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खेती बढ़ी पर ताकत घटी ICRIER की रिपोर्ट का चौंकाने वाला खुलासा मिट्टी बीमार है, तो हम स्वस्थ कैसे रहेंगे?

News India Live, Digital Desk : हाल ही में आई ICRIER (इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस) की एक रिपोर्ट ने हमारी सेहत को लेकर एक बहुत बड़ी चिंता जाहिर की है। रिपोर्ट का कहना है कि भारत ने ‘खाद्य सुरक्षा’ (Food Security) के मामले में तो बाजी मार ली है यानी आज हमारे पास खाने के लिए अनाज की कोई कमी नहीं है लेकिन ‘पोषण’ के मामले में हम पिछड़ रहे हैं। और इसकी सबसे बड़ी वजह है हमारी मिट्टी (Soil) का बीमार होना।पेट तो भर रहा है, लेकिन शरीर को कुछ मिल नहीं रहा!इसे रिपोर्ट में ‘हिडन हंगर’ (Hidden Hunger) यानी ‘छिपी हुई भूख’ कहा गया है। इसका मतलब है कि आप दिन भर में भरपेट खाना तो खा रहे हैं, लेकिन उस खाने में वो ज़रूरी विटामिन्स और मिनरल्स (जैसे जिंक, आयरन और मैग्नीशियम) नहीं हैं, जिनकी आपके शरीर को ज़रूरत है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि जिस मिट्टी में ये फसलें उग रही हैं, वो मिट्टी खुद इन पोषक तत्वों से खाली हो चुकी है।बच्चों और महिलाओं पर पड़ रहा है सीधा असररिपोर्ट के मुताबिक, मिट्टी की खराब सेहत का सबसे ज्यादा नुकसान हमारी महिलाओं और बच्चों को उठाना पड़ रहा है। आयरन की कमी से होने वाला ‘अनीमिया’ और बच्चों की ‘रुकती ग्रोथ’ (Stunting) के पीछे एक बड़ा कारण वही अनाज है, जिसमें पोषण का नामोनिशान कम होता जा रहा है। जब माँ के शरीर को मिट्टी से उपजा सही पोषण नहीं मिलेगा, तो आने वाली पीढ़ी कैसे मजबूत होगी?कहाँ हो गई हमसे गलती?सालों से ज्यादा पैदावार की होड़ में हमने मिट्टी में जमकर यूरिया और कीटनाशकों (Chemicals) का इस्तेमाल किया। नतीजा ये हुआ कि ज़मीन ने फसलें तो भर-भर कर दीं, लेकिन अपनी प्राकृतिक उपजाऊ शक्ति और सूक्ष्म पोषक तत्व खो दिए। अब हाल ये है कि हमारे पास गेंहू-चावल के गोदाम तो भरे हैं, लेकिन उन दानों के अंदर वो ताकत नहीं रही जो हमारे पुरखों के समय हुआ करती थी।अब आगे क्या? रास्ता क्या है?ICRIER की यह रिपोर्ट सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि हमारे लिए जागने का समय है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब समय आ गया है जब हमें ‘ज़्यादा अनाज’ उगाने के बजाय ‘अच्छा अनाज’ उगाने पर ध्यान देना होगा। हमें अपनी मिट्टी की सेहत (Soil Health) सुधारने के लिए जैविक खाद, माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स का सही इस्तेमाल और खेती के पुराने, प्राकृतिक तरीकों की ओर वापस लौटना होगा।हमारी जिम्मेदारी:हम सिर्फ सरकार या किसानों के भरोसे नहीं रह सकते। एक ग्राहक के तौर पर हमें यह समझना होगा कि हर ‘चमकदार और बड़ी’ दिखने वाली सब्जी सेहतमंद नहीं होती। मिट्टी से हमारा रिश्ता जितना मजबूत और साफ होगा, हमारी सेहत भी उतनी ही निखरेगी।आपकी क्या राय है?क्या आपको भी लगता है कि हमें अब उत्पादन (Quantity) से ज़्यादा पोषण (Quality) की चिंता करनी चाहिए? क्या आपके पास भी पुराने ज़माने के स्वाद या पोषण से जुड़ी कोई कहानी है? कमेंट्स में हमारे साथ साझा करें।