Monday , July 27 2026

अमेरिका-ईरान के बीच सुलह कराएगा पाकिस्तान? व्हाइट हाउस ने तोड़ी चुप्पी, ट्रंप के मास्टर प्लान से दुनिया हैरान

News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व के सुलगते हालातों के बीच क्या पाकिस्तान अब शांतिदूत की भूमिका निभाएगा? यह सवाल पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती जंग की आशंकाओं के बीच व्हाइट हाउस ने एक बड़ा बयान जारी किया है, जिसने वैश्विक कूटनीति में नई बहस छेड़ दी है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने उन खबरों पर प्रतिक्रिया दी है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर सकते हैं।क्या पाकिस्तान में होगी महाशक्तियों की मुलाकात?बीते कुछ दिनों से अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह खबर आग की तरह फैल रही थी कि डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि पाकिस्तान में मुलाकात कर सकते हैं। इन अटकलों पर विराम लगाते हुए व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप अपनी विदेश नीति को लेकर बेहद स्पष्ट हैं और वे ‘शांति के जरिए शक्ति’ (Peace through Strength) के सिद्धांत पर विश्वास करते हैं। हालांकि, व्हाइट हाउस ने सीधे तौर पर मुलाकात से इनकार नहीं किया है, लेकिन यह जरूर कहा है कि फिलहाल ऐसी किसी आधिकारिक वार्ता की पुष्टि नहीं की जा सकती।ट्रंप की ‘सीक्रेट’ डिप्लोमेसी और पाकिस्तान का रोलविशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में कुछ ऐसा करना चाहते हैं जो नामुमकिन नजर आता है। पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व और वहां की सरकार ने हाल ही में अमेरिका के साथ अपनी नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की है। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच एक ‘पुल’ बनने की कोशिश कर रहा है ताकि खाड़ी क्षेत्र में जारी अस्थिरता को खत्म किया जा सके। यदि ऐसा होता है, तो यह दक्षिण एशिया की राजनीति में पाकिस्तान के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जाएगी।ईरान का रुख और हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकटदूसरी ओर, ईरान ने भी संकेत दिए हैं कि वह युद्ध को और आगे नहीं बढ़ाना चाहता, बशर्ते उसकी संप्रभुता का सम्मान किया जाए। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने तेल की वैश्विक सप्लाई को संकट में डाल दिया है। ऐसे में अमेरिका पर भी यह दबाव है कि वह कूटनीतिक रास्तों से इस विवाद का हल निकाले। व्हाइट हाउस का कहना है कि वे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध हैं और किसी भी ऐसे प्रयास का स्वागत करेंगे जो तनाव को कम करने में सहायक हो।भारत की पैनी नजर: क्या बदलेगा क्षेत्रीय समीकरण?पाकिस्तान की इस संभावित भूमिका पर भारत के विदेश मंत्रालय की भी पैनी नजर है। अगर पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनकर उभरता है, तो यह भारत की रणनीतिक बढ़त के लिए चुनौती हो सकता है। कांग्रेस ने पहले ही इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरते हुए इसे ‘बड़ा झटका’ करार दिया है। हालांकि, कूटनीति के जानकारों का कहना है कि ट्रंप की नीतियां अक्सर चौंकाने वाली होती हैं और वे किसी भी देश का उपयोग अपने हितों को साधने के लिए कर सकते हैं।