व में मंडरा रहा है तबाही का साया इस बीच, मध्य पूर्व के अन्य मोर्चों पर भी हालात बद से बदतर बने हुए हैं। इजराइल और लेबनान के बीच सीमा पर जारी भीषण रॉकेट युद्ध और संघर्ष के कारण पूरे क्षेत्र में युद्ध की विभीषिका फैली हुई है। इसी क्षेत्रीय अशांति का हवाला देते हुए ईरान ने विभिन्न मध्यस्थ देशों (जैसे कतर और ओमान) के जरिए पर्दे के पीछे से चल रही शांति वार्ता को भी फिलहाल पूरी तरह से सस्पेंड कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इजराइल, लेबनान और गाजा का यह क्षेत्रीय संघर्ष पूरी तरह शांत नहीं हो जाता, तब तक ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी बड़ी रणनीतिक प्रगति या ऐतिहासिक समझौते की उम्मीद करना पूरी तरह बेमानी होगा।