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असम में बाढ़ से भारी तबाही: मौतों का आंकड़ा 68 पहुंचा, 5 जिलों के 5.24 लाख लोग अब भी बेघर, सेना और NDRF का रेस्क्यू जारी

पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख राज्य असम इस समय कुदरत की भारी मार झेल रहा है। हालांकि, रविवार (26 जुलाई) को जारी आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक असम में बाढ़ की स्थिति में आंशिक सुधार देखा गया है, लेकिन इसके बावजूद दो और मासूमों की जान चली गई। इसके साथ ही इस मानसून सीज़न में बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 68 तक पहुंच गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, राज्य के 5 जिलों में 5.24 लाख (5,24,700) से ज्यादा लोग अब भी बाढ़ के गंदे पानी के बीच जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

चराइदेव जिले में सबसे ज्यादा तबाही, 2 लोगों की डूबने से मौत

ASDMA द्वारा देर रात जारी बुलेटिन के मुताबिक, पिछले 24 घंटों के दौरान चराइदेव जिले में बाढ़ के पानी में डूबने से दो लोगों की मौत हो गई। इस त्रासदी में सबसे ज्यादा प्रभावित भी चराइदेव जिला ही हुआ है, जहां करीब 1.9 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हैं। इसके बाद शिवसागर जिले का नंबर आता है, जहां 1.5 लाख से अधिक लोग और जोरहाट में लगभग 1.4 लाख लोग बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। इनके अलावा गोलाघाट और नागांव जिलों में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि शनिवार के मुकाबले (जब 6 जिलों में 6.55 लाख लोग प्रभावित थे) कुल प्रभावितों की संख्या में कुछ कमी आई है।

राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर 37 हजार से अधिक लोग

बाढ़ के तांडव को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। चार सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में प्रशासन की ओर से 354 राहत शिविर (Relief Camps) और राहत वितरण केंद्र चलाए जा रहे हैं। इन शिविरों में वर्तमान में 37,724 विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं, जिन्हें भोजन, साफ पानी और दवाइयां मुहैया कराई जा रही हैं।

सेना और NDRF का मोर्चा, 763 गांव पानी में डूबे

ऊपरी असम के संवेदनशील और दूर-दराज के इलाकों में भारतीय सेना (Indian Army), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), फायर एंड इमरजेंसी सर्विस और असम पुलिस की संयुक्त टीमें राहत और बचाव अभियानों में जुटी हुई हैं। ASDMA के अनुसार, वर्तमान में राज्य के 763 गांव पूरी तरह से जलमग्न हैं, जबकि 48,742 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि में लगी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं।

धनसिरी नदी खतरे के निशान के पार, इन्फ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान

बाढ़ के प्रचंड वेग के कारण राज्य के कई जिलों में तटबंध (Embankments), सड़कें, पुल और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी (Dhansiri River) अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जो आसपास के इलाकों के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है। इंसानों के साथ-साथ इस प्राकृतिक आपदा की गाज बेजुबानों पर भी गिरी है—असम भर में 88,240 से अधिक पालतू मवेशी और मुर्गियां भी इस भयावह बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।