
बदलते वक्त के साथ दुनिया भर में फैशन के मायने तेजी से बदल रहे हैं। अक्सर पुरुष, महिलाओं के कपड़ों या यूनिसेक्स स्टाइल को अपनाते दिखते थे, लेकिन इस समय चीन (China) में एक बिल्कुल उल्टा और बेहद अनोखा फैशन ट्रेंड आग की तरह फैल रहा है। यहां की युवा महिलाएं अब महिलाओं के पारंपरिक और ट्रेंडी कपड़ों को छोड़कर पुरुषों के कपड़े (Menswear) जैसे शर्ट, ढीली टी-शर्ट, ट्राउजर और शॉर्ट्स को अपनी अलमारी का हिस्सा बना रही हैं।
शंघाई की रहने वाली केक्सिन जैसी लाखों चीनी युवतियां अब अपने बॉयफ्रेंड या पिता के लिए नहीं, बल्कि खुद पहनने के लिए मेन्सवियर की धड़ल्ले से शॉपिंग कर रही हैं। सोशल मीडिया से लेकर बाजारों तक फैले इस ट्रेंड ने फैशन पंडितों और कपड़ा उद्योग को सोचने पर मजबूर कर दिया है। आइए गहराई से समझते हैं कि आखिर चीनी महिलाओं के बीच पुरुषों के कपड़े पहनने का यह 'सीक्रेट' क्रेज क्यों चल पड़ा है।
सोशल मीडिया पर 'जेंडर-न्यूट्रल' और 'मेन्सवियर' का महा-विस्फोट
चीन के सबसे लोकप्रिय लाइफस्टाइल और सोशल मीडिया ऐप शाओहोंग्शु (Xiaohongshu), जिसे वैश्विक स्तर पर 'रेडनोट' (Rednote) भी कहा जाता है, पर महिलाओं द्वारा पुरुषों के कपड़े पहनने वाले वीडियो और पोस्ट्स की बाढ़ आ गई है। आंकड़ों के मुताबिक, ऐप पर 'महिलाएं पुरुषों के कपड़े पहन रही हैं' टैग को अब तक 8 करोड़ (80 मिलियन) से ज्यादा बार देखा जा चुका है।
इसके साथ ही, 'जेंडर-न्यूट्रल ड्रेसिंग' (Gender-Neutral Dressing) टैग भी 9 करोड़ के जादुई आंकड़े को पार कर चुका है। इन पोस्ट्स में लड़कियां पुरुषों के कपड़ों के अनगिनत फायदे गिना रही हैं— जैसे बेहतर कॉटन और लिनेन का इस्तेमाल, साफ और सिंपल कट्स, शरीर को आराम देने वाली मुलायम सिलाई, मजबूत फिनिशिंग और सबसे महत्वपूर्ण बात, बेहद कम दाम।
लाइवस्ट्रीम की वो एक लाइन, जिसने बदल दी केक्सिन की सोच
शंघाई में काम करने वाली केक्सिन बताती हैं कि उनकी अलमारी में यह क्रांतिकारी बदलाव साल 2023 में शुरू हुआ। उस दौरान उनके चीनी सोशल मीडिया फ़ीड पर पुरुषों की टी-शर्ट बेचने वाले लाइवस्ट्रीम (Live Selling) वीडियोज बार-बार आने लगे। शुरुआत में उन्हें लगा कि एल्गोरिदम की किसी गड़बड़ी की वजह से उन्हें पुरुषों के कपड़े दिखाए जा रहे हैं, क्योंकि वह किसी पुरुष के लिए शॉपिंग नहीं कर रही थीं।
लेकिन एक दिन उन्होंने लाइवस्ट्रीम को ध्यान से सुना, जिसमें होस्ट बार-बार चिल्लाकर कह रहा था— "लड़कियां इसे छोटे साइज (Small Size) में खरीदकर खुद पहन सकती हैं… यह पूरी तरह यूनिसेक्स है!" महिलाओं को टारगेट करने वाले आम लाइवस्ट्रीम में अक्सर 'स्लिम' दिखने और चुस्त कपड़े पहनने का दबाव होता है, लेकिन इस लाइवस्ट्रीम में कपड़े की क्वालिटी, थिकनेस (मोटाई) और मटेरियल पर फोकस था।
केक्सिन ने जोखिम कम देखते हुए 100 युआन (लगभग ₹1325) से कम की एक मेन्स टी-शर्ट ऑर्डर कर दी। जब पार्सल आया, तो वह हैरान रह गईं। वह टी-शर्ट महिलाओं की महंगी टी-शर्ट्स के मुकाबले कहीं ज्यादा आरामदायक, मोटी, हवादार और टिकाऊ थी, जबकि उसकी कीमत महिलाओं के कपड़ों से एक-तिहाई (One-Third) ही थी। इसके बाद केक्सिन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज उनकी अलमारी पुरुषों के कपड़ों से पटी पड़ी है।
वजह 1: '996' वर्किंग कल्चर और आर्थिक मंदी (रिवर्स कन्ज़म्प्शन)
इस ट्रेंड के पीछे चीन की मौजूदा कमजोर उपभोक्ता अर्थव्यवस्था (Consumer Economy) और कोविड-19 के बाद बदला हुआ माहौल भी एक बड़ी वजह है। चीन के बड़े शहरों में युवा '996' शेड्यूल (हफ्ते में 6 दिन, सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक काम) पर काम करते हैं। इस अत्यधिक थका देने वाले वर्क कल्चर में महिलाएं ऐसे कपड़े चाहती हैं जो आरामदायक हों, न कि शरीर को कसने वाले।
आर्थिक सतर्कता के इस दौर में उपभोक्ताओं ने फास्ट फैशन (तेजी से बदलने वाले फैशन) को छोड़कर 'रिवर्स कन्ज़म्प्शन' (Reverse Consumption) ट्रेंड अपनाया है, यानी कम खर्च में ज्यादा टिकाऊ चीजें खरीदना। केक्सिन कहती हैं, "अब मुझे महिलाओं के महंगे कपड़ों पर फालतू खर्च करने का कोई तुक नहीं दिखता। पुरुषों के कपड़े सस्ते होते हैं और कई सीजन तक बिना फटे चलते हैं।"
वजह 2: महिलाओं के कपड़ों में 'चाइल्ड-साइज़' और बॉडी शेमिंग का झोल
इस बदलाव की दूसरी सबसे व्यावहारिक और बड़ी वजह है चीन में महिलाओं के कपड़ों की 'साइजिंग' (Sizing System)। चीनी सोशल मीडिया जैसे डूईन (Douyin) पर इन्फ्लुएंसर्स अक्सर दिखाते हैं कि महिलाओं के कपड़ों में 'XL' (एक्स्ट्रा लार्ज) लिखा हुआ टॉप भी इतना छोटा होता है कि वह मुश्किल से किसी पतली लड़की को फिट आता है। एक वायरल वीडियो में तो एक ब्लॉगर ने महिलाओं का 'L' साइज का टॉप अपने पूडल (पालतू कुत्ते) को पहनाया और वह उसे बिल्कुल फिट आ गया।
इस भ्रामक साइजिंग सिस्टम की वजह से औसत और चौड़े कंधे वाली महिलाओं को जबरन 'प्लस साइज' की श्रेणी में धकेल दिया जाता है, जो एक तरह की मानसिक बॉडी शेमिंग (शरीर को लेकर शर्मिंदगी) है। शंघाई की एक 170 सेमी लंबी वकील 'ली' बताती हैं कि चीन में महिलाओं के कपड़े उनके जैसे सामान्य और मजबूत शरीर के लिए बने ही नहीं हैं। जब उन्होंने पुरुषों का 'M' (मीडियम) साइज पहनना शुरू किया, तो उन्हें पहली बार कपड़ों में सही फिटिंग और सुकून का अहसास हुआ।
वजह 3: 'पुरुषों की पैंट' की वो बड़ी जेबें, जो महिलाओं के पास नहीं
वकील ली पुरुषों के कपड़ों की व्यावहारिकता (Practicality) की तरफ एक बहुत ही मजेदार और जरूरी इशारा करती हैं। वह कहती हैं, "पुरुषों की 'M' साइज की पैंट की जेबें इतनी बड़ी और गहरी होती हैं कि उनमें मैं अपना 11 इंच का टैबलेट और एक पूरी किताब आराम से रख सकती हूं, और इससे पैंट की फिटिंग पर कोई असर नहीं पड़ता। क्या महिलाओं की पैंट या जींस ऐसा कर सकती है? हमारे कपड़ों की जेब में एक लिपस्टिक या स्मार्टफोन रखने से भी वह भारी और अजीब लगने लगता है।" यह पॉकेट-इक्वालिटी (जेबों की समानता) भी महिलाओं को मेन्सवियर की तरफ खींच रही है।

वजह 4: कपड़ा उद्योग (Textile Industry) पर दबाव और घटती क्वालिटी
एक मध्यम आकार के चीनी फैशन ब्रांड की डिजाइनर 'वांग' के अनुसार, महिलाओं के कपड़ों की गिरती क्वालिटी के पीछे कपड़ा उद्योग का आर्थिक संकट है। साल 2023 में चीन के रिटेल क्लॉथिंग सेक्टर की ग्रोथ जहां 15% थी, वहीं साल 2024 में यह गिरकर महज 0.1% रह गई है।
लागत बचाने के लिए कई चीनी ब्रांड्स अब खुद रिसर्च करने के बजाय दक्षिण-पूर्व एशिया से सस्ते और रेडीमेड पैटर्न खरीद रहे हैं, जो चीनी महिलाओं के शरीर की बनावट पर फिट नहीं बैठते। इसके अलावा, पतले और छोटे साइज के कपड़े बनाना निर्माताओं के लिए सस्ता पड़ता है, क्योंकि उसमें कपड़ा कम लगता है और सिलाई जटिल नहीं होती। वांग चेतावनी देती हैं कि आने वाले समय में लागत बढ़ने के कारण महिलाओं के कपड़े और भी पतले और असुविधाजनक हो सकते हैं। यही वजह है कि समझदार चीनी युवतियां अब पूरी तरह पुरुषों के मजबूत और आरामदायक वॉर्डरोब की तरफ शिफ्ट हो रही हैं।
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