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दिल्ली में 26 सितंबर तक साफ रहेगा आसमान, यूपी-बिहार से ओडिशा तक झमाझम बारिश का अलर्ट; जानें पहाड़ों का हाल

उत्तर भारत और पूर्वी राज्यों में मॉनसून की विदाई के दौर के बीच मौसम का दोहरा मिजाज देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के मैदानी इलाकों में मॉनसूनी हवाएं कमजोर पड़ चुकी हैं और 26 सितंबर तक बारिश की संभावना लगभग न के बराबर है, वहीं दूसरी ओर पूर्वी और मध्य भारत में सक्रिय मौसमी तंत्र के चलते बादलों की जोरदार वापसी हुई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में अगले कुछ दिनों तक तेज गरज-चमक के साथ झमाझम बारिश होने के आसार हैं। इस बीच हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में भी बादलों का डेरा बना हुआ है, जिससे सुबह और रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है।

दिल्ली-एनसीआर में 26 सितंबर तक खिली धूप और उमस भरी गर्मी

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की गतिविधियां लगभग शांत हो चुकी हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस पूरे सप्ताह यानी 26 सितंबर तक दिल्ली-एनसीआर में बारिश होने की कोई विशेष संभावना नहीं है।

इस दौरान दिन में तेज धूप निकलने से अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रह सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जाएगा। दिन के समय 25 से 35 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से सतही शुष्क हवाएं चलने का अनुमान है, जिससे दोपहर के वक्त उमस और चिपचिपी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है। हालांकि, सुबह और देर शाम के समय तापमान में हल्की नरमी रहने से मौसम सामान्य बना रहेगा।

यूपी और बिहार में सक्रिय हुआ मानसूनी तंत्र, भारी बारिश की चेतावनी

दिल्ली के विपरीत पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश और बिहार में बादलों का पहरा मजबूत बना हुआ है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं के प्रभाव से पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों—वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, गाजीपुर, जौनपुर और बलिया में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है। वहीं पश्चिमी और मध्य यूपी के लखनऊ, कानपुर, बरेली और आगरा में हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने की संभावना है।

बिहार में भी मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। राजधानी पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया और कटिहार समेत राज्य के कई जिलों में तेज आंधी और आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने के साथ झमाझम बारिश का 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। मौसम विभाग ने ग्रामीण इलाकों में किसानों और आम नागरिकों को खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे न रुकने की सख्त सलाह दी है।

ओडिशा, बंगाल और झारखंड में मूसलाधार बारिश का तांडव

पूर्वी भारत के तटीय और मैदानी राज्यों में चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) और कम दबाव के क्षेत्र का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। ओडिशा के तटीय जिलों—पुरी, भुवनेश्वर, कटक, बालासोर और गंजाम में 50 से 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश की चेतावनी दी गई है। समंदर में ऊंची लहरें उठने के खतरे को देखते हुए मछुआरों को गहरे पानी में न जाने की हिदायत दी गई है।

झारखंड के रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो में भी रुक-रुक कर भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। पश्चिम बंगाल के कोलकाता, हावड़ा, दक्षिण 24 परगना और उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी व दार्जिलिंग में लगातार बारिश से जलभराव और सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में सर्द हवाएं और भूस्खलन का खतरा

पहाड़ी राज्यों में मौसम तेजी से करवट ले रहा है और समय से पहले ही ठंड ने अपनी उपस्थिति दर्ज करानी शुरू कर दी है:

  • हिमाचल प्रदेश: मनाली, शिमला, कुल्लू, लाहौल-स्पीति और किन्नौर के ऊंचाई वाले इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ के चलते हल्की बारिश और सर्द हवाएं चल रही हैं। मनाली में न्यूनतम पारा तेजी से गिरकर एकल अंक (Single Digit) में पहुंच गया है, जिससे सुबह-शाम हाड़ कंपाने वाली ठंड का अहसास होने लगा है। स्थानीय प्रशासन ने नदी-नालों के आसपास न जाने और संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन के खतरे को देखते हुए सतर्क रहने का निर्देश जारी किया है।

  • उत्तराखंड: देहरादून, नैनीताल, चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जिलों में गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। चारधाम यात्रा मार्गों पर यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं को मौसम का ताजा अपडेट देखकर ही आगे बढ़ने की सलाह दी गई है, क्योंकि चट्टानें खिसकने से कई बार रास्ते अस्थायी रूप से बाधित हो जाते हैं।