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‘ईरान के पास न सेना बची न नेवी’: रूस की मदद पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, वाशिंगटन पहुंचे इजराइली PM नेतन्याहू

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के एक सनसनीखेज दावे से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है। जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूस मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिकी ठिकानों और संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए ईरान को सैटेलाइट सर्विलांस (उपग्रह निगरानी) का डेटा देकर मदद पहुंचा रहा है। इस गंभीर दावे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया सामने आई है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वे इस बात की जांच करेंगे कि इस दावे में कितनी सच्चाई है और वे इस मुद्दे पर सीधे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे।

हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर रूस ने ईरान की किसी भी तरह मदद की भी है, तो उसका युद्ध के मैदान पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए ट्रंप ने कहा कि रूस ने वेनेजुएला को भी बड़ी संख्या में सैन्य उपकरण दिए थे और वहां के पास रूस निर्मित सारे हथियार थे, लेकिन उसका नतीजा सभी के सामने है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ने ईरान को इस युद्ध में बुरी तरह पछाड़ा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ईरान के पास न तो कोई मजबूत सेना बची है, न एयर फोर्स और न ही नेवी। ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि रूस बड़े पैमाने पर ऐसी कोई मदद कर रहा है और अगर ऐसा हुआ भी है, तो उसका कोई असर नहीं दिखा है।

वाशिंगटन में आज मिलेंगे ट्रंप और नेतन्याहू, परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने पर होगी चर्चा

इस कूटनीतिक हलचल के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू आज वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से एक महत्वपूर्ण मुलाकात करने जा रहे हैं। यह बैठक ऐसे मोड़ पर हो रही है जब अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान पर अपने हवाई हमले रोके रखे हैं, और जवाब में तेहरान ने भी अपनी ओर से सैन्य कार्रवाइयों को फिलहाल थामने की बात कही है। इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि वे ट्रंप के उन तमाम प्रयासों का पूरी तरह से समर्थन करते हैं, जिनका उद्देश्य ईरान को रणनीतिक रूप से कमजोर करना और उसके परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना है।

नेतन्याहू ने कहा कि यदि बिना किसी बड़े और लंबे सैन्य संघर्ष के ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने का लक्ष्य हासिल हो जाता है, तो इसमें कोई बुराई नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि वे ट्रंप के सामने कोई नई शर्त या जानकारी रखने के बजाय अपने करीबी सहयोगी ट्रंप की भावी योजनाओं को सुनेंगे और समझेंगे, क्योंकि अंतिम फैसला अमेरिकी नेतृत्व का ही होगा। हालांकि, नेतन्याहू ने तेहरान को सख्त चेतावनी भी दी कि अगर उसने प्रत्यक्ष रूप से या अपने सहयोगी गुटों के जरिए इजराइल पर दोबारा हमला करने की हिमाकत की, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल साबित होगी।

ओमान की मध्यस्थता और सीजफायर की कोशिशें, अमेरिका ने मिसाइलों की कमी से किया इनकार

वर्तमान में दोनों देशों को एक अंतरिम युद्धविराम (Interim Ceasefire) समझौते के तहत वार्ता की मेज पर लाने के कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज ने जानकारी दी कि राष्ट्रपति ट्रंप कूटनीति को थोड़ा और समय देना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों से, और विशेष रूप से बीते कुछ दिनों में, ओमान की मध्यस्थता के जरिए अमेरिका, ईरान और अन्य वार्ताकारों के बीच शीर्ष स्तर से लेकर तकनीकी स्तर तक लगातार बातचीत जारी है।

माइक वाल्ट्ज ने उन आशंकाओं और मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि ईरानी हमलों से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली अमेरिकी इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक खत्म हो रहा है। हालांकि, स्वतंत्र रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान दोनों ही पक्षों के लिए इतने बड़े पैमाने पर लंबे समय तक सैन्य अभियानों को जारी रखना व्यावहारिक रूप से काफी कठिन होगा।

अयातुल्ला खामेनेई की मौत और लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान

गौरतलब है कि ट्रंप और नेतन्याहू की इससे पिछली आधिकारिक मुलाकात फरवरी में हुई थी, जिसके कुछ ही हफ्तों बाद ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान शुरू हो गया था। इस भीषण युद्ध के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई शीर्ष ईरानी नेता और सैन्य कमांडर मारे गए थे। युद्ध की शुरुआत के तुरंत बाद ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह ने भी इजराइल पर हमले शुरू कर दिए थे, जिसके जवाब में इजराइली रक्षा बलों ने दक्षिणी लेबनान में जोरदार हवाई हमले और जमीनी कार्रवाई की थी। वर्तमान में अमेरिका, लेबनान और इजराइल के बीच प्रत्यक्ष वार्ता का समर्थन कर रहा है, ताकि सीमा पर तनाव कम किया जा सके और हिजबुल्लाह को पूरी तरह निरस्त्र करने का रास्ता निकाला जा सके।