
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में शांति स्थापित करने की तमाम वैश्विक कोशिशों और हाल ही में हुए सीजफायर समझौते को एक बहुत बड़ा और जानलेवा झटका लगा है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच युद्ध को पूरी तरह खत्म करने के लिए अभी बातचीत का दौर चल ही रहा था कि अमेरिकी फाइटर जेट्स ने ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी (Airstrike) कर पूरे क्षेत्र को दहला दिया।
इस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान आगबबूला हो उठा है। ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने शनिवार को अमेरिका को बेहद सख्त और सीधे लहजे में चेतावनी दी है कि इस दुस्साहस के बाद वाशिंगटन को सिर्फ 'पीछे हटना और पछताना' पड़ेगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोलते हुए साफ कहा कि अब अमेरिका का यह 'ब्लेम गेम' यानी खुद हमला करके दूसरों पर दोष मढ़ने का खेल बिल्कुल नहीं चलेगा। आइए जानते हैं कि शांति समझौते के बीच अचानक भड़के इस महाविवाद की असल वजह क्या है।
क्यों भड़का विवाद? जानिए अमेरिकी सेना के ताबड़तोड़ हवाई हमलों की वजह
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के लड़ाकू विमानों ने शुक्रवार को ईरान के भीतर मौजूद मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज लोकेशन्स के साथ-साथ उनकी तटीय रडार साइटों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें बरसा दीं। व्हाइट हाउस और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इस कार्रवाई को पूरी तरह जायज ठहराते हुए साफ किया कि यह हमला ईरान द्वारा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग में एक कमर्शियल जहाज पर किए गए कायरतापूर्ण हमले का सीधा और कड़ा जवाब है।
अमेरिकी सेना द्वारा जारी आधिकारिक टाइमलाइन के मुताबिक, बीते 25 जून को ईरान ने ओमान के तट के पास जलडमरूमध्य से गुजर रहे सिंगापुर के झंडे वाले एक विशाल मालवाहक जहाज 'एम/वी एवर लवली' (M/V Ever Lovely) पर वन-वे सुसाइड अटैक ड्रोन से हमला किया था। यह हमला रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हुआ था, जो पूरी दुनिया के कुल ऊर्जा और कच्चे तेल के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) संभालता है। अमेरिका ने इसी अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के उल्लंघन को आधार बनाकर ईरान के खिलाफ यह बड़ा सैन्य एक्शन लिया है।
ईरान का पलटवार: 'अमेरिका ने बातचीत के बीच में पीठ पर छुरा घोंपा'
अमेरिकी बमबारी से भड़के ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व शीर्ष कमांडर और वर्तमान सांसद इब्राहिम अजीजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अमेरिका को आड़े हाथों लेते हुए एक लंबी पोस्ट लिखी। अजीजी ने कहा, 'सफेदपोश अमेरिका ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसकी कथनी और करनी में कितना फर्क है। उसने शांति वार्ता के बीच में ही हमारे देश पर हमला करके पीठ पर छुरा घोंपा है। नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को दिखा दिया है कि वे किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानून, बातचीत या सीजफायर के सिद्धांतों को नहीं मानते हैं।'
अजीजी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सीजफायर का यह लापरवाह उल्लंघन अमेरिका के लिए आत्मघाती साबित होगा। ईरानी सांसद के इस तीखे बयान के ठीक कुछ घंटों बाद IRGC के मुख्यालय से भी एक बड़ा और डराने वाला ऐलान कर दिया गया। ईरानी सेना ने कहा कि उसने देश के दक्षिणी हिस्से पर हुए अमेरिकी हमलों के प्रतिशोध में पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में फैले अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उनके दूतावासों को सीधे अपने मिसाइल निशाने पर लेना शुरू कर दिया है।
'हिंसा का जवाब सिर्फ हिंसा' – अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस की दोटूक
ईरानी धमकियों के बीच अमेरिका ने भी झुकने से साफ इनकार कर दिया है। अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने ईरान को आड़े हाथों लेते हुए 'X' पर दोटूक शब्दों में चेतावनी दी। वेंस ने लिखा, 'ईरान ने खुद टेबल पर बैठकर सीजफायर समझौते पर दस्तखत किए थे और हमारी सेना ने उस समझौते का पूरा सम्मान किया। अगर ईरानी प्रशासन को एमओयू (MOU) के नियमों या उसे लागू करने के तरीके को लेकर कोई भी आपत्ति या असहमति थी, तो वे राजनयिक चैनलों के जरिए बात कर सकते थे। लेकिन उन्होंने हथियारों का रास्ता चुना, और याद रहे कि हमारे देश के खिलाफ की गई हिंसा का जवाब हमेशा दोगुनी हिंसा से ही दिया जाएगा।' इसके साथ ही वेंस ने ईरान से आखिरी अपील करते हुए कहा कि वे आगे की तबाही को रोकने के लिए तुरंत हिंसा रोककर बातचीत की मेज पर आएं।
नाजुक मोड़ पर शांति वार्ता: क्या तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही दुनिया?
यह पूरा सैन्य टकराव एक ऐसे नाजुक और ऐतिहासिक मोड़ पर हुआ है जब दोनों देशों के बीच दशकों पुराने तनाव को खत्म करने के लिए पर्दे के पीछे से बड़ी डिप्लोमैटिक बातचीत चल रही थी। पिछले हफ्ते ही दोनों पक्षों के बीच एक अस्थाई सीजफायर का औपचारिक ऐलान हुआ था, जिसके तहत एक व्यापक फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों को 60 दिनों का समय दिया गया था। लेकिन इन ताजा हवाई हमलों और पलटवार के बाद दुनिया भर के शेयर बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उथल-पुथल शुरू हो गई है। शांति की सभी उम्मीदों को गहरा झटका लगा है और मिडिल ईस्ट एक बार फिर भयंकर क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) की आग में झुलसने की कगार पर आ खड़ा हुआ है।
UK News