
बिहार की सियासत से इस वक्त एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने सूबे के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की कद्दावर नेता राबड़ी देवी को आवंटित सरकारी आवास को खाली करने की तय समयसीमा आज समाप्त हो रही है। इस डेडलाइन के नजदीक आते ही पटना के वीआईपी सुरक्षा क्षेत्र से लेकर राजनीतिक दलों के दफ्तरों तक सिर्फ इसी बात की चर्चा है कि क्या राबड़ी देवी आज अपना बंगला खाली कर देंगी या फिर इस मुद्दे पर नीतीश सरकार और आरजेडी के बीच एक नया और बड़ा राजनीतिक टकराव देखने को मिलेगा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासनिक अमला भी पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रहा है।
आवास खाली करने के नोटिस से आरजेडी खेमे में भारी नाराजगी भवन निर्माण विभाग द्वारा जारी किए गए इस बेदखली नोटिस के बाद से ही राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं में राज्य सरकार के प्रति भारी आक्रोश देखा जा रहा है। आरजेडी के वरिष्ठ प्रवक्ताओं का तर्क है कि राबड़ी देवी बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ वर्तमान में विधान परिषद की सदस्य भी हैं और सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी उन्हें इस श्रेणी के आवास की आवश्यकता है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सरकार जानबूझकर राजनीतिक द्वेष के तहत लालू परिवार को परेशान करने के लिए इस तरह के कदम उठा रही है। इस नोटिस को लेकर लालू-राबड़ी आवास पर वरिष्ठ वकीलों और रणनीतिकारों की एक आपात बैठक भी बुलाई गई है।
नीतीश सरकार की सख्त रणनीति और प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ दल और प्रशासनिक अधिकारियों का रुख इस मामले पर बेहद सख्त नजर आ रहा है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, नियमों के दायरे में रहकर ही यह कार्रवाई की जा रही है और समयसीमा समाप्त होने के बाद किसी भी तरह की अतिरिक्त मोहलत देने का प्रावधान नहीं है। यदि आज शाम तक आवास को स्वेच्छा से खाली नहीं किया जाता है, तो विभाग कानून के मुताबिक अगली प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर सकता है। जेडीयू और बीजेपी के नेताओं का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है, चाहे वह कोई आम नागरिक हो या किसी बड़े राजनीतिक दल का शीर्ष नेता।
पटना के सबसे हाई-प्रोफाइल बंगले से जुड़ी हैं कई ऐतिहासिक यादें यह सरकारी आवास केवल एक इमारत नहीं है, बल्कि पिछले कई दशकों से बिहार की सत्ता और राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र रहा है। इसी बंगले से बिहार की कई सरकारें बनीं और बिगड़ी हैं, और देश के कई बड़े राजनेताओं का यहां आना-जाना रहा है। ऐसे में इस बंगले को खाली कराए जाने की खबरों ने आरजेडी के जमीनी कार्यकर्ताओं को भावुक और आक्रोशित कर दिया है। पटना के इस वीआईपी इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया गया है और किसी भी संभावित विरोध-प्रदर्शन से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जा रही है।
विवाद बढ़ने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है लालू परिवार राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह मामला इतनी आसानी से शांत होने वाला नहीं है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, राबड़ी देवी की कानूनी टीम इस बेदखली नोटिस के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर सकती है, जिसमें आवास खाली करने के आदेश पर अंतरिम रोक (Stay Order) लगाने की मांग की जा सकती है। यदि अदालत की तरफ से इस मामले में कोई राहत मिलती है, तो सरकार के कदम पीछे खिंच सकते हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आज शाम तक लालू परिवार क्या कदम उठाता है और बिहार की यह नई सियासी जंग क्या मोड़ लेती है।
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