Thursday , June 4 2026

अमेरिका ने भारत और चीन समेत 54 देशों पर ठोका 12.5% एक्स्ट्रा टैरिफ का प्रस्ताव, वैश्विक बाजार में मची खलबली

वैश्विक व्यापार जगत से एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने अंतरराष्ट्रीय बाजार में खलबली मचा दी है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने एक बेहद कड़ा और बड़ा कदम उठाते हुए भारत और चीन सहित दुनिया के 54 देशों से आने वाले एक्सपोर्ट (निर्यात) पर सीधे 12.5% का अतिरिक्त आयात शुल्क (इंपोर्ट टैरिफ) लगाने का एक सनसनीखेज प्रस्ताव पेश किया है। वाशिंगटन के इस बेहद सख्त और आक्रामक रुख के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन और विभिन्न देशों के साथ अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों में भारी तनाव और कड़वाहट पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिका ने लगाया 'जबरन श्रम' का संगीन आरोप, इन सेक्टर्स पर गिरेगी गाज अमेरिकी प्रशासन ने इस बेहद कड़े और दंडात्मक कदम को उठाने के पीछे 'जबरन श्रम' (Forced Labor) को सबसे मुख्य और बड़ी वजह बताया है। USTR ने अपनी रिपोर्ट में बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि ये सभी 54 देश अपने यहां ऐसे सामानों के उत्पादन, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट को रोकने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुए हैं, जिनमें किसी भी स्तर पर बंधुआ मजदूरी या जबरन श्रम का इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिका के इस कड़े फैसले की गाज दुनिया भर के कई प्रमुख और बड़े उद्योगों पर गिरने वाली है। इस पूरी जांच के दायरे में स्टील, एल्युमिनियम, ऑटोमोबाइल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और एग्रीकल्चर (कृषि) जैसे बेहद महत्वपूर्ण सेक्टर्स को शामिल किया गया है, जिनका सीधा असर अमेरिकी घरेलू बाजार और वैश्विक व्यापार पर पड़ता है। अमेरिकी जांच की रडार पर चीन का कॉटन और पॉलीसिलिकॉन बाजार USTR की तरफ से जारी की गई इस विस्तृत रिपोर्ट में चीन को लेकर कई बेहद गंभीर और तीखे दावे किए गए हैं। अमेरिकी एजेंसी का कहना है कि चीन की कॉटन (कपास) और सौर ऊर्जा उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले पॉलीसिलिकॉन की पूरी सप्लाई चेन में जबरन श्रम कराए जाने के बेहद पुख्ता सबूत मिले हैं। अमेरिका के लिए चिंता की बात यह है कि चीन के इस कच्चे माल का इस्तेमाल दुनिया के अन्य तमाम देश भी अपने तैयार उत्पादों (फिनिश्ड गुड्स) में बड़े पैमाने पर करते हैं। यही वजह है कि अमेरिका ने अपनी इस जांच का दायरा काफी बड़ा कर दिया है, ताकि चीन से अप्रत्यक्ष रूप से आने वाले सामानों पर भी नकेल कसी जा सके। भारत ने अमेरिकी दावों को बताया अनुचित, आरोपों को सिरे से किया खारिज अमेरिका द्वारा लगाए गए इन बेहद संगीन और गंभीर दावों पर भारतीय एजेंसियों ने भी बेहद तीखी और सख्त प्रतिक्रिया दी है। भारत सरकार और संबंधित सुरक्षा व व्यापारिक एजेंसियों ने अमेरिकी रिपोर्ट में लगाए गए इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इस पूरी जांच प्रक्रिया को पूरी तरह से 'अनुचित' और एकतरफा करार दिया है। भारतीय पक्ष का साफ कहना है कि देश में श्रम कानूनों का पूरी कड़ाई से पालन किया जाता है और ऐसे आरोप निराधार हैं। विवाद सुलझाने के लिए 'सेक्शन 301' के तहत भारत और अमेरिका में बातचीत जारी इस बड़े व्यापारिक विवाद के सामने आने के बाद भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय पूरी तरह से एक्टिव हो गया है। भारत इस पूरे बेहद संवेदनशील मसले पर अमेरिकी प्रशासन के साथ 'सेक्शन 301' की तय कानूनी कार्यवाही के तहत लगातार उच्च स्तरीय बातचीत कर रहा है। इसके साथ ही, दोनों देश इस बात के लिए भी पुरजोर कोशिश कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसे व्यापारिक विवादों को आपसी सहमति से सुलझाया जा सके, जिसके लिए एक मजबूत द्विपक्षीय फ्रेमवर्क समझौते को अंतिम रूप देने की तैयारियां भी जोरों-शोरों से की जा रही हैं