
News India Live, Digital Desk : महाराष्ट्र सरकार के कामकाज पर एक आरटीआई (RTI) खुलासे ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला उपमुख्यमंत्री अजित पवार के मंत्रालय से जुड़ा है, जहां एक अधिकारी की मृत्यु के ठीक 9 मिनट बाद उनके विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लिए गए और फाइलों को आगे बढ़ाया गया। विपक्ष ने इसे “डिजिटल धांधली” और “अनैतिक प्रशासनिक जल्दबाजी” करार दिया है।क्या है पूरा मामला?मिली जानकारी के अनुसार, अजित पवार के विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का लंबी बीमारी या अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण निधन हो गया था। अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक, जैसे ही अधिकारी को मृत घोषित किया गया, उसके मात्र 9 मिनट के भीतर उनके लॉगिन या उनके प्रभार वाली डिजिटल फाइलों पर अप्रूवल की मुहर लग गई।विपक्ष का आरोप है कि इतनी जल्दी में फैसले लेना यह दर्शाता है कि कोई और उन फाइलों को ‘बैकडेट’ या ‘अवैध’ तरीके से क्लियर कर रहा था।विपक्ष के तीखे सवालराष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और शिवसेना (UBT) ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।सवाल 1: जब अधिकारी अस्पताल में था या उसकी मृत्यु हो चुकी थी, तो उसके डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग किसने किया?सवाल 2: क्या विभाग में कोई ‘समानांतर सत्ता’ काम कर रही है जो मंत्रियों के इशारे पर नियम ताक पर रख रही है?सवाल 3: इन 9 मिनटों में कौन से महत्वपूर्ण वित्तीय या टेंडर संबंधी फैसले लिए गए?सरकार का बचावअजित पवार खेमे और सरकारी प्रवक्ताओं ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उनका तर्क है कि डिजिटल इंडिया के दौर में कई प्रक्रियाएं ‘ऑटो-मोड’ पर होती हैं या पहले से शेड्यूल की गई होती हैं। हालांकि, तकनीकी जानकारों का कहना है कि नीतिगत फैसलों के लिए मैनुअल इंटरवेंशन (इंसानी दखल) जरूरी होता है, जिसे 9 मिनट के भीतर करना संदेहास्पद है।क्या होगा अगला कदम?इस खुलासे के बाद महाराष्ट्र विधानसभा के आगामी सत्र में भारी हंगामे के आसार हैं। विपक्षी दलों ने इस मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच और संबंधित डिजिटल लॉग्स (Digital Logs) को सार्वजनिक करने की मांग की है।मुख्य बिंदु:घटना का समय: अधिकारी की मृत्यु के ठीक 9 मिनट बाद।विभाग: वित्त एवं नियोजन (अजित पवार के अधीन)।विवाद: डिजिटल हस्ताक्षर और प्रशासनिक नैतिकता का उल्लंघन।
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