
News India Live, Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष को थामने के लिए अब अमेरिका एक ऐसे रास्ते पर चलने की तैयारी कर रहा है, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। ताजा कूटनीतिक हलचलों के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) जल्द ही पाकिस्तान का दौरा कर सकते हैं। इस संभावित दौरे का मुख्य उद्देश्य ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए ‘मध्यस्थ’ की तलाश करना बताया जा रहा है। अमेरिका का यह कदम दक्षिण एशिया और खाड़ी देशों की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।मध्यस्थ की भूमिका में पाकिस्तान? अमेरिका की मजबूरी या रणनीतिसूत्रों के मुताबिक, बाइडन प्रशासन को लगता है कि ईरान के साथ पाकिस्तान के ऐतिहासिक और धार्मिक संबंधों का इस्तेमाल तनाव कम करने के लिए किया जा सकता है। जेडी वेंस का यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के दिनों में पाकिस्तान और ईरान के बीच रिश्तों में जमी बर्फ पिघली है। अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर तेहरान को इजरायल पर सीधे हमले करने से रोके। हालांकि, पाकिस्तान खुद आर्थिक संकट से जूझ रहा है, ऐसे में उसकी मध्यस्थता कितनी प्रभावी होगी, यह बड़ा सवाल है।जेडी वेंस का दौरा और भारत की नजरअमेरिकी उपराष्ट्रपति के इस संभावित दौरे ने नई दिल्ली में भी कान खड़े कर दिए हैं। भारत हमेशा से ही क्षेत्र में शांति का पक्षधर रहा है, लेकिन पाकिस्तान के जरिए अमेरिका की इस नई ‘शांति वार्ता’ को भारत संदेह की दृष्टि से देख सकता है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जेडी वेंस इस दौरे के जरिए पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर भी सख्त संदेश दे सकते हैं, ताकि शांति वार्ता के नाम पर कोई नई साजिश न रची जाए।होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक दबावइस दौरे के पीछे एक बड़ा कारण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) का सुरक्षित रहना भी है। अगर ईरान इस रास्ते को बंद करता है, तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भारी चपत लग सकती है। जेडी वेंस के एजेंडे में यह सुनिश्चित करना शामिल होगा कि पाकिस्तान ईरान को समझाए कि वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधा डालना खुद ईरान के लिए भी घातक होगा। अमेरिका इस समय चौतरफा दबाव में है और वह किसी भी कीमत पर खाड़ी में एक पूर्ण विकसित युद्ध (Full-scale War) को टालना चाहता है।क्या सफल होगी यह कूटनीतिक पहल?पाकिस्तान के लिए यह दौरा किसी ‘लाइफलाइन’ से कम नहीं है। अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने और अपनी अंतरराष्ट्रीय साख बचाने के लिए शहबाज शरीफ सरकार जेडी वेंस के स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहेगी। हालांकि, इजरायल के कड़े रुख और ईरान की जवाबी कार्रवाई की धमकियों के बीच, क्या जेडी वेंस खाली हाथ लौटेंगे या कोई ठोस समाधान निकाल पाएंगे, यह तो वक्त ही बताएगा।
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