Saturday , June 6 2026

ड्रैगन और पाकिस्तान की ‘महा-साजिश’ हुई नाकाम! UN में अमेरिका ने ऐसा पलटा पासा कि देखते रह गए आसिम मुनीर

ड्रैगन और पाकिस्तान की 'महा-साजिश' हुई नाकाम! UN में अमेरिका ने ऐसा पलटा पासा कि देखते रह गए आसिम मुनीर

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को नीचा दिखाने और घेरने की कोशिश करने वाले चीन और पाकिस्तान को एक बार फिर मुंह की खानी पड़ी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के खिलाफ दोनों देशों ने मिलकर एक बड़ी चक्रव्यूह रचने की कोशिश की थी, लेकिन ऐन वक्त पर महाशक्ति अमेरिका ने आकर पूरा खेल ही पलट दिया। वैश्विक कूटनीति के इस हाई-वोल्टेज ड्रामे में चीन और पाकिस्तान का गुट पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की सारी रणनीतियां और पैंतरेबाजी पूरी तरह फेल साबित हुई।

UN में चीन और पाकिस्तान की खुफिया जुगलबंदी काफी समय से चीन और पाकिस्तान मिलकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती साख को चोट पहुंचाने का ताना-बाना बुन रहे थे। इस बार भी संयुक्त राष्ट्र की बैठक में दोनों देशों ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत भारत को घेरने के लिए एजेंडा सेट करने का प्रयास किया। पाकिस्तानी हुक्मरान और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को उम्मीद थी कि बीजिंग के समर्थन से वे इस बार वैश्विक मंच पर भारत के खिलाफ कोई बड़ा प्रस्ताव या माहौल बनाने में कामयाब हो जाएंगे, लेकिन उनकी यह उम्मीद पूरी तरह से धराशायी हो गई।

अमेरिका ने बीच में आकर कैसे बिगाड़ा खेल जैसे ही चीन और पाकिस्तान ने अपनी इस चाल को आगे बढ़ाने की कोशिश की, वैसे ही अमेरिका ने बीच में आकर मोर्चा संभाल लिया। अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के रुख और उसकी वैश्विक स्थिति का पुरजोर समर्थन करते हुए चीन-पाकिस्तान के इस गठजोड़ को कड़ा झटका दिया। अमेरिकी प्रतिनिधियों ने इस मामले में ऐसा कूटनीतिक रुख अपनाया कि बीजिंग और इस्लामाबाद के पास पीछे हटने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। इस दखल ने साफ कर दिया कि वैश्विक स्तर पर भारत के सामरिक हितों को नुकसान पहुंचाना अब किसी भी देश के लिए आसान नहीं है।

आसिम मुनीर की चाटुकारिता भी नहीं आई काम इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की भूमिका पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। पाकिस्तानी सेना और वहां के नीति निर्माता लगातार चीन के सामने नतमस्तक होकर भारत विरोधी एजेंडे को हवा देने में लगे रहते हैं। अपनी कुर्सी और देश की चरमराती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए मुनीर द्वारा की जा रही बीजिंग की चाटुकारिता इस बार भी किसी काम नहीं आई। अमेरिकी कूटनीति के सामने चीन को भी बैकफुट पर जाना पड़ा, जिससे पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर दुनिया के सामने बेनकाब और लाचार नजर आया।