
देश की राजधानी में आयोजित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की एक उच्च स्तरीय बैठक से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। संसद में आने वाले आगामी एंटी-चीटिंग बिल (Anti-Cheating Bill) की रणनीति तैयार करने के लिए बुलाई गई इस बैठक में कुछ ऐसा हुआ, जिसने देश की सियासी तस्वीरों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उन पूर्व बागी नेताओं की मौजूदगी ने सबको चौंका दिया, जो कभी ममता बनर्जी के बेहद करीबी सिपहसालार हुआ करते थे। इस 'मंगल मिलन' के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी सत्र में विपक्ष की घेराबंदी करने के लिए एनडीए ने एक बेहद मजबूत चक्रव्यूह तैयार कर लिया है।
एंटी-चीटिंग बिल पर एकजुटता: युवाओं के भविष्य के लिए एनडीए का बड़ा दांव
इस विशेष बैठक का मुख्य एजेंडा देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली और पेपर लीक जैसी समस्याओं को रोकने के लिए लाए जा रहे कड़े एंटी-चीटिंग कानून पर आम सहमति बनाना था। सरकार इस कानून के जरिए युवाओं को एक सख्त संदेश देना चाहती है कि परीक्षाओं में पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा। बैठक के दौरान मौजूद सभी घटक दलों ने एक सुर में इस बिल का समर्थन किया। लेकिन नीतिगत चर्चाओं से ज्यादा ध्यान उस टेबल ने खींचा जहां पश्चिम बंगाल की राजनीति के बड़े चेहरे और टीएमसी के पूर्व बागी नेता एनडीए के शीर्ष नेतृत्व के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बैठे नजर आए।
बंगाल से दिल्ली तक हलचल: ममता ब्रिगेड के पूर्व चेहरों की एनडीए में एंट्री
बैठक के भीतर से आई तस्वीरों और खबरों ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खेमे में जरूर बेचैनी बढ़ा दी होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के इन पूर्व दिग्गजों का एनडीए की मुख्यधारा की बैठक में शामिल होना यह साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में बंगाल के भीतर सियासी समीकरण तेजी से बदलने वाले हैं। इन नेताओं की मौजूदगी को केवल एक बिल के समर्थन के तौर पर नहीं, बल्कि एक बड़े दीर्घकालिक राजनीतिक गठबंधन और 'घर वापसी' या नए रणनीतिक जुड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।
विपक्ष के चक्रव्यूह को तोड़ने की तैयारी: क्या होगा इस बैठक का असर
संसद के आगामी सत्र में विपक्ष जहां पेपर लीक और युवाओं के मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में जुटा है, वहीं एनडीए ने एंटी-चीटिंग बिल को मजबूती से पास कराकर बैकफुट से फ्रंटफुट पर आने की रणनीति बना ली है। टीएमसी के पूर्व बागियों को अपने पाले में खड़ा दिखाकर सत्ताधारी गठबंधन ने यह संदेश भी दे दिया है कि क्षेत्रीय दलों के भीतर मची कलह का फायदा उठाने के लिए वह पूरी तरह तैयार है। दिल्ली में हुए इस 'मंगल मिलन' के बाद अब सभी की नजरें संसद के पटल पर होने वाली सियासी जंग पर टिकी हुई हैं।
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