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अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में मार गिराए ईरानी ड्रोन, हड़कंप के बीच अचानक तेहरान पहुंचे पाकिस्तान के गृह मंत्री

अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में मार गिराए ईरानी ड्रोन, हड़कंप के बीच अचानक तेहरान पहुंचे पाकिस्तान के गृह मंत्री

मिडल ईस्ट (Middle East) में लंबे समय से चला आ रहा तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच घोषित युद्धविराम के बावजूद दोनों महाशक्तियों के बीच सैन्य टकराव की एक ऐसी सनसनीखेज घटना सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी सेना ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के ऊपर मंडरा रहे ईरान के दो खतरनाक लड़ाकू ड्रोनों को मिसाइल हमले में मार गिराया है। वॉशिंगटन का दावा है कि ये ड्रोन अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात और व्यापारिक जहाजों के लिए एक बड़ा और सीधा खतरा बन चुके थे। इस सैन्य कार्रवाई के बाद खाड़ी देशों में युद्ध की चिंगारी भड़क उठी है। इसी बीच, दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कमान संभाल रहे पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी एक बेहद ही गुप्त और आपातकालीन मिशन पर आनन-फानन में भागे-भागे ईरान की राजधानी तेहरान पहुंच गए हैं।

100वें दिन पहुंचा अमेरिका-ईरान युद्ध, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर बढ़ा भारी दबाव

रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच जारी इस विनाशकारी युद्ध को पूरे 100 दिन मुकम्मल हो गए हैं, लेकिन फिलहाल दूर-दूर तक इसका कोई अंत नजर नहीं आ रहा है। दोनों देशों के बीच हुए अस्थायी सीजफायर को एक स्थायी और शांतिपूर्ण समझौते में तब्दील करने की वैश्विक कोशिशें बार-बार पटरी से उतर रही हैं। इस 100 दिनों के लंबे संघर्ष ने ग्लोबल मार्केट (वैश्विक बाजार) की कमर तोड़ दी है और कच्चे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता पैदा कर दी है। घरेलू मोर्चे पर भी, अमेरिकी मिडटर्म चुनावों (Midterm Elections) से ठीक पहले इस युद्ध ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भारी राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव बना दिया है। ऐसे नाजुक वक्त में पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी के इस अचानक तेहरान दौरे को नई अंतरराष्ट्रीय डिप्लोमैटिक कोशिशों के बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

जनरल आसिम मुनीर का 'सीक्रेट संदेश' लेकर सर्वोच्च नेता खामेनेई के दरबार में नकवी

पाकिस्तान इस वक्त अमेरिका और ईरान के बीच सीधी जंग को टालने के लिए बैकचैनल डिप्लोमेसी का मुख्य केंद्र बना हुआ है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने हाल ही में इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों के बीच एक दौर की गुप्त सीधी बातचीत की मेजबानी की थी। अब इसी बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाने और दोनों परमाणु संपन्न या महाशक्तियों के बीच संवादहीनता को खत्म करने के लिए मोहसिन नकवी तेहरान पहुंचे हैं। वे अपने साथ पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर का एक बेहद खास और गोपनीय संदेश ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के लिए लेकर गए हैं। तेहरान पहुंचने पर नकवी ने मीडिया से बेहद संक्षिप्त बातचीत में कहा, "मुझे लगता है कि जो संदेश मैं लेकर आया हूं, वह इस वक्त मिडल ईस्ट की शांति के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण और निर्णायक है।"

ईरान ने सहयोगियों पर दागीं मिसाइलें, भड़का अमेरिका और खाड़ी देश

दरअसल, इस ताजा विवाद की शुरुआत शनिवार को हुई जब तेहरान ने अमेरिका के बेहद करीबी और मजबूत खाड़ी सहयोगी देशों बहरीन और कुवैत पर एक के बाद एक कई बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं। इस अप्रत्याशित मिसाइल हमले से पूरे खाड़ी क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया और 8 अप्रैल को दोनों देशों के बीच हुआ बेहद नाजुक सीजफायर पूरी तरह से खतरे में पड़ गया। इसके जवाब में ही अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी ड्रोनों को निशाना बनाया। उधर, ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक कड़ा बयान जारी कर अमेरिका के इस हालिया ड्रोन हमले को अंतरराष्ट्रीय हवाई और समुद्री नियमों का खुला व घोर उल्लंघन बताया है और वॉशिंगटन के इस दुश्मनी भरे व उकसावे वाले व्यवहार की वैश्विक मंच पर कड़ी निंदा की है।

24 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्ति पर अड़ा ईरान, ट्रंप के सामने रखी बड़ी शर्त

ईरान के सर्वोच्च नेता के मुख्य सैन्य सलाहकार मोहसेन रेजाई ने अमेरिकी मीडिया नेटवर्क सीएनएन (CNN) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता इस वक्त पूरी तरह ठप पड़ी है। उन्होंने कहा कि अगर इस गतिरोध को खत्म करना है, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुद आगे बढ़कर बड़ा कदम उठाना होगा। इसके साथ ही ईरान ने अपनी एक और बड़ी शर्त दोहराई है कि अमेरिका द्वारा अंतरराष्ट्रीय बैंकों में फ्रीज (जब्त) की गई ईरान की लगभग 24 अरब डॉलर की संपत्ति को तुरंत बिना शर्त बहाल किया जाए। दूसरी तरफ, वॉशिंगटन से आ रही खबरों के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन इस भारी-भरकम फंड को ईरान को लौटाने के बजाय, इसका इस्तेमाल खाड़ी देशों में ईरानी मिसाइल हमलों से हुए भारी नुकसान की भरपाई और मुआवजे के रूप में करने की बड़ी योजना बना रहा है, जिससे यह पूरा मामला और ज्यादा उलझ गया है।