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जब राहुल गांधी एक मोची के लिए बन गए थे मसीहा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था

News India Live, Digital Desk: सुल्तानपुर से एक दिल को छू लेने वाली लेकिन दुखद खबर सामने आई है. यहां के रहने वाले रामचेत मोची का निधन हो गया है. रामचेत वही शख्स हैं, जिनसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान मिले थे और उनकी बीमारी का इलाज करवा रहे थे. इलाज के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका.एक मुलाकात जो यादगार बन गईयह पूरा वाकया इसी साल फरवरी का है, जब राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ सुल्तानपुर पहुंची थी. यहां कांग्रेस दफ्तर के पास ही रामचेत मोची पिछले 40-50 सालों से जूते-चप्पल सिलने का काम करते थे. यात्रा के दौरान राहुल गांधी की नजर उन पर पड़ी और वह खुद को रोक नहीं पाए. वह सीधे रामचेत के पास पहुंचे और उनसे बातचीत करने लगे.बातचीत के दौरान राहुल गांधी को पता चला कि रामचेत की तबीयत ठीक नहीं है और गले की किसी समस्या की वजह से उनकी आवाज भी साफ नहीं निकल रही है. गरीबी के कारण रामचेत अपना ठीक से इलाज नहीं करा पा रहे थे.राहुल गांधी ने उठाया था इलाज का पूरा जिम्मारामचेत की हालत देखकर राहुल गांधी ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया और उनके इलाज की पूरी जिम्मेदारी उठा ली. उन्होंने स्थानीय कांग्रेस नेताओं को निर्देश दिया कि रामचेत को लखनऊ के PGI अस्पताल में भर्ती कराया जाए. इसके बाद उनका इलाज शुरू हुआ. राहुल गांधी सिर्फ निर्देश देकर ही नहीं भूले, बल्कि वह फोन पर भी रामचेत और उनके परिवार से बात करके हाल-चाल लेते रहते थे.परिवार वालों ने बताया कि उनका इलाज लखनऊ के साथ-साथ दिल्ली में भी चल रहा था, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हो रहा था. आखिरकार, वह जिंदगी की जंग हार गए. रामचेत के निधन के बाद स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने उनके घर पहुंचकर शोक जताया. यह कहानी एक बड़े नेता और एक आम आदमी के बीच बने खूबसूरत रिश्ते की मिसाल बन गई है, जिसका अंत दुखद रहा.