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क्या सिर्फ 2 दिन पीरियड आना है नॉर्मल? जानिए कम ब्लीडिंग के पीछे की वजह

महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों में मासिक धर्म यानी पीरियड्स (Periods) की नियमितता और उसका चक्र सबसे बड़ा पैमाना माना जाता है। अमूल्य शारीरिक स्वास्थ्य और हार्मोनल संतुलन को दर्शाने वाले इस प्राकृतिक चक्र को लेकर महिलाओं के मन में अक्सर कई तरह की शंकाएं बनी रहती हैं। आमतौर पर एक सामान्य महिला का पीरियड्स तीन से सात दिन तक रहता है, जिसमें ब्लीडिंग की मात्रा भी एक निर्धारित औसत में होती है। लेकिन इन दिनों आधुनिक जीवनशैली, तनाव, हॉर्मोनल असंतुलन और गलत खानपान के कारण कई युवतियों और महिलाओं में यह शिकायत आम देखने को मिल रही है कि उनके पीरियड्स केवल एक या दो दिन में ही बहुत कम ब्लीडिंग के साथ खत्म हो जाते हैं। सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ दो दिन तक पीरियड आना और बहुत हल्की ब्लीडिंग होना पूरी तरह नॉर्मल है या यह शरीर के भीतर पल रही किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का शुरुआती संकेत है? देश के जाने-माने स्त्री रोग विशेषज्ञों (Gynecologists) का कहना है कि हर महिला का शरीर अलग होता है, लेकिन यदि अचानक आपके ब्लीडिंग के पैटर्न में बड़ा बदलाव आया है और यह हर महीने की बात बन गई है, तो इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। आइए आज विस्तार से जानते हैं कि कम ब्लीडिंग के पीछे के चिकित्सीय कारण क्या हैं और आपको किस स्थिति में डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

मेडिकल साइंस की नजर में क्या है सामान्य पीरियड और किसे कहते हैं हाइपोमेनोरिया?

चिकित्सकीय भाषा में यदि किसी महिला को पीरियड्स के दौरान बहुत कम रक्तस्राव होता है या उसकी अवधि दो दिन से भी कम समय में समाप्त हो जाती है, तो इस मेडिकल कंडीशन को 'हाइपोमेनोरिया' (Hypomenorrhea) कहा जाता है। एक सामान्य चक्र में महिला का शरीर लगभग 30 से 80 मिलीलीटर तक ब्लड डिस्चार्ज करता है। यदि ब्लीडिंग इतनी कम होती है कि पूरे दिन में बमुश्किल एक या दो पैड बदलने की जरूरत पड़े या केवल कुछ धब्बे (Spotting) दिखकर ही पीरियड बंद हो जाए, तो इसे सामान्य नहीं माना जा सकता। हालांकि, कुछ मामलों में यह आनुवंशिक (Genetics) भी हो सकता है कि परिवार में महिलाओं का चक्र ऐसा ही रहा हो, लेकिन यदि यह समस्या अचानक शुरू हुई है, तो इसका मतलब है कि गर्भाशय या हार्मोनल स्तर पर कुछ गड़बड़ चल रही है।

कम ब्लीडिंग और छोटे पीरियड चक्र के पीछे छिपे होते हैं ये प्रमुख चिकित्सीय कारण

स्त्री रोग विशेषज्ञों के अनुसार, पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग कम होने या समय से पहले बंद हो जाने के पीछे कई तरह के शारीरिक और आंतरिक कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  • हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance): शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर असंतुलित होने पर गर्भाशय की परत (Endometrium) पर्याप्त रूप से मोटी नहीं हो पाती, जिसके कारण ब्लीडिंग बहुत कम होती है।

  • पीसीओएस या पीसीओडी (PCOS/PCOD): आज की युवा युवतियों में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम एक आम समस्या बन चुकी है, जिसमें ओवरी में सिस्ट बनने के कारण हॉर्मोन बिगड़ जाते हैं और पीरियड्स अनियमित या बहुत कम हो जाते हैं।

  • थायरॉइड की समस्या: हाइपोथायरायडिज्म या हाइपरथायरायडिज्म जैसी थायरॉइड से जुड़ी बीमारियां भी मासिक धर्म के चक्र को सीधा प्रभावित करती हैं और ब्लीडिंग कम कर देती हैं।

  • तनाव और अत्यधिक वजन घटना: मानसिक तनाव (Stress), एंग्जायटी या बहुत तेजी से क्रैश डाइट के जरिए वजन घटाने से शरीर में न्यूट्रिएंट्स की कमी हो जाती है, जिससे हॉर्मोन का निर्माण प्रभावित होता है।

  • बढ़ती उम्र और प्री-मेनोपॉज: जिन महिलाओं की उम्र 40 वर्ष के आसपास या उससे अधिक होती है, उनके शरीर में मेनोपॉज (Menopause) के लक्षण शुरू होने लगते हैं, जिससे भी ब्लीडिंग धीरे-धीरे कम होने लगती है।

कब होना चाहिए गंभीर रूप से सतर्क और डॉक्टर के पास कब जाना जरूरी है?

यदि आपको कभी-कभार किसी महीने यात्रा, अधिक तनाव या मौसम बदलने के कारण दो दिन का पीरियड आ जाता है, तो यह सामान्य हो सकता है और अगले महीने यह ठीक हो जाता है। लेकिन यदि पिछले 3 से 6 महीनों से लगातार आपके पीरियड्स सिर्फ एक या दो दिन ही चल रहे हैं और साथ ही आपको गर्भधारण करने में परेशानी आ रही है, वजन तेजी से बढ़ रहा है, चेहरे पर अनचाहे बाल उग रहे हैं, या अत्यधिक थकान महसूस हो रही है, तो आपको तुरंत किसी अच्छे स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर अपनी सोनोग्राफी (Ultrasound) और हॉर्मोन प्रोफाइल की जांच करवानी चाहिए। समय रहते इन संकेतों को पहचानकर इलाज करवाने से भविष्य में फर्टिलिटी से जुड़ी बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।