
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भू-राजनीतिक समीकरणों के पटल पर इस समय अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर एक बेहद बड़ी और गंभीर रिपोर्ट सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के सामने हाल ही में संपन्न हुए मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) में पार्टी को मिली करारी हार के बाद एक बहुत बड़ी दुविधा खड़ी हो गई है। पिछले आठ महीनों से ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष और उसके घरेलू राजनीतिक तथा आर्थिक दुष्परिणामों के चलते अब अमेरिकी प्रशासन के लिए ईरान के खिलाफ कोई भी नया या बड़ा कदम उठाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। चुनाव परिणामों में डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत और संसद में बदले समीकरणों के बाद कूटनीतिक रास्ते भी काफी हद तक सीमित नजर आ रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस चुनाव परिणाम के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सामने किस तरह की कूटनीतिक और आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
चुनाव में हार के बाद ट्रंप ने स्वीकार किया, पेट्रोल-डीजल की महंगाई और युद्ध बना पार्टी की हार की मुख्य वजह
हाल ही में हुए अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को जिन गंभीर राजनीतिक परिणामों का सामना करना पड़ा है, उसके पीछे ईरान के साथ चल रहा लंबा युद्ध और देश में आसमान छूती महंगाई को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस बात को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि इस सैन्य संघर्ष के कारण अमेरिका में पेट्रोल और ईंधन की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया, जिससे आम मतदाता काफी आहत और नाराज थे।
हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए यह कदम उठाना बेहद आवश्यक था। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे देश हित में ऐसे कड़े फैसले दोबारा लेने से पीछे नहीं हटेंगे। लेकिन दूसरी तरफ, एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मतदाता सर्वेक्षण के आंकड़े यह बताते हैं कि करीब 60 प्रतिशत अमेरिकी मतदाताओं ने ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई को गलत फैसला करार दिया है और लगभग इतनी ही बड़ी संख्या में लोगों ने देश में बढ़ रही ईंधन की कीमतों को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।
ईरान पर बड़े सैन्य हमलों के विकल्प और गहराता वैश्विक ऊर्जा संकट
विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप के सामने इस समय बहुत सीमित और जोखिम भरे विकल्प ही बचे हैं। पेंटागन और व्हाइट हाउस के सामने मौजूदा सैन्य कार्रवाई को और अधिक तीव्र करने, ईरान के तेल निर्यात पर पूरी तरह नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) जारी रखने, उसके परमाणु कार्यक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण ठिकानों पर लक्षित हमले करने या फिर ईरानी बुनियादी ढांचे को तहस-नहस करने के विकल्प मौजूद हैं।
परंतु इन तमाम आक्रामक विकल्पों के साथ सबसे बड़ा खतरा यह जुड़ा हुआ है कि यदि ईरान पर और अधिक बड़े सैन्य हमले किए जाते हैं, तो इससे पूरी दुनिया में एक विकराल वैश्विक ऊर्जा संकट (Global Energy Crisis) गहरा सकता है। कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने से दुनिया भर के बाजारों में अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है, जिसका सीधा असर अमेरिका के घरेलू बाजार और आम जनता की जेब पर पड़ेगा। यही वजह है कि राजनीतिक दबाव के चलते ट्रंप प्रशासन के लिए अब कोई भी नया सैन्य कदम उठाना तलवार की धार पर चलने जैसा हो गया है।
ईरानी कमांडर इस्माइल गानी की अमेरिका को खुली चेतावनी, जलडमरूमध्य पर मंडराया खतरा
एक तरफ जहां अमेरिका घरेलू और राजनीतिक मोर्चे पर दबाव का सामना कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ तेहरान की तरफ से भी आक्रामक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। हाल ही में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कुद्स फोर्स के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल इस्माइल गानी (Esmail Gani) ने अमेरिका को बेहद कड़ी चेतावनी दी है।
ईरानी कमांडर ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि वाशिंगटन प्रशासन ने इस युद्ध में किसी भी प्रकार का 'जुआ खेलने जैसी हरकतें' या दुस्साहस जारी रखा, तो अमेरिका को इसके बहुत गंभीर और विनाशकारी परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने विशेष रूप से रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों—होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और बाब-अल-मंदेब (Bab-el-Mandeb) का हवाला देते हुए अमेरिका को आगाह किया है कि इन दोनों रणनीतिक समुद्री रास्तों पर अमेरिकी जहाजों और वैश्विक व्यापार के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी की जा सकती हैं।
इन तमाम जटिल परिस्थितियों के बीच, घरेलू चुनावों में हार, जनता का बढ़ता आक्रोश, कूटनीतिक रास्तों के बंद होने के संकेत और ईरान की तरफ से मिल रही सैन्य धमकियों ने मिलकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राह को बेहद कठिन बना दिया है। आने वाले दिनों में देखना यह होगा कि व्हाइट हाउस इस भू-राजनीतिक दलदल से बाहर निकलने के लिए कौन सा नया कूटनीतिक या रणनीतिक रास्ता अख्तियार करता है।
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