
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में स्थित महत्वाकांक्षी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी जेवर एयरपोर्ट एक बार फिर अपनी किसी बड़ी खूबी की वजह से नहीं, बल्कि बारिश के बाद हुए जलभराव के चलते सुर्खियों में आ गया है। हाल ही में भारी मानसूनी बारिश के बाद एयरपोर्ट के टर्मिनल और पार्किंग क्षेत्र को जोड़ने वाले मार्ग पर पानी भर गया, जिसके बाद सियासत गर्मा गई है। इस घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें पानी निकासी के लिए कर्मचारियों को मशक्कत करते हुए देखा जा सकता है। इसी वायरल वीडियो को आधार बनाते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक तीखा तंज कसा है। उनके इस बयान के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर विकास के दावों और प्रशासनिक पोल खोलने को लेकर बहस छिड़ गई है। आम जनता के बीच भी इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि करोड़ों-अरबों की लागत से तैयार होने वाले आधुनिक प्रोजेक्ट्स की ड्रेनेज व्यवस्था पहली ही बरसात में क्यों फेल हो जाती है।
जेवर एयरपोर्ट पर भारी बारिश के बाद जलभराव और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
इसी हफ्ते ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों में मूसलाधार बारिश हुई, जिसके चलते कई जगहों पर जलभराव की समस्याएं सामने आईं। इसी कड़ी में, इसी साल मार्च के महीने में उद्घाटित हुए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) के परिसर में भी भारी बारिश का असर देखने को मिला। टर्मिनल बिल्डिंग को पार्किंग एरिया से जोड़ने वाले सब-वे और रास्ते पर अचानक भारी मात्रा में पानी जमा हो गया। पानी भरने के कारण वहां से गुजरने वाले यात्रियों और वाहनों को कुछ समय के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस पूरी स्थिति का किसी ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया, जो देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गया। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि एयरपोर्ट जैसी हाई-टेक और आधुनिक सुविधा वाले परिसर में पानी भरा हुआ है और एयरपोर्ट के सुरक्षाकर्मी तथा अन्य कर्मचारी पानी को बाहर निकालने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद विपक्ष को सरकार को घेरने का एक और बड़ा मौका मिल गया है और लोग प्रोजेक्ट की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
अखिलेश यादव का तीखा तंज – "क्या अब एयरपोर्ट पर नावें चलेंगी?"
वायरल हो रहे इस वीडियो पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि क्या अब हवाई अड्डे पर नावें चलेंगी? इसके साथ ही उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि जहां-जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार होती है, वहां-वहां महा-भ्रष्टाचार देखने को मिलता है। अखिलेश यादव का यह बयान तेजी से वायरल हो गया और उनके समर्थकों ने भी इस पर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। उनका यह तंज इस बात की ओर इशारा करता है कि सरकार भले ही विकास के कितने भी दावे कर ले और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रोजेक्ट्स की कितनी भी तारीफ कर ले, लेकिन ज़मीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाएं और ड्रेनेज सिस्टम आज भी बारिश के आगे घुटने टेक देते हैं। राजनेता अक्सर ऐसे मुद्दों को जनहित से जोड़कर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग करते हैं, और जेवर एयरपोर्ट का यह मामला भी राजनीतिक तनातनी का एक नया केंद्र बन गया है।
एयरपोर्ट प्रशासन और सरकार का स्पष्टीकरण, 30 मिनट में पानी निकासी का दावा
दूसरी ओर, इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रबंधन और उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से आधिकारिक बयान जारी किया गया है। एयरपोर्ट अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि टर्मिनल और पार्किंग क्षेत्र को जोड़ने वाले मार्ग पर हुआ जलभराव पूरी तरह से अस्थायी था और यह अत्यधिक भारी बारिश के कारण अचानक हुई पानी की जमावट थी। प्रशासन का दावा है कि स्थिति की गंभीरता को समझते हुए एयरपोर्ट की टीमों ने तुरंत मोर्चा संभाला और महज 30 मिनट के भीतर पूरे पानी को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि पानी की निकासी के तुरंत बाद मार्ग पर यातायात और यात्रियों की आवाजाही को पूरी तरह से सामान्य कर दिया गया। इसके अलावा, एयरपोर्ट प्रबंधन ने यह भी साफ किया है कि इस मामूली सी रुकावट की वजह से फ्लाइट ऑपरेशंस यानी विमानों की आवाजाही या यात्रियों के आवागमन पर किसी भी प्रकार का कोई असर नहीं पड़ा है। सरकार का यह भी कहना है कि वे मौसम की स्थिति पर लगातार कड़ी नजर बनाए हुए हैं ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
इंफ्रास्ट्रक्चर और ड्रेनेज व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल और जनता की प्रतिक्रिया
भले ही एयरपोर्ट प्रशासन ने यह दावा किया हो कि पानी को आधे घंटे के भीतर निकाल दिया गया था, लेकिन इस घटना ने देश के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की इंजीनियरिंग और मास्टर प्लानिंग पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि जब अरबों रुपये खर्च करके अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले एयरपोर्ट बनाए जाते हैं, तो उनकी डिजाइनिंग में जल निकासी (Drainage System) को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि भारी बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी परिसर में एक बूंद पानी भी न टिक सके। जनता और सोशल मीडिया यूजर्स का एक वर्ग यह सवाल पूछ रहा है कि उद्घाटन के बाद यह पहली बड़ी मानसूनी परीक्षा थी और इसमें इस तरह की तस्वीरें सामने आना कहीं न कहीं लापरवाही की ओर इशारा करती हैं। हालांकि, सरकार और विकास कार्यों से जुड़े पक्ष का तर्क है कि प्रकृति के आगे कई बार अत्यधिक वर्षा के समय तात्कालिक दबाव बन जाता है, जिसे तुरंत दुरुस्त कर लिया गया। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशासन ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए भविष्य के लिए कोई पुख्ता और स्थायी तकनीकी समाधान निकाल पाता है या नहीं।
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