
दिल्ली के बीचों-बीच,अजमेरी गेट से लेकर लाहौरी गेट के कोलाहल के पास एक ऐसी दुनिया है जिसका नाम अक्सर लोग फुसफुसाहटों में या बंद दरवाजों के पीछे लेते हैं – जीबी रोड. बाहर से देखने पर यह टूटी-फूटी इमारतों,उलझे हुए तारों और दुकानों की एक आम भीड़ भरी गली लग सकती है,लेकिन इन इमारतों के जर्जर दरवाजों के पीछे इंसानियत हर रोज सिसकती है. यह सिर्फ एक रेड लाइट एरिया नहीं,बल्कि अनगिनत टूटे सपनों,छीनी हुई पहचान और कभी न खत्म होने वाले दर्द की एक जीती-जागती कब्रगाह है.आज हम आपको इसकी उस सच्चाई से रूबरू कराएंगे जो शायद आपकी रूह कंपा दे.1.यहां ज्यादातर लड़कियां अपनी मर्जी से नहीं आतींयह सबसे बड़ा और सबसे कड़वा सच है. यहां के कोठों में कैद90%से ज्यादा लड़कियां और औरतें कभी अपनी मर्जी से इस दलदल में नहीं आईं. उन्हें यहां लाया गया है:धोखे से:प्यार,शादी या अच्छी नौकरी का झांसा देकर. किसी ने भरोसे का गला घोंटा,तो किसी को सपनों के सौदागरों ने बेच दिया.अपहरण करके:गांव,छोटे कस्बों या गरीब इलाकों से लड़कियों को उठाकर यहां बेच दिया जाता है,जहां से वापस जाने के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं.गरीबी और मजबूरी में:कई बार परिवार पर इतना कर्ज होता है या गरीबी इतनी होती है कि मां-बाप खुद अपनी बेटी को बेच देते हैं. उन्हें लगता है कि शायद शहर जाकर उनकी बेटी दो वक्त की रोटी कमा लेगी,लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि वे उसे एक जिंदा नर्क में धकेल रहे हैं.2.पहचान का कत्ल और नंबरों का खेलजैसे ही कोई लड़की इन कोठों की दहलीज पर कदम रखती है,सबसे पहले उसकी पहचान छीन ली जाती है. उसका नाम बदल दिया जाता है. उसे एक नंबर दे दिया जाता है. उसे सिखाया जाता है कि उसका अतीत मर चुका है और अब उसका जिस्म ही उसकी एकमात्र पहचान है. उसे अपने परिवार से संपर्क करने की इजाजत नहीं होती,और धीरे-धीरे वह अपनी असली दुनिया से पूरी तरह कट जाती है.3.हर दिन एक नया जख्म,कभी न भरने वाला दर्दयहां की जिंदगी का मतलब है हर पल हिंसा, गाली-गलौज और अपमान सहना. कोठा मालकिन,दलाल और ग्राहकों के हाथों होने वाली शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना उनकी आदत बन जाती है. न कहने का अधिकार उनसे छीन लिया जाता है. अगर वे बीमार हों या दर्द में,तब भी उन्हें काम करने पर मजबूर किया जाता है. उनका शरीर एक बेजान वस्तु बनकर रह जाता है,जिस पर किसी का कोई अधिकार नहीं,सिवाय उन लोगों के जो उसकी कीमत लगाते हैं.4.कर्ज का वो जाल,जिससे निकलना मौत से भी मुश्किलयहां लाई गई हर लड़की पर हजारों-लाखों का “कर्ज” चढ़ा दिया जाता है – यह उसके “खरीदने” की कीमत होती है. उसकी हर रात की कमाई का हिस्सा कोठा मालकिन रख लेती है,यह कहकर कि यह कर्ज चुकाने,खाने और रहने का खर्चा है. यह कर्ज कभी खत्म नहीं होता. वे अपनी पूरी जिंदगी कमाती रहती हैं,लेकिन उस काल्पनिक कर्ज से कभी आजाद नहीं हो पातीं. यह एक ऐसा चक्रव्यूह है,जिससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है.5.वो सपने जो हर रात आंखों में आकर टूट जाते हैंइस अंधेरे में भी कभी-कभी एक धुंधली सी उम्मीद की किरण जलती है. वे भी एक सामान्य जीवन का सपना देखती हैं – एक छोटा सा घर, इज्जत की जिंदगी,अपने बच्चों का भविष्य. कई औरतें अपने गांव में पल रहे बच्चों के लिए पैसे भेजती हैं,यह झूठ बोलकर कि वे शहर में किसी फैक्ट्री में काम करती हैं. वे खुद हर दिन मरती हैं, ताकि उनका परिवार जिंदा रह सके.
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