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तमिलनाडु में अन्नमलाई फैक्टर बना भाजपा के लिए दोधारी तलवार, क्या दक्षिण में खिलेगा कमल या बिगड़ जाएगा खेल?

News India Live, Digital Desk: दक्षिण भारत की राजनीति में इस समय ‘अन्नमलाई’ एक ऐसा नाम बन चुके हैं, जिनकी चर्चा गली-मोहल्लों से लेकर दिल्ली के गलियारों तक हो रही है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नमलाई ने अपनी आक्रामक शैली और ‘पदयात्रा’ के जरिए राज्य में भाजपा को एक नई पहचान तो दी है, लेकिन अब यही आक्रामकता पार्टी के लिए गले की फांस बनती नजर आ रही है। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि ‘अन्नमलाई फैक्टर’ तमिलनाडु में भाजपा की किस्मत बना भी सकता है और बिगाड़ भी।द्रविड़ राजनीति के गढ़ में सेंधमारी की कोशिशतमिलनाडु दशकों से द्रविड़ राजनीति का केंद्र रहा है, जहां DMK और AIADMK का वर्चस्व रहा। अन्नमलाई ने इस किले को भेदने के लिए ‘सनातन’ और ‘भ्रष्टाचार’ के मुद्दों को हवा दी। उनके मुखर अंदाज ने युवाओं को तो आकर्षित किया, लेकिन राज्य के पुराने समीकरणों को हिला कर रख दिया। जानकारों की मानें तो अन्नमलाई की कार्यशैली ने जमीन पर भाजपा के प्रति उत्सुकता पैदा की है, जो पहले कभी नहीं देखी गई थी।पुराने सहयोगियों से बढ़ती दूरियां बनी चुनौतीअन्नमलाई की सबसे बड़ी चुनौती उनके अपने सहयोगियों के साथ तालमेल की कमी मानी जा रही है। AIADMK जैसी पुरानी सहयोगी पार्टी के साथ उनके रिश्तों में आई तल्खी ने भाजपा को राज्य में अलग-थलग कर दिया है। गठबंधन के टूटने का सीधा असर वोटों के ध्रुवीकरण पर पड़ सकता है। यदि भाजपा अकेले दम पर चुनाव लड़ती है, तो इसका सीधा फायदा DMK को होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि विपक्षी वोट दो हिस्सों में बंट सकते हैं।हिंदुत्व और तमिल अस्मिता का अनूठा मेलअन्नमलाई ने चतुराई से हिंदुत्व के एजेंडे को तमिल अस्मिता (Tamil Pride) के साथ जोड़ने की कोशिश की है। वे खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश कर रहे हैं जो दिल्ली की बात भी सुनता है और तमिल संस्कृति की रक्षा भी करता है। हालांकि, तमिलनाडु की जनता ‘द्रविड़ पहचान’ को लेकर बेहद संवेदनशील है। ऐसे में अन्नमलाई का ‘आक्रामक हिंदुत्व’ वहां के न्यूट्रल वोटर्स को कितना भाता है, यह देखना दिलचस्प होगा।क्या वोट बैंक में तब्दील होगी ‘अन्नमलाई’ की भीड़?अन्नमलाई की रैलियों में उमड़ रही भीड़ भाजपा के लिए उत्साहजनक है, लेकिन राजनीति में भीड़ का मतलब हमेशा वोट नहीं होता। तमिलनाडु में बूथ लेवल पर भाजपा का ढांचा अभी भी उतना मजबूत नहीं है जितना कि अन्य क्षेत्रीय दलों का। अन्नमलाई का चेहरा भले ही चमक रहा हो, लेकिन चुनाव जीतने के लिए जिस सांगठनिक मजबूती की जरूरत है, उसमें अभी भी काफी काम बाकी है।