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टकर कार्लसन की चेतावनी: नेतन्याहू के दबाव में ईरान पर परमाणु हमले के करीब अमेरिका, क्या मंडरा रहा है तीसरे विश्व युद्ध का खतरा

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भू-राजनीतिक गलियारों से इस वक्त दुनिया को हिला देने वाली एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। अमेरिका के जाने-माने और प्रभावशाली मीडिया पर्सनालिटी, फॉक्स न्यूज के पूर्व होस्ट और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी रहे टकर कार्लसन (Tucker Carlson) ने एक बार फिर परमाणु युद्ध की आसन्न तबाही को लेकर बेहद डरावनी चेतावनी जारी की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किए गए अपने एक लंबे और विमर्श पैदा करने वाले बयान में कार्लसन ने दावा किया है कि वॉशिंगटन डीसी में कहीं एक गुप्त 'न्यूक्लियर क्लॉक' टिक-टिक कर रही है। उनके अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के बढ़ते राजनीतिक दबाव के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान के परमाणु ठिकानों पर परमाणु हमला करने का आदेश देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। इस सनसनीखेज दावे के बाद से वैश्विक कूटनीति में खलबली मच गई है और तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। आइए विस्तार से जानते हैं कि टकर कार्लसन के इन दावों के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है और अमेरिकी राजनीति में इसे लेकर क्या प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

नेतन्याहू की हताशा और ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले की आशंका

टकर कार्लसन ने अपने इस सनसनीखेज दावे में कहा है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस समय राजनीतिक रूप से चारों तरफ से घिर चुके हैं और बेहद हताश स्थिति में हैं। कार्लसन के मुताबिक, जब तक अमेरिका उनकी मदद नहीं करता, तब तक इजरायल में उनके लिए राजनीतिक अस्तित्व बचाना मुश्किल हो रहा है।

यही वजह है कि नेतन्याहू लगातार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन करके दबाव बना रहे हैं। कार्लसन का दावा है कि इस दबाव के चलते अमेरिका ईरान की बेहद सुरक्षित और भूमिगत मानी जाने वाली नतान्ज परमाणु सुविधा के पास स्थित 'पिकएक्स माउंटेन' जैसे ठिकानों पर हमला करने के विकल्प तलाश रहा है। कार्लसन ने यहां तक कह दिया कि मौजूदा हालात में युद्ध के मैदान में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को आसान बनाने के लिए अमेरिकी परमाणु नीति में चुपचाप बदलाव किए गए हैं, हालांकि व्हाइट हाउस या पेंटागन की तरफ से इसकी कभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

क्या मंडरा रहा है तीसरे विश्व युद्ध का खतरा? भारत और पाकिस्तान का भी जिक्र

अपनी इस चेतावनी को और अधिक भयावह बनाते हुए टकर कार्लसन ने दावा किया है कि यदि अमेरिका द्वारा ईरान पर पहला परमाणु हमला किया जाता है, तो इसके परिणाम पूरी मानवता के लिए विनाशकारी साबित होंगे। फारस की खाड़ी (Persian Gulf) क्षेत्र में रेडियोधर्मी प्रदूषण फैलने के साथ ही इस संघर्ष की आग बहुत दूर तक फैल सकती है।

कार्लसन ने अपनी बात रखते हुए भारत, पाकिस्तान, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देशों का भी हवाला दिया और आशंका जताई कि यह टकराव अंततः एक भयानक तीसरे विश्व युद्ध (World War III) का रूप ले सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह संभावित युद्ध भले ही छोटा हो, लेकिन बेहद निर्णायक और सर्वनाश करने वाला होगा। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों और गंभीर नीति-निर्माताओं ने कार्लसन के इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि इन बड़े और डरावने दावों के समर्थन में उनके पास कोई पुख्ता दस्तावेज या ठोस सबूत नहीं है, और वे केवल गुमनाम सूत्रों के बयानों पर निर्भर हैं।

दावों की सच्चाई पर सवाल और ट्रंप का पुराना रुख

टकर कार्लसन द्वारा उठाए गए इन गंभीर मुद्दों के बीच राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि उनके इन दावों और वास्तविक जमीनी हकीकत के बीच बहुत बड़ा अंतर है। स्वयं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ समय पहले एक मीडिया इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा था कि वे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने के पक्ष में नहीं हैं और अमेरिका को ऐसी किसी कार्रवाई की कोई आवश्यकता नहीं है।

इसके अलावा, आतंकवाद काउंटर और खुफिया एजेंसियों के पूर्व अधिकारियों का भी यह मानना रहा है कि ईरान द्वारा परमाणु हथियार विकसित करने के मामले में खुफिया रिपोर्टें उतनी आसन्न नहीं हैं जितनी कि आशंका जताई जा रही है। सोशल मीडिया पर तो इस बहस को लेकर कई तरह के मीम्स भी वायरल हो रहे हैं, जिसमें यह तंज कसा जा रहा है कि वर्षों से यह दावा किया जा रहा है कि ईरान परमाणु बम बनाने से कुछ ही हफ्ते दूर है, लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ सामने नहीं आया है।

MAGA आंदोलन के भीतर वैचारिक मतभेद और टकर कार्लसन की भूमिका

यह पूरा घटनाक्रम इस बात को भी उजागर करता है कि किस प्रकार अमेरिका के 'MAGA' (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) आंदोलन के भीतर ही विदेश नीति को लेकर गंभीर वैचारिक मतभेद पैदा हो गए हैं। कभी डोनाल्ड ट्रंप के सबसे बड़े समर्थक माने जाने वाले टकर कार्लसन अब अमेरिका फर्स्ट की उस विचारधारा के समर्थक बन गए हैं जो यह मानती है कि अमेरिका को मध्य-पूर्व के अंतहीन युद्धों और विदेशी लड़واियों में खुद को नहीं झोंकना चाहिए।

कार्लसन का तर्क है कि अमेरिकी विदेश नीति को पूरी तरह से इजरायली हितों के अधीन नहीं किया जाना चाहिए। वॉशिंगटन में नेतन्याहू के बढ़ते प्रभाव और लॉबीइंग पर खुलकर सवाल उठाने वाले कार्लसन रूढ़िवादी राजनीति की उस स्थापित परंपरा को चुनौती दे रहे हैं जो इजरायल को बिना शर्त समर्थन देने की वकालत करती है। एक तरफ जहां आलोचकों का मानना है कि कार्लसन अनावश्यक रूप से साजिशी थ्योरी और तनाव को हवा दे रहे हैं, वहीं उनके समर्थकों का एक बड़ा वर्ग उन्हें अमेरिका की स्थापित व्यवस्था के खिलाफ बोलने वाली एक साहसी और स्वतंत्र आवाज मानता है।