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दशहरे के जश्न के बाद दिल्ली की हवा हुई ‘खराब’: 238 पहुंचा AQI, वायु गुणवत्ता बिगड़ने पर राजधानी में GRAP-1 की पाबंदियां लागू

दशहरा (विजयादशमी) पर रावण दहन और आतिशबाजी के उत्सव के तुरंत बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से खतरनाक दिशा में मुड़ गया है। शांत पड़ती हवाओं, गिरते न्यूनतम तापमान और पराली के शुरुआती धुएं के बीच दशहरे के जश्न ने दिल्ली की आबोहवा को एक बार फिर 'खराब' (Poor) श्रेणी में धकेल दिया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index – AQI) 238 दर्ज किया गया है। वायु प्रदूषण के गहराते संकट और आने वाले दिनों में दीपावली पर्व से पहले स्थिति को और बदतर होने से रोकने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरी दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान का पहला चरण यानी GRAP-1 (ग्रेप-1) तत्काल प्रभाव से लागू करने के कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं।

दशहरे की आतिशबाजी और मौसम के बदले मिजाज का दोहरा असर

हर साल अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में उत्तर भारत में मानसून की विदाई के बाद हवा की रफ्तार मंद पड़ जाती है और तापमान में गिरावट शुरू हो जाती है। इस मौसमी बदलाव के चलते हवा में 'थर्मल इन्वर्जन' (तापमान का उलटाव) की स्थिति पैदा होती है, जिससे वातावरण में मौजूद धूल, धुएं और सूक्ष्म कणों (PM2.5 और PM10) का निकास रुक जाता है और वे जमीन की निचली सतह पर ही फंसकर धुंध का रूप ले लेते हैं।

दशहरे की रात शहर भर में सैकड़ों स्थानों पर हुए रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों के दहन और उसके साथ छोड़े गए भारी पटाखों के धुएं ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया। आनंद विहार, वजीरपुर, जहांगीरपुरी, बवाना, द्वारका और आरके पुरम जैसे प्रमुख हॉटस्पॉट्स पर एक्यूआई 250 से 290 के करीब पहुंच गया, जिसके चलते सुबह के समय आसमान में धुंध (Smog) की मोटी चादर साफ दिखाई दी।

क्या है GRAP-1 और किन गतिविधियों पर तत्काल लगी रोक?

ग्रैप (Graded Response Action Plan) का पहला चरण तब स्वतः सक्रिय होता है जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 'खराब' श्रेणी (AQI 201 से 300 के बीच) में बना रहता है। सीएक्यूएम के आदेश के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD), लोक निर्माण विभाग (PWD) और एनसीआर के प्रशासनिक प्राधिकरणों ने निम्नलिखित पाबंदियों को सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया है:

  1. धूल नियंत्रण और वाटर स्प्रिंकलिंग: निर्माण स्थलों पर धूल उड़ने से रोकने के लिए वाटर गन, एंटी-स्मॉग गन और पानी के नियमित छिड़काव को अनिवार्य किया गया है। 500 वर्ग मीटर से अधिक के निर्माण व विध्वंस (C&D) प्रोजेक्ट्स का डस्ट पोर्टल पर पंजीकरण होना जरूरी है।

  2. कूड़ा और ठोस अपशिष्ट जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध: खुले में कचरा, सूखी पत्तियां, प्लास्टिक या बायोमास जलाने पर सख्त पाबंदी लगा दी गई है। उल्लंघन करने वालों पर भारी पर्यावरण क्षतिपूर्ति जुर्माना लगाया जा रहा है।

  3. सड़कों की मैकेनाइज्ड स्वीपिंग: सड़कों पर उड़ने वाली धूल को कम करने के लिए मशीनों द्वारा सफाई और पानी के छिड़काव के फेरे बढ़ा दिए गए हैं।

  4. होटलों और भोजनालयों में कोयले-लकड़ी पर रोक: होटलों, रेस्टोरेंट्स और ढाबों में तंदूर के लिए कोयले और जलाऊ लकड़ी के उपयोग पर पाबंदी है; केवल गैस या बिजली आधारित उपकरणों को ही अनुमति दी गई है।

  5. पुराने वाहनों की सख्त जांच: 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों की सड़कों पर आवाजाही की निगरानी तेज कर दी गई है। बिना वैध पीयूसी (PUC) वाले वाहनों के भारी चालान काटे जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह: बुजुर्ग और सांस के मरीज बरतें सावधानी

एक्यूआई का 200 से पार जाना सामान्य स्वास्थ्य के लिए भी अनुकूल नहीं माना जाता, लेकिन अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी और हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों के लिए यह स्तर सीधा जोखिम पैदा करता है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को आगामी दिनों के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है:

  • सुबह की सैर से परहेज: तड़के और देर शाम के समय जब धुंध और प्रदूषण सतह के पास सबसे अधिक होता है, उस समय खुले मैदानों या सड़कों पर भारी वर्कआउट और मॉर्निंग वॉक से बचें।

  • मास्क का प्रयोग: भीड़भाड़ वाले चौराहों या बाहर निकलते समय N95 या उच्च गुणवत्ता वाले एंटी-पॉल्यूशन मास्क का उपयोग करें।

  • हाइड्रेटेड रहें और संतुलित आहार लें: फेफड़ों की कार्यक्षमता को बनाए रखने के लिए पर्याप्त पानी पिएं, अदरक-तुलसी की चाय लें और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल-सब्जियों का सेवन करें।

आने वाले दिनों में और गंभीर हो सकता है संकट

मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में अगले कुछ दिनों तक हवा की गति धीमी बनी रहेगी और बारिश की कोई संभावना नहीं है। इसके साथ ही पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान की कटाई के बाद पराली जलाने (Stubble Burning) की घटनाओं में धीरे-धीरे तेजी आने की संभावना है। यदि समय रहते ग्रैप-1 के नियमों का कड़ाई से अनुपालन नहीं कराया गया और आगामी दीपावली के त्योहार पर अनियंत्रित आतिशबाजी हुई, तो दिल्ली की वायु गुणवत्ता 'बहुत खराब' (AQI 301-400) और 'गंभीर' (Severe – AQI 400+) श्रेणी में प्रवेश कर सकती है, जिसके बाद ग्रैप के दूसरे और तीसरे चरण की और अधिक सख्त पाबंदियां झेलनी पड़ सकती हैं।